Wednesday, October 25, 2023

सत्ता के लिए हमास, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों को गले लगा सकते है उद्धव ठाकरे, MH-CM एकनाथ शिंदे

आजाद मैदान में शिव सेना की दशहरा रैली में विशाल सभा को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को दफन कर दिया तथा कांग्रेस और समाजवादी दलों से हाथ मिला लियाशिंदे ने ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि उन्होंने अपनी वैचारिक विरासत के साथ बेईमानी करके बाल ठाकरे की पीठ में छुरा घोंपा हैशिंदे ने कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर वे (शिवसेना-यूबीटी) असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के साथ गठबंधन कर लें और वे अपने स्वार्थी उद्देश्यों और कुर्सी (सत्ता) के लिए हमास, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों को गले लगा लें। 
विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि लोग 2024 के चुनावों में दस सिर वाले इंडिया गठबंधन रावण को दफना देंगे।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले साल लगातार तीसरी बार सत्ता में आएंगे और हम उनका हाथ मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र से 45 सांसद भेजेंगे। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीट है। शिंदे ने कहा कि यह मोदी ही थे जिन्होंने अनुच्छेद 370 हटाकर और राम मंदिर निर्माण के जरिए बाल ठाकरे के सपनों को पूरा किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है जो कानूनी जांच में खरा उतरेगा। साथ ही, उन्होंने युवाओं से आत्महत्या जैसे कदम नहीं उठाने की अपील की।
शिंदे ने कहा,आपने सत्ता के लिए कांग्रेस और समाजवादियों के साथ जाकर बाला साहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को दफन कर दिया। बाला साहेब ने शिवतीर्थ (शिवाजी पार्क मैदान) से गर्व से कहो हम हिंदू हैं का नारा दिया था, लेकिन उस स्थान से गर्व से कहो हम कांग्रेसी और समाजवादी हैं जैसे नारे दिए जा रहे हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने दादर के शिवाजी पार्क मैदान पर पारंपरिक वार्षिक दशहरा रैली का आयोजन किया। शिंदे ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे 2004 से ही मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए थे, लेकिन बात नहीं बनी। शिंदे ने दावा किया, उनकी (उद्धव की) इच्छा 2004 से ही मुख्यमंत्री बनने की थी लेकिन जुगाड़ काम नहीं आया।  





उन्होंने दिखावा किया कि उनकी इस पद में कभी दिलचस्पी नहीं रही है। सार्वजनिक रूप से कहा गया कि उन्होंने शरद पवार की सलाह पर (2019 विधानसभा चुनाव के बाद) जिम्मेदारी स्वीकार की।

ब्यूटी पार्लर जैसे फेस पैक बनाए घर पर जाने कैसे....?

आपको पार्लर से किसी तरह के फेशियल कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और मिनटों में ही त्वचा घर बैठे-बैठे ही चमक जाएगी। ऑयली स्किन से परेशान लोग इस फेस पैक को लगाकर देखें।  चेहरे से चिकनाहट हटाने में यह फेस पैक बेहद असरदार है। आपको करना बस इतना है कि जरूरत के अनुसार बेसन लेकर इसमें गुलाबजल मिलाना है और मुलायम पेस्ट बना लेना है।  इस फेस पैक को कुछ देर चेहरे पर लगाए रखने के बाद चेहरा धोकर साफ करें। त्वचा निखर उठेगी और चिपचिपी भी नहीं दिखेगी। बेसन में त्वचा से डेड स्किन सेल्स हटाने, चेहरा निखारने और टैनिंग कम करने के गुण पाए जाते हैं जो महंगी क्रीम से भी नहीं हो पाता। बस सही तरह से 


