Tuesday, February 3, 2026

शालार्थ आईडी घोटाला:प्रधानाचार्य तो केवल नाममात्र के हस्ताक्षरकर्ता हैं; असली साजिशकर्ता तो संस्था के निदेशक हैं? विदर्भ शिक्षक संघ का प्रश्न

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नागपुर:-विदर्भ शिक्षक संघ ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई है कि राज्य में चल रहे शलार्थ आईडी घोटाले की जांच में केवल उन्हीं प्रधानाचार्यों को दोषी ठहराया जा रहा है जिन्होंने कागजात पर हस्ताक्षर किए थे। विदर्भ शिक्षक संघ ने कहा, "प्रधानाचार्य संस्था प्रबंधन के दबाव में काम करते हैं, इसलिए असली अपराधियों को नजरअंदाज करते हुए केवल प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई करना 'चोर को अनदेखा करते हुए साधु को फांसी देने' जैसा है। क्या वह संस्था के नेताओं के दबाव का शिकार है? शालार्थ आईडी मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है। कई प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, यह सर्वविदित तथ्य है कि विद्यालयों में नियुक्तियां और प्रशासनिक निर्णय मुख्यतः संस्था प्रबंधन द्वारा लिए जाते हैं। प्रधानाचार्य केवल उनके कर्मचारी होते हैं जो उनके आदेशों का पालन करते हैं। आज वे मामले की गंभीरता पर विचार किए बिना हस्ताक्षर करने या 
दबाव में आकर हस्ताक्षर करने के कारण कानून के शिकंजे में आ गए हैं। मंत्रालय के संदिग्ध 'अनापत्ति प्रमाण पत्रों' की जांच क्यों नहीं हो रही है? इस घोटाले की जड़ें गहरी हैं। राज्य में भर्ती पर प्रतिबंध होने के बावजूद, मंत्रालय से सीधे 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' जारी किए गए हैं। इस तरह बड़ी संख्या में फर्जी भर्तियां की गई हैं, और शलार्थ आईडी घोटाले में भी इन्हीं लोगों को दोषी पाया गया है। ऐसे में, "मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी और उन्हें प्राप्त करने वाले संस्थान निदेशक अभी तक कैसे मुक्त हैं?" शिक्षक संघ ने तीखा सवाल उठाया है।
संघ का कहना है कि असली साजिशकर्ताओं को छोड़कर केवल कर्मचारियों को निशाना बनाना संदेहास्पद है। विदर्भ शिक्षक संघ ने सरकार से अपील की. विदर्भ शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र धवाडे और सरकार्यवाह नामा जाधव ने इस मामले पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा, एसआईटी को न केवल दस्तावेजी सबूतों की जांच करनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाना चाहिए कि इसके पीछे असली साजिशकर्ता कौन हैं। जो वास्तव में दोषी नहीं हैं, उन्हें दंडित नहीं किया जाना चाहिए और अन्याय नहीं होना चाहि आयोजित साप्ताहिक बैठक में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। इस अवसर पर मार्गदर्शक श्री शुक्ला सर, के. जे. चव्हाण, प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्री गाडगिल सर, जिला सरकारवाह मोहम्मद गौस, घरजाले सर, कार्यवाह श्री सगीर अहमद और श्री चौधरी सर उपस्थित थे। बैठक में सर्वसम्मति से यह राय व्यक्त की गई कि "असली दोषियों को समाज के समक्ष लाया जाना चाहिए, लेकिन निर्दोष प्रधानाचार्यों की बलि नहीं दी जानी चाहिए।" यदि संस्थान का प्रबंधन और मंत्रालय के संबंधित अधिकारी बरी हो जाते हैं और केवल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो शिक्षक संघ राज्य भर में एक जोरदार आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एसआईटी मंत्रालय में उन संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जांच करेगी या केवल प्रधानाचार्यों को ही दोषी ठहराएगी।

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