मेरे प्यारे
देशवासियो, नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले,
हम भारत के लोग, उत्साह के साथ, गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मैं,
आप सभी को गणतन्त्र दिवस के राष्ट्रीय
पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। गणतन्त्र दिवस का
पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर
होता है। स्वाधीनता संग्राम के बल पर, 15 अगस्त 1947 के दिन से, हमारे देश की दशा बदली। भारत स्वाधीन हुआ। हम
अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बने।26 जनवरी 1950 के दिन से, हम अपने गणतन्त्र को, संवैधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
उसी दिन, हमने
अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया। लोकतन्त्र की जननी,
भारतभूमि, उपनिवेश के विधि-विधान से मुक्त हुई और हमारा
लोक-तंत्रात्मक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा
संविधान, विश्व इतिहास में आज तक के सबसे बड़े गणराज्य का
आधार-ग्रंथ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतन्त्रता, समता और बंधुता के आदर्श हमारे गणतन्त्र को
परिभाषित करते हैं। संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीयता की भावना तथा देश की एकता
को संवैधानिक प्रावधानों का सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने हमारे राष्ट्र
का एकीकरण किया। पिछले वर्ष 31 अक्तूबर को, कृतज्ञ देशवासियों ने उत्साहपूर्वक उनकी 150वीं जयंती मनाई। उनकी 150वीं जयंती के पावन अवसर से जुड़े स्मरण-उत्सव मनाए
जा रहे हैं। ये उत्सव देशवासियों में राष्ट्रीय एकता तथा गौरव की भावना को मजबूत
बनाते हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से लेकर पश्चिम तक,
हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता का ताना-बाना
हमारे पूर्वजों ने बुना था।
राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवंत बनाए रखने का
प्रत्येक प्रयास अत्यंत सराहनीय है। पिछले
वर्ष, 7 नवंबर
से, हमारे राष्ट्रीय गीत
‘वन्दे मातरम्’
की रचना के 150 वर्ष सम्पन्न होने के उत्सव भी मनाए जा रहे हैं।
भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है।
राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में ‘वन्दे मातरम् येन्बोम्’ अर्थात ‘हम वन्दे मातरम् बोलें’ इस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और
भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस गीत के
अनुवाद लोकप्रिय हुए। श्री ऑरोबिंदो ने ‘वन्दे मातरम्’ का अंग्रेजी अनुवाद किया। ऋषितुल्य बंकिम चन्द्र
चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वन्दे मातरम्’ हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है। आज से दो दिन पहले, यानी 23 जनवरी को देशवासियों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
की जयंती के दिन उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित की।
वर्ष 2021
से नेताजी की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है ताकि देशवासी,
विशेषकर युवा, उनकी अदम्य देशभक्ति से प्रेरणा प्राप्त करें।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का नारा ‘जय हिन्द’ हमारे राष्ट्र-गौरव का उद्घोष है। प्यारे देशवासियो,आप सब, हमारे जीवंत गणतन्त्र को शक्तिशाली बना रहे हैं।
हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान, मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहते हैं।
हमारे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान,
देशवासियों की आंतरिक सुरक्षा के लिए
तत्पर रहते हैं। हमारे अन्नदाता किसान, देशवासियों के लिए पोषण सामग्री उत्पन्न करते
हैं। हमारे देश की कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएं अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान
स्थापित कर रही हैं। हमारे सेवाधर्मी डॉक्टर, नर्स और सभी स्वास्थ्य-कर्मी देशवासियों के
स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। हमारे निष्ठावान सफाई मित्र,
देश को स्वच्छ रखने में प्रमुख भूमिका
निभाते हैं।
हमारे प्रबुद्ध शिक्षक, भावी पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। हमारे
विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक और इंजीनियर, देश के विकास को नई दिशाएं देते हैं। हमारे
मेहनती श्रमिक भाई-बहन, राष्ट्र का नव-निर्माण करते हैं। हमारे होनहार
युवा और बच्चे, अपनी
प्रतिभा और योगदान से देश के स्वर्णिम भविष्य के प्रति हमारा विश्वास मजबूत करते
हैं। हमारे प्रतिभाशाली कलाकार, शिल्पकार और साहित्यकार, हमारी समृद्ध परम्पराओं को आधुनिक अभिव्यक्ति दे