बेसन का इस्तेमाल किया जाए। बेसन और मलाई इस फेस पैक को बनाने के लिए आपको बेसन, नींबू और दूध की मलाई की जरूरत होगी। सबसे पहले एक कटोरी में 2 चम्मच भरकर बेसन ले लें। इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की डालें और एक चम्मच भरकर मलाई मिला लें। पेस्ट बहुत गाढ़ा ना हो इसके लिए पानी या दूध डालकर अच्छे से मिलाएं। बस तैयार है आपका फेस पैक,चेहरे पर 15 से 20 मिनट इस फेस पैक को लगाए रखने के बाद चेहरा धोकर साफ कर लें। बेसन और शहद एक्ने और फुंसियों वाली त्वचा के लिए यह फेस पैक भी अच्छा रहेगा। इस फेस पैक से त्वचा को जरूरी नमी भी मिल जाती है। फेस पैक बनाने के लिए 2 चम्मच बेसन में एक चम्मच शहद मिलाएं। पेस्ट ज्यादा गाढ़ा हो तो शहद की मात्रा बढ़ा सकते हैं।
इस तैयार फेस पैक को चेहरे पर 20 मिनट लगाकर रखने के बाद धोकर हटा लें। हफ्ते में एक बार इस फेस पैक को लगाया जा सकता है। बेसन और हल्दी फुंसियों और एक्ने वाली स्किन के लिए बेसन का यह फेस पैक बेहद अच्छा साबित होता है। इस फेस पैक को बनाने के लिए 2 चम्मच बेसन में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और पानी डालकर पेस्ट तैयार करें। इसे 15 मिनट चेहरे पर लगाए रखने के बाद धो लें। चेहरे पर सुनहरा निखार तो आएगा ही, साथ ही स्किन पर ब्रेकआउट्स नहीं होंगे और दाने नजर नहीं आएंगे।  

एक दाग ने धकेल मंदाकिनी को शोहरत की बुलंदियों से गुमनामी के अंधेरे में....

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब बॉलीवुड के शोमैन डायरेक्टर और एक्टर राज कपूर ने पहली बार मंदाकिनी को देखा था तो वह महज 22 साल की थीं। राज कपूर ने जैसे ही मंदाकिनी को देखा उन्होंने मन बना लिया था कि वह उन्हें अपनी फिल्म की हीरोइन बनाएंगे। इसके बाद राज कपूर ने मंदाकिनी को अपनी फिल्म राम तेरी गंगा मैली की हीरोइन बनाया। राज कपूर ने ही एक्ट्रेस का नाम यास्मीन से बदलकर मंदाकिनी रखा था। 1985 में रिलीज हुई राज कपूर की ब्लॉकबस्टर फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी ने गंगा का किरदार निभाया था। एक्ट्रेसेज कम उम्र में ही नाम और शोहरत कमाने में सफल रहीं। 1985 में अपनी एक ही फिल्म से धमाल मचा दिया और 
रातों-रात सुपरस्टार बन गई लेकिन उस एक्ट्रेस पर एक दाग लगा और इस वजह से उसका करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया। मंदाकिनी ने अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी से सभी को हैरान कर दिया था। फिल्म में झरने का सीन उस वक्त काफी कंट्रोवर्सी में  रहा। फिल्म ने कई अवॉर्ड भी जीते। इस फिल्म से मंदाकिनी रातों-रात स्टार बन गईं और उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। मंदाकिनी का करियर बहुत अच्छा चल रहा था,लेकिन उनका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ जुड़ने के बाद ट्रैक से उतरता गया।
हालांकि मंदाकिनी ने इस दावे का जोरदार खंडन किया। यही एक दाग जो मंदाकिनी के करियर के चरम पर की थी जो नासूर बना और इससे उनका पूरा करियर बर्बाद हो गया। बॉलीवुड छोड़ने के बाद मंदाकिनी ने पूर्व बौद्ध भिक्षु डॉ.काग्यूर टी.रिनपोचे ठाकुर से शादी कर ली और बौद्ध धर्म अपना लिया। इनका एक बेटा रब्बिल और एक बेटी रब्ज इनाया है।

Tuesday, October 24, 2023

मणिपुर में हिंसा किसने कराई संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कही बात....

 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ चीफ मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित विजयदशमी उत्सव पर लोगों से देश की एकता, अखंडता, पहचान और विकास को ध्यान में रखते हुए मतदान करने का आह्वान किया। उन्होंने इस दौरान जी-20 सम्मेलन का भी जिक्र किया। मोहन भागवत ने कहा कि भारत में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों ने हमारे देश की विविधता में एकता का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि समस्याओं को सुलझाने के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा पर पूछा कि क्या हिंसा में सीमा पार के उग्रवादी शामिल थे। नागपुर में आरएसएस की दशहरा रैली को 
संबोधित करते हुए भागवत ने कहा,मेइती और कुकी समुदाय के लोग कई वर्षों से साथ रहते आ रहे हैं। अचानक उनके बीच हिंसा कैसे भड़क गई? संघर्ष से बाहरी ताकतों को फायदा होता है। क्या बाहरी कारक शामिल हैं? उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन तक मणिपुर में थे। वास्तव में संघर्ष को किसने बढ़ावा दिया? यह हिंसा हो नहीं रही है, इसे कराया जा रहा है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि उन्हें संघ के उन कार्यकर्ताओं पर गर्व है, जिन्होंने मणिपुर में शांति बहाल करने की दिशा में काम किया।
भागवत ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व खुद को सांस्कृतिक मार्क्सवादी या जाग्रत कहते हैं,लेकिन वे मार्क्स को भूल गए हैं। उन्होंने लोगों को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भावनाएं भड़काकर वोट हासिल करने की कोशिशों के प्रति आगाह किया।

इंदिरा गांधी ने क्यू कहा मेरा तीसरा बेटा है कमलनाथ....?

मध्य प्रदेश की राजनीति में आज एक बड़ा चेहरा बन चुके कमलनाथ का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई दून स्कूल से हुई जहां इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी भी पढ़ते थे।स्कूल में ही कमलनाथ और संजय गांधी अच्छे दोस्त बने। स्कूल के बाद कमलनाथ कोलकाता चले गए जहां सेंट जेवियर कॉलेज से उन्होंने बी.कॉम किया। 27 जनवरी 1973 को अलका नाथ से उनकी शादी हुई और आज कमलनाथ के दो बेटे हैं जिसमें से बड़ा बेटा नकुलनाथ उनके साथ राजनीति में सक्रिय है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9 बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन चुके हैं। 1980 में उन्होंने पहली बार यहां जीत दर्ज की थी। तब उनकी उम्र सिर्फ 34 साल थी। 1997 के उपचुनाव को अगर छोड़ दें तो छिंदवाड़ा जीत का दूसरा नाम कमलनाथ हैं। 1984, 1989, 
1991 में उन्होंने लगातार तीन बार चुनाव जीता। 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी यहां कमलनाथ को ही जीत मिली। केंद्र में जब भी कांग्रेस की सरकार रही कमलनाथ को कैबिनेट में जगह मिली। उन्हें पर्यावरण, कपड़ा, वाणिज्य और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारियां मिलीं। अपने शुरुआती दिनों में एक बार जब कमलनाथ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे तब इंदिरा गांधी उनके लिए प्रचार करने क्षेत्र में आई थीं। 
उन्होंने जनता से वोटों की अपील करते हुए कहा कि कमलनाथ उनके तीसरे बेटे जैसे हैं। स्कूल में संजय गांधी से हुई दोस्ती ने कमलनाथ के राजनीतिक करियर की नींव रखी। उन्हें गांधी परिवार के करीबी लोगों में गिना जाता है जो हर संकट की घड़ी में कांग्रेस के साथ खड़े रहे। इमरजेंसी जब खत्म हुई तो कांग्रेस एक बुरे वक्त से गुजर रही थी। प्लेन हादसे में संजय गांधी का निधन हो गया, इंदिरा गांधी पर बढ़ती उम्र का असर दिखने लगा था और एकजुट विपक्ष के सामने कांग्रेस कमजोर पड़ती दिखाई दे रही थी। ऐसे वक्त में गांधी परिवार के करीबी कमलनाथ लगातार मेहनत कर रहे थे और पार्टी के साथ खड़े थे। लिहाजा इनाम में इंदिरा गांधी ने उन्हें छिंदवाड़ा से लोकसभा का टिकट दे दिया और इस तरह कमलनाथ का राजनीतिक सफर शुरू हो गया। साल 2018 में जब कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो वह देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री बन गए। 
दिसंबर 2018 को उन्होंने प्रदेश के 31वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली,लेकिन 15 साल बाद जो सत्ता हाथ लगी थी वह महज 15 महीने ही चल पाई और एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान बने। कमलनाथ और उनके परिवार के नाम पर कुल 23 कंपनियां और ट्रस्ट रजिस्टर्ड हैं. उनके पास छिंदवाड़ा जिले में करीब 63 एकड़ जमीन भी है। इसमें 7.09 करोड़ रुपए की चल और 181 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति शामिल है। 

PM - मोदी को मिले उपहारों की होगी नीलामी...

संस्कृति केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने यहां राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय में पत्रकारों से बातचीत की तथा ई-नीलामी में शामिल वस्तुओं की सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोगों से आगे आकर इस नीलामी में भाग लेने की अपील की। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, भगवान लक्ष्मी नारायण विट्ठल, देवी रूक्मिणी, अरणमूला कन्नडी, भगवान राम, सीता, लक्ष्मी और हनुमान की कांस्य प्रतिमा भी लोकप्रिय सामानों में शामिल हैं। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राम दरबार की प्रतिमा, अमृतसर के स्वर्णमंदिर का मॉडल, कामधेनु 
और यरूशलम की स्मारिका लोकप्रिय वस्तुओं में शामिल हैं, जिनके प्रति निविदाकर्ताओं में आकर्षण है। मोढेरा के सूर्य मंदिर, चितौड़गढ़ के विजय स्तंभ की प्रतिकृतियां, चंबा रूमाल, वाराणसी के घाट को दर्शाने वाली पेंटिंग उन 912 सामानों में शामिल हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री को मिले उपहारों और स्मृतिचिह्नों को ई-नीलामी के नवीनतम दौर में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिये गए उपहारों और स्मृति चिह्नों की नीलामी के नवीनतम दौर में रामदरबार की प्रतिमा, अमृतसर के स्वर्णमंदिर का मॉडल, कामधेनु और यरूशलम की स्मारिका लोकप्रिय वस्तुओं में शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह नीलामी दो अक्टूबर को शुरू हुई थी, जो 31 अक्टूबर को समाप्त होगी।

आज भी राशन व जॉब कार्ड पर रावण और विभीषण ले रहे सरकारी योजनाओ का लाभ....

भारत में ऐसे कई जगह हैं, जहां न केवल रावण की पूजा होती है,बल्कि उसको एक आदर्श किरदार के रूप में आज भी पूजा जाता है। कुछ ऐसे ही कहानी राजस्थान के जनजाति बाहुल्य जिलों की है। आज भी जनजाति बाहुल्य जिले बांसवाड़ा-डूंगरपुर से जयपुर तक कई लोग रावण नाम के साथ जीवन बसर रहे हैं। पिता की ओर से जन्म के बाद से रखा गया यह नाम लोगों की जुबां पर आने के साथ ही सरकारी रिकार्ड में भी दर्ज हो चुका है। ऐसे में इसी नाम से राशन कार्ड भी बने और खाद्य सुरक्षा योजना के लाभांवितों की सूची में भी यही हाल है। इतना ही नहीं रावण नाम के व्यक्ति का मनरेगा में भी बकायदा जॉब कार्ड भी बना हुआ है। यह बात दीगर है कि 
नामकरण के प्रारंभिक दौर में कई तरह की परेशानियां भी आईं,लेकिन वक्त बीतने के साथ अब इसी नाम के साथ वे जीवन बसर करने की आदत हो गई है। इधर, रावण के भाई विभीषण के नाम पर भी बांसवाड़ा के अरथूना ब्लॉक में एक व्यक्ति का नाम है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की सूची के अनुसार अकेले बांसवाड़ा जिले की पंचायत समिति अरथूना में 9, बागीदौरा, बांसवाड़ा, गढ़ी में एक- एक, घाटोल में दो रावण नाम के व्यक्तियों के बकायदा राशन कार्ड बने हुए है। 




बांसवाड़ा शहर की एक कॉलोनी में भी रावण नाम का एक व्यक्ति है.ये बीपीएल, स्टेट बीपीएल, एपीएल की सूची में पंजीकृत होने के साथ ही राशन सामग्री का लाभ भी ले रहे हैं। रावण नाम के लोग प्रदेश के जयपुर के आमेर ब्लॉक से लेकर जनजाति क्षेत्र बांसवाड़ा-डूंगरपुर तक है। डूंगरपुर जिले के आसपुर ब्लॉक में तीनसीमलवाड़ा में दो, सागवाड़ा में 6, झोथरी ब्लॉक में 2, गलियाकोट में 14 सहित अन्य जिलों में भी कई लोग इस नाम के साथ जी रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में गढ़ी उपखण्ड के एक गांव के रावण नाम के व्यक्ति का बकायदा जॉब कार्ड भी बना हुआ है। हालांकि फिलहