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Monday, January 26, 2026

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले, हम भारत के लोग, उत्साह के साथ, गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मैं, आप सभी को गणतन्त्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। गणतन्त्र दिवस का पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर होता है। स्वाधीनता संग्राम के बल पर, 15 अगस्त 1947 के दिन से, हमारे देश की दशा बदली। भारत स्वाधीन हुआ। हम अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बने।26 जनवरी 1950 के दिन से, हम अपने गणतन्त्र को, संवैधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उसी दिन, हमने अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया। लोकतन्त्र की जननी, भारतभूमि, उपनिवेश के विधि-विधान से मुक्त हुई और हमारा लोक-तंत्रात्मक गणराज्य अस्तित्व में आया। हमारा 
संविधान, विश्व इतिहास में आज तक के सबसे बड़े गणराज्य का आधार-ग्रंथ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतन्त्रता, समता और बंधुता के आदर्श हमारे गणतन्त्र को परिभाषित करते हैं। संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीयता की भावना तथा देश की एकता को संवैधानिक प्रावधानों का सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने हमारे राष्ट्र का एकीकरण किया। पिछले वर्ष 31 अक्तूबर को, कृतज्ञ देशवासियों ने उत्साहपूर्वक उनकी 150वीं जयंती मनाई। उनकी 150वीं जयंती के पावन अवसर से जुड़े स्मरण-उत्सव मनाए जा रहे हैं। ये उत्सव देशवासियों में राष्ट्रीय एकता तथा गौरव की भावना को मजबूत बनाते हैं। उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से लेकर पश्चिम तक, हमारी प्राचीन सांस्कृतिक एकता का ताना-बाना हमारे पूर्वजों ने बुना था। 



राष्ट्रीय एकता के स्वरूपों को जीवंत बनाए रखने का प्रत्येक प्रयास अत्यंत सराहनीय है। पिछले वर्ष, 7 नवंबर से, हमारे राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम्की रचना के 150 वर्ष सम्पन्न होने के उत्सव भी मनाए जा रहे हैं। भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है। राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में वन्दे मातरम् येन्बोम्अर्थात हम वन्दे मातरम् बोलेंइस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस गीत के अनुवाद लोकप्रिय हुए। श्री ऑरोबिंदो ने वन्दे मातरम्का अंग्रेजी अनुवाद किया। ऋषितुल्य बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वन्दे मातरम्हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है। आज से दो दिन पहले, यानी 23 जनवरी को देशवासियों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के दिन उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित की। 

वर्ष 2021 से नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवसके रूप में मनाया जाता है ताकि देशवासी, विशेषकर युवा, उनकी अदम्य देशभक्ति से प्रेरणा प्राप्त करें। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का नारा जय हिन्दहमारे राष्ट्र-गौरव का उद्घोष है। प्यारे देशवासियो,आप सब, हमारे जीवंत गणतन्त्र को शक्तिशाली बना रहे हैं। हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान, मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहते हैं। हमारे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान, देशवासियों की आंतरिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे अन्नदाता किसान, देशवासियों के लिए पोषण सामग्री उत्पन्न करते हैं। हमारे देश की कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएं अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं। हमारे सेवाधर्मी डॉक्टर, नर्स और सभी स्वास्थ्य-कर्मी देशवासियों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। हमारे निष्ठावान सफाई मित्र, देश को स्वच्छ रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। 
हमारे प्रबुद्ध शिक्षक, भावी पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। हमारे विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक और इंजीनियर, देश के विकास को नई दिशाएं देते हैं। हमारे मेहनती श्रमिक भाई-बहन, राष्ट्र का नव-निर्माण करते हैं। हमारे होनहार युवा और बच्चे, अपनी प्रतिभा और योगदान से देश के स्वर्णिम भविष्य के प्रति हमारा विश्वास मजबूत करते हैं। हमारे प्रतिभाशाली कलाकार, शिल्पकार और साहित्यकार, हमारी समृद्ध परम्पराओं को आधुनिक अभिव्यक्ति दे रहे हैं। अनेक क्षेत्रों के विशेषज्ञ, देश के बहुआयामी विकास को दिशा दे रहे हैं। हमारे ऊर्जावान उद्यमी, देश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने वाले व्यक्ति और संस्थान, अनगिनत लोगों के जीवन में प्रकाश का संचार कर रहे हैं। सरकारी तथा गैर-सरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों में काम करने वाले सभी कर्तव्यपरायण लोग, राष्ट्र-निर्माण में अपनी सेवाएं समर्पित कर रहे हैं। 