रहे हैं। अनेक क्षेत्रों के विशेषज्ञ, देश के बहुआयामी विकास को दिशा दे रहे हैं। हमारे
ऊर्जावान उद्यमी, देश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने वाले व्यक्ति और संस्थान,
अनगिनत लोगों के जीवन में प्रकाश का संचार
कर रहे हैं। सरकारी तथा गैर-सरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों में काम करने वाले
सभी कर्तव्यपरायण लोग, राष्ट्र-निर्माण में अपनी सेवाएं समर्पित कर रहे हैं।
जन-सेवा के लिए प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि देशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप कल्याण एवं विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार,सभी जागरुक एवं संवेदनशील नागरिक, हमारे गणतन्त्र की प्रगति यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारे गणतंत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों में कार्यरत सभी देशवासियों की मैं हृदय से सराहना करती हूं। प्रवासी भारतीय, हमारे गणतंत्र की छवि को विश्व-पटल पर गौरव प्रदान करते हैं। मैं उनकी विशेष सराहना करती हूं।प्यारे देशवासियो,आज के दिन, यानी 25 जनवरी को हमारे देश में ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवसमनाया जाता है। जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए हमारे वयस्क नागरिक उत्साहपूर्वक मतदान करते हैं। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनैतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। हमारे मतदाता, बाबासाहब की सोच के अनुरूप, अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय दे रहे हैं। मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतन्त्र का एक शक्तिशाली आयाम है। महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है। ‘प्रधानमंत्री - जन धन योजना’ के तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें महिलाओं के खाते लगभग 56 प्रतिशत हैं। हमारी बहनें और बेटियां, परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। दस करोड़ से अधिक
self-help-groups
से जुड़ी बहनें विकास की नई परिभाषा लिख
रही हैं। महिलाएं, खेत-खलिहानों से लेकर अन्तरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेनाओं तक,
अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं। खेल-कूद
के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने विश्व-स्तर पर नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।
पिछले वर्ष नवंबर में, भारत की बेटियों ने ICC Women’s Cricket World Cup और उसके बाद Blind
Women’s T20 World Cup जीतकर
स्वर्णिम इतिहास रचा है। पिछले ही वर्ष Chess World Cup का फाइनल मैच भारत की ही दो बेटियों के बीच खेला
गया। ये उदाहरण खेल-जगत में हमारी बेटियों के वर्चस्व का प्रमाण हैं। ऐसी बेटियों
पर देशवासियों को गर्व है। पंचायती राज
संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई
ऊंचाई देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को
अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी। विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका
महत्वपूर्ण रहेगी।
उनके बढ़ते हुए योगदान से, हमारा देश महिला-पुरुष समानता पर आधारित समावेशी
गणतन्त्र का उदाहरण प्रस्तुत करेगा। समावेशी
सोच के साथ, वंचित
वर्गों के कल्याण और विकास के लिए, अनेक योजनाओं को कार्यरूप दिया जा रहा है। पिछले वर्ष 15
नवंबर को, देशवासियों ने, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन
पांचवां ‘जनजातीय
गौरव दिवस’ मनाया
तथा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष में मनाए गए उत्सव सम्पन्न
हुए। ‘आदि
कर्मयोगी’ अभियान
के माध्यम से, जनजातीय
समुदाय के लोगों में नेतृत्व क्षमता को निखारा गया। विगत वर्षों में सरकार ने,
जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास से
देशवासियों का परिचय कराने के लिए, संग्रहालयों के निर्माण सहित अनेक कदम उठाए हैं।
उनके कल्याण और विकास को प्राथमिकता दी गई है। ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’
के तहत अब तक 6 करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं। एकलव्य
मॉडल रेजीडेंशियल स्कूलों में लगभग एक लाख चालीस हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त
कर रहे हैं तथा अनेक विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन
किया है। स्वास्थ्य और शिक्षा के ऐसे अभियान, जनजातीय समुदायों की विरासत और विकास का समन्वय
कर रहे हैं।
‘धरती
आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ तथा ‘पीएम-जनमन योजना’ के द्वारा PVTG समुदायों सहित, सभी जनजातीय समुदायों का सशक्तीकरण हुआ है। हमारे अन्नदाता किसान, हमारे समाज के तथा अर्थ-व्यवस्था के मेरुदंड हैं।
किसानों की परिश्रमी पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है।
किसानों के परिश्रम के बल पर ही हम कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात कर पा रहे
हैं। अनेक किसानों ने सफलता के अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। किसान
भाई-बहनों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिले, रियायती ब्याज पर ऋण मिले,
प्रभावी बीमा सुरक्षा मिले,
खेती के लिए अच्छे बीज मिलें,
सिंचाई की सुविधाएं मिलें,
अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक उपलब्ध हों,
उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाए
तथा जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए, इन सभी विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ के द्वारा किसान भाई-बहनों के योगदान को आदर दिया
जा रहा है तथा उनके प्रयासों को संबल प्रदान किया जा रहा है। दशकों से गरीबी के साथ जूझ रहे करोड़ों देशवासियों
को, गरीबी की सीमा-रेखा
से ऊपर लाया गया है। साथ ही,ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि वे पुनः गरीबी से
पीड़ित न होने पाएं। अंत्योदय की संवेदना को कार्यरूप देने वाली,
विश्व की सबसे बड़ी योजना,
‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’
इस सोच पर आधारित है कि 140
करोड़ से अधिक आबादी वाले हमारे देश में
कोई भी भूखा न रहे। इस योजना से लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिल रही है। गरीब
परिवारों के लिए बिजली-पानी तथा शौचालय की सुविधा से युक्त 4
करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण करके,
उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने तथा आगे बढ़ने
का आधार प्रदान किया गया है। गरीबों के कल्याण के हित में किए गए ऐसे प्रयास
महात्मा गांधी के सर्वोदय के आदर्श को कार्यरूप देते हैं। विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे देश में है।
गर्व की बात है कि हमारे युवाओं में असीम प्रतिभा है। हमारे युवा उद्यमी,
खिलाड़ी, वैज्ञानिक और professionals,
देश में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं तथा
विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आज बड़ी संख्या में हमारे युवा,
स्व-रोजगार की सफलता के प्रभावशाली उदाहरण
प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारे युवा ही, हमारे राष्ट्र की विकास यात्रा के ध्वज-वाहक हैं।
‘मेरा युवा भारत’
या ‘MY भारत’, टेक्नोलॉजी की सहायता से संचालित एक अनुभव-आधारित
शिक्षा व्यवस्था है। यह युवाओं को नेतृत्व और कौशल-विकास सहित,
कई क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के साथ
जोड़ती है। हमारे देश में स्टार्ट-अप्स की प्रभावशाली सफलता का प्रमुख श्रेय हमारे
युवा उद्यमियों को जाता है। युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं पर केन्द्रित नीतियों और
कार्यक्रमों के बल पर देश के विकास को गति मिलेगी। मुझे विश्वास है कि वर्ष 2047
तक, विकसित भारत के निर्माण में युवा-शक्ति की प्रमुख
भूमिका रहेगी। प्यारे देशवासियो, भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी
अर्थ-व्यवस्था है। विश्व-पटल पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में निरंतर आर्थिक
विकास हो रहा है। हम, निकट भविष्य में, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने के
लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में
निवेश करके, हम अपनी
आर्थिक संरचना का उच्च-स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहे हैं। आर्थिक नियति के निर्माण
की यात्रा में, आत्म-निर्भरता
और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं। स्वाधीनता के बाद
देश के आर्थिक एकीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्णय, GST को लागू करने से One
Nation, One Market की व्यवस्था स्थापित
हुई है। GST व्यवस्था
को और अधिक प्रभावी बनाने के हाल ही के निर्णय से हमारी अर्थ-व्यवस्था को और अधिक
शक्ति मिलेगी। श्रम सुधार के क्षेत्र में चार ‘Labour
Codes’ जारी किए गए हैं।
इससे हमारे श्रमिक भाई-बहन लाभान्वित होंगे तथा उद्यमों के विकास को भी गति
मिलेगी।प्यारे देशवासियो,प्राचीन काल से ही, पूरी मानवता हमारी सभ्यता,
संस्कृति तथा आध्यात्मिक परम्परा से
लाभान्वित होती रही है। आयुर्वेद, योग तथा प्राणायाम को विश्व समुदाय ने सराहा है,
अपनाया है। अनेक महान विभूतियों ने हमारी
आध्यात्मिक एवं सामाजिक एकता की धारा को अविरल प्रवाह दिया है।
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