जन-सेवा के लिए प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि देशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप कल्याण एवं विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार,सभी जागरुक एवं संवेदनशील नागरिक, हमारे गणतन्त्र की प्रगति यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारे गणतंत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों में कार्यरत सभी देशवासियों की मैं हृदय से सराहना करती हूं। प्रवासी भारतीय, हमारे गणतंत्र की छवि को विश्व-पटल पर गौरव प्रदान करते हैं। मैं उनकी विशेष सराहना करती हूं।प्यारे देशवासियो,आज के दिन, यानी 25 जनवरी को हमारे देश में राष्ट्रीय मतदाता दिवसमनाया जाता है। जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए हमारे वयस्क नागरिक उत्साहपूर्वक मतदान करते हैं। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनैतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। हमारे मतदाता, बाबासाहब की सोच के अनुरूप, अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय दे रहे हैं। मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतन्त्र का एक शक्तिशाली आयाम है। महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओअभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री - जन धन योजनाके तहत अब तक 57 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। इनमें महिलाओं के खाते लगभग 56 प्रतिशत हैं। हमारी बहनें और बेटियां, परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। महिलाएं देश के समग्र विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। दस करोड़ से अधिक
self-help-groups से जुड़ी बहनें विकास की नई परिभाषा लिख रही हैं। महिलाएं, खेत-खलिहानों से लेकर अन्तरिक्ष तक, स्व-रोजगार से लेकर सेनाओं तक, अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं। खेल-कूद के क्षेत्र में हमारी बेटियों ने विश्व-स्तर पर नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। पिछले वर्ष नवंबर में, भारत की बेटियों ने ICC Women’s Cricket World Cup और उसके बाद Blind Women’s T20 World Cup जीतकर स्वर्णिम इतिहास रचा है। पिछले ही वर्ष Chess World Cup का फाइनल मैच भारत की ही दो बेटियों के बीच खेला गया। ये उदाहरण खेल-जगत में हमारी बेटियों के वर्चस्व का प्रमाण हैं। ऐसी बेटियों पर देशवासियों को गर्व है। पंचायती राज संस्थाओं में महिला जन-प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 46 प्रतिशत है। महिलाओं के राजनैतिक सशक्तीकरण को नई ऊंचाई देने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियमसे, महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व शक्ति मिलेगी। विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। 

उनके बढ़ते हुए योगदान से, हमारा देश महिला-पुरुष समानता पर आधारित समावेशी गणतन्त्र का उदाहरण प्रस्तुत करेगा। समावेशी सोच के साथ, वंचित वर्गों के कल्याण और विकास के लिएअनेक योजनाओं को कार्यरूप दिया जा रहा है। पिछले वर्ष 15 नवंबर को, देशवासियों ने, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन पांचवां जनजातीय गौरव दिवसमनाया तथा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष में मनाए गए उत्सव सम्पन्न हुए। आदि कर्मयोगीअभियान के माध्यम से, जनजातीय समुदाय के लोगों में नेतृत्व क्षमता को निखारा गया। विगत वर्षों में सरकार ने, जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास से देशवासियों का परिचय कराने के लिए, संग्रहालयों के निर्माण सहित अनेक कदम उठाए हैं। उनके कल्याण और विकास को प्राथमिकता दी गई है। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशनके तहत अब तक 6 करोड़ से अधिक स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं। एकलव्य मॉडल रेजीडेंशियल स्कूलों में लगभग एक लाख चालीस हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं तथा अनेक विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। स्वास्थ्य और शिक्षा के ऐसे अभियान, जनजातीय समुदायों की विरासत और विकास का समन्वय कर रहे हैं। 
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियानतथा पीएम-जनमन योजनाके द्वारा PVTG समुदायों सहित, सभी जनजातीय समुदायों का सशक्तीकरण हुआ है। हमारे अन्नदाता किसान, हमारे समाज के तथा अर्थ-व्यवस्था के मेरुदंड हैं। किसानों की परिश्रमी पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। किसानों के परिश्रम के बल पर ही हम कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात कर पा रहे हैं। अनेक किसानों ने सफलता के अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। किसान भाई-बहनों को अपने उत्पादों का उचित मूल्य मिले, रियायती ब्याज पर ऋण मिले, प्रभावी बीमा सुरक्षा मिले, खेती के लिए अच्छे बीज मिलें, सिंचाई की सुविधाएं मिलें, अधिक उत्पादन के लिए उर्वरक उपलब्ध हों, उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जाए तथा जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए, इन सभी विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है। पीएम किसान सम्मान निधिके द्वारा किसान भाई-बहनों के योगदान को आदर दिया जा रहा है तथा उनके प्रयासों को संबल प्रदान किया जा रहा है। दशकों से गरीबी के साथ जूझ रहे करोड़ों देशवासियों को, गरीबी की सीमा-रेखा से ऊपर लाया गया है। साथ ही,ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि वे पुनः गरीबी से पीड़ित न होने पाएं। अंत्योदय की संवेदना को कार्यरूप देने वाली, विश्व की सबसे बड़ी योजना, ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजनाइस सोच पर आधारित है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले हमारे देश में कोई भी भूखा न रहे। इस योजना से लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिल रही है। गरीब परिवारों के लिए बिजली-पानी तथा शौचालय की सुविधा से युक्त 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण करके, उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने तथा आगे बढ़ने का आधार प्रदान किया गया है। गरीबों के कल्याण के हित में किए गए ऐसे प्रयास महात्मा गांधी के सर्वोदय के आदर्श को कार्यरूप देते हैं। विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे देश में है। गर्व की बात है कि हमारे युवाओं में असीम प्रतिभा है। हमारे युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और professionals, देश में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं तथा विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आज बड़ी संख्या में हमारे युवा, स्व-रोजगार की सफलता के प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारे युवा ही, हमारे राष्ट्र की विकास यात्रा के ध्वज-वाहक हैं। मेरा युवा भारतया ‘MY भारत’, टेक्नोलॉजी की सहायता से संचालित एक अनुभव-आधारित शिक्षा व्यवस्था है। यह युवाओं को नेतृत्व और कौशल-विकास सहित, कई क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के साथ जोड़ती है। हमारे देश में स्टार्ट-अप्स की प्रभावशाली सफलता का प्रमुख श्रेय हमारे युवा उद्यमियों को जाता है। युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं पर केन्द्रित नीतियों और कार्यक्रमों के बल पर देश के विकास को गति मिलेगी। मुझे विश्वास है कि वर्ष 2047 तक, विकसित भारत के निर्माण में युवा-शक्ति की प्रमुख भूमिका रहेगी। प्यारे देशवासियो, भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थ-व्यवस्था है। विश्व-पटल पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम, निकट भविष्य में, विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में निवेश करके, हम अपनी आर्थिक संरचना का उच्च-स्तर पर पुनर्निर्माण कर रहे हैं। आर्थिक नियति के निर्माण की यात्रा में, आत्म-निर्भरता और स्वदेशी हमारे मूलमंत्र हैं। स्वाधीनता के बाद देश के आर्थिक एकीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्णय, GST को लागू करने से One Nation, One Market की व्यवस्था स्थापित हुई है। GST व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के हाल ही के निर्णय से हमारी अर्थ-व्यवस्था को और अधिक शक्ति मिलेगी। श्रम सुधार के क्षेत्र में चार ‘Labour Codes’ जारी किए गए हैं। इससे हमारे श्रमिक भाई-बहन लाभान्वित होंगे तथा उद्यमों के विकास को भी गति मिलेगी।प्यारे देशवासियो,प्राचीन काल से ही, पूरी मानवता हमारी सभ्यता, संस्कृति तथा आध्यात्मिक परम्परा से लाभान्वित होती रही है। आयुर्वेद, योग तथा प्राणायाम को विश्व समुदाय ने सराहा है, अपनाया है। अनेक महान विभूतियों ने हमारी आध्यात्मिक एवं सामाजिक एकता की धारा को अविरल प्रवाह दिया है।
 

Thursday, June 20, 2024

दिव्यांगजन संस्थान का दौरा किया महामहिम [राष्ट्रपति] श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने…..

नई दिल्ली:- भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज (20 जून, 2024) नई दिल्ली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय दिव्यांगजन संस्थान का दौरा किया, जहाँ उन्होंने दिव्यांग बच्चों और छात्रों के साथ समय बिताया और उनके द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम देखा। उन्होंने पुनर्निर्मित प्रोस्थेसिस और ऑर्थोसिस सेंटर का भी दौरा किया और रोगियों से बातचीत की। राष्ट्रपति ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी देश या समाज की प्रगति को उस देश या समाज के लोगों द्वारा दिव्यांगजनों के प्रति दिखाई गई 
संवेदनशीलता से मापा जा सकता है। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और समावेशिता हमारी संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि जब हमारे प्रयास दिव्यांगजनों की जरूरतों के प्रति समावेशी और संवेदनशील हों तो कोई भी शारीरिक स्थिति 
सामान्य जीवन जीने में बाधा नहीं बन सकती। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि दिव्यांगजन अपने कौशल और प्रतिभा से हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उन्होंने दीपा मलिक, अरुणिमा सिन्हा और अवनी लेखरा जैसे खिलाड़ियों और केएस राजन्ना जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का उदाहरण दिया और कहा कि ऐसे सभी लोग इस बात के उदाहरण हैं कि समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ, कोई भी व्यक्ति हर तरह की शारीरिक सीमाओं को पार कर सकता है। राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय दिव्यांगजन संस्थान पिछले कई दशकों से दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में काम करने के लिए संस्थान से जुड़े सभी लोगों की सराहना की।

Wednesday, March 20, 2024

भारत मंडप में स्टार्ट-अप महाकुंभ का उद्घाटन किया...पीएम मोदी ने

 नई दिल्ली :- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत पैगाम में तीर्थ-अप महाकुंभ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का अनुशीलन भी आयोजित किया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने महाकुंभ के महत्व पर प्रकाश डाला और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए देश के रोडमैप पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ दशकों में भारत के छाप छोड़े का उलेख और नवाचार और स्टाम्प-अप संस्कृति के उभरते रुझानों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टांप-अप जगत के लोगों की उपस्थिति आज के अवसर का महत्व है। देश में स्टार-अप की सफलता पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मूल तत्व की ओर से ध्यान आकर्षित किया गया है जो उन्हें सफल बनाता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में इस महाकुंभ में पर्यावरणीय ऊर्जा और जीवंतता का निर्माण हो रहा है  प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वे खेल और प्रदर्शनी स्टॉलों का दौरा कर रहे थे , तो इसी तरह की भावना का अनुभव हुआ। इन चित्रों पर लोगों को अपने नवप्रवर्तनों पर बहुत गर्व है। यथार्थ ने कहा कि स्टांप-अप महाकुंभ में आने वाला कोई भी भारतीय भविष्य के यूनिकॉर्न और डेकाकॉर्न का साक्षी बनेगा। प्रधानमंत्री ने सही समुदाय के कारण देश में इकोसिस्टम के 
विकास पर संतोष से बातचीत की। समाज में सिद्धांत की अवधारणा के प्रति आरंभिक अनिच्छा और मॉडल का अनुकरण करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ सिद्धांत इंडिया के तहत नवोन्मेषी विचार को मंच मिला। उन्होंने इनक्यूबेटरों के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट और फेलोशिप में इकोसिस्टम के विकास को पोर्टफोलियो में शामिल करते हुए कहा कि इससे टियर 2 और टियर 3 शहरों के छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मूर्ति एक सामाजिक संस्कृति बन गई है और सामाजिक संस्कृति को कोई रोक नहीं सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्रांति क्रांति का नेतृत्व छोटे शहरों द्वारा किया जा रहा है और यह क्रांति कृषि वस्त्र , चिकित्सा , परिवहन , अंतरिक्ष , योग और आयुर्वेद सहित कई जिलों में क्रांति हो रही है। अंतरिक्ष प्रक्षेपण के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के 50 से अधिक क्षेत्रों में काम कर रहे हैं , जिसमें अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने जिद्दी सोच पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि स्टैटिस्टिक्स ने यह वास्तविकता बदल दी है कि एस्टेवसाय शुरू करने के लिए बहुत अधिक अवेश्यन की संभावना होती है। उन्होंने देश के युवाओं के लिए नौकरी देने वाले के बजाय नौकरी देने वाले की छुट्टी कर दी। उन्होंने कहा कि भारत में 1.25 लाख कलाकार काम कर रहे हैं। यहां तीसरा सबसे बड़ा पैथोलॉजी 
इकोसिस्टम है , जिसमें सीधे तौर पर 12 लाख युवा जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने रामायण से अपने पेट्रोलियम शीघ्रता से भुगतान करने के प्रति संयम को कहा। जीईएम पोर्टल ने 20,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की पेशकश की है। वे नए इलाके में युवाओं की दुकान के लिए निकले। प्रधानमंत्री ने कहा कि नीतिगत मंचों पर शुरू किए गए स्टांप-अप आज नए बाजार को छू रहे हैं। डिजिटल इंडिया द्वारा स्टॉर्ट-अप को दिए गए प्रोत्साहन के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक बड़ा प्रेरणा स्रोत है। सलाह दी गई कि कॉलेज इसे एक अध्ययन के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि यूपीआई फिन-टेक स्टाम्प-अप के समर्थन का एक स्तंभ बन गया है जो देश में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए नवीन विचारधारा और सेवाओं के विकास का नेतृत्व करता है। उन्होंने 20वें शिखर सम्मेलन के दौरान भारत पैगाम में उद्योग और वैश्विक नेताओं की लंबी कतारों को याद करते हुए एक बूथ स्थापित किया , जिसमें यूपीआई की समझ दी गई और प्रतिभा दौड़ की भावना की गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी तरह वित्तीय समावेशन और ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर घाटे की कमी है। प्रौद्योगिकी का विस्तार शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों तक हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में 45 प्रतिशत से अधिक स्टार-अप महिलाओं के नेतृत्व वाले हैं , वे शिक्षा कृषि या स्वास्थ्य हो। प्रधानमंत्री ने न केवल भारत के विकास के लिए बल्कि मानवता की संस्कृति के नवनिर्माण को महत्व दिया। 
उन्होंने कहा- 20 के तहत वैश्विक फिल्मों के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए भारत की पहल का उल्लेख किया गया है जो कि फिल्मों को इंजन के रूप में विकसित करने का काम करता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (स्माल) के क्षेत्र में भी भारत का पलड़ा भारी होने की बात कही। प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत के साथ युवा अन्वेषकों और वैश्विक प्रतिभागियों दोनों के आगमन के लिए सृजित हो रहे कई अवसरों पर दौरा किया और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन भारत उद्यम मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कुछ समय पहले अमेरिकी सीनेट में अपनी बैठक के दौरान वास्तुशिल्प पर चर्चा को याद किया और कहा कि भारत इस क्षेत्र में अग्रणी बना रहेगा। अख्तर ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि विश्व के कई देशों के लिए भारतीय समाधानों के लिए वैशिष्ट्य की सलाह ली जाती है। प्रधानमंत्री ने हैकथॉन आदि के माध्यम से भारतीय युवाओं से सीखने की वैश्विक इच्छा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेनॉल्ड्स में परीक्षण किए गए समाधानों को वैश्विक इंटरफ़ेस मिला है। उन्होंने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और सैनराइज सेक्टर क्षेत्र में फ्यूचर की रिसर्च और योजना के लिए एक करोड़ रुपये के फंड का भी उल्लेख किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे लोगों की मदद करते हैं और जो पियथ समाज ने उनसे सहायता ली है वे उन्हें सहायता के माध्यम से लौटाते हैं। इलेक्ट्रानिक्स से कहा गया है कि वे मेट्रिकार्टअप रेज़्यूमे में शामिल हैं। उन्होंने अपने इनक्यूबेशन संग्रहालयों स्कॉलरशिप और एडवेंचर्स का दौरा करने और छात्रों के साथ अपनी कोचिंग साझा करने के लिए कहा। डिजिटल हैकथॉन के माध्यम से सरकारी समस्या विवरण के समाधान में युवाओं को शामिल करने के लिए अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि हैकथॉन कल्चरल सरकार में कई अच्छे सॉल्यूशन अपनाए गए और सॉल्यूशन तलाशने की कोशिश की गई। उन्होंने म्यूजियम और सूक्षम , लघु एवं इलेक्ट्रानिकम एंटरप्राइज (एमएसएमई) में इसका पालन करने के लिए कहा। उन्होंने महाकुंभ में शामिल लोगों से कहा कि वे क्रियाकलापों की सूची सामने रखें। प्रधानमंत्री ने भारत को 11 वें स्थान से लेकर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में युवाओं के योगदान को बताया। भारत की तीसरी सबसे बड़ी उद्योग निर्माण की कलाकृतियों को पूरा करने में अंतिम भूमिका निभाने वाली की भूमिका भी प्रकाश में डाली गई। सिद्धि का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों के साथ बातचीत करके उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की जाती है। उन्होंने युवाओं के भविष्य के बारे में राय दी। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल और श्री सोम प्रकाश सहित अन्य उपस्थित थे। 
 

Tuesday, April 16, 2019

55 साल में देश में घोर अन्याय किया है,क्या इस अन्याय के बाद कांग्रेस लोगों को न्याय दे पाएगी... प्रधानमंत्री मोदी

एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि 1984 के दंगों में सिखों का कत्लेआम हुआ, क्या सिख समुदाय को कांग्रेस न्याय दे पाएगी? कांग्रेस ने कई बार संविधान का दुरुपयोग किया, क्या इस अपमान का वो न्याय दिला पाएंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि कांग्रेस ने पिछले 55 साल में देश में घोर अन्याय किया है। क्या इस अन्याय के बाद कांग्रेस लोगों को न्याय दे पाएगी। अपनी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पांच साल में हमारी सरकार ने सामान्य मानवीय आवश्यकता को प्राथमिकता दी, जो बहुत पहले मिल जाना था, लेकिन नहीं हो पाया था। हमने उसे पूरा करने के लिए पूरी जान लगाई। उन्होंने कहा कि अब अगले पांच साल में हमारा ध्यान लोगों की आकांक्षाओं पर है। हम पहली बार ऐसा संकल्प पत्र लाए हैं जिसे पूरा करेंगे और लोगों को जवाब देंगे। देश में प्रेरणा का माहौल बनाना चाहिए। 
2022 में देश की स्वतंत्रता के 75 साल होंगे। तब तक के लिए हमने 75 कदम ऐसे लिए हैं जिसे हमें 2022 तक पूरा करना है। इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधियों पर जमकर बरसे। मोदी ने कहा कि कश्मीर में पीडीपी और एनसी दोनों पार्टियां आउट डेटेड हो गई हैं। उन्होंने स्थानीय निकाय चुनाव का विरोध किया, लेकिन फिर भी वहां करीब 70 प्रतिशत वोटिंग हुई। राजनीतिक विरोध चाहे हो, लेकिन मोदी का विरोध करते-करते भारत के दुश्मन न बनें, ये सीमा सबको बनानी चाहिए। मोदी के खिलाफ बोलते-बोलते देश के खिलाफ कोई न बोले, ये जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा व कांग्रेस साथ लड़ रहे थे, पर नतीजा क्या आया ये सबने देखा। महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी ने पूरे जोर लगाकर चुनाव लड़ा और उनकी जुगलबंदी जबरदस्त थी, पर नतीजा क्या आया?  पीएम मोदी ने किसानों के बारे में बात करते हुए कहा कि हमने किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड बांटे, इससे किसान ये समझ पाते हैं कि उनके खेत की मिट्टी की सेहत कैसी है।
हमने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा है। सरकार ने 2007 से लंबित MSP लागू किया। UPA सरकार ने इसे दबाकर रखा था। हमने किसानों को फसल की 1.5 गुना कीमत देने का फैसला किया। 23 मई के बाद हमारी नई सरकार बनने के बाद हिंदुस्तान के सभी किसानों को पेंशन दी जाएगी। हमने संकल्प पत्र में किसानों को बिना ब्याज के लोन देने का फैसला किया है। मत्स्य पालकों के लिए हमने किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है। हम अनेक चीजों को एक साथ कर रहे हैं।  लोग हमारी स्पीड, स्केल और हमारे स्किल देख रहे हैं। 5 साल में लगातार इसी आधार पर हम चले हैं और एक भी दाग हम पर नहीं। हमारा 5 साल तक का कठोर परिश्रम ही लोगों में विश्वास जगाता है।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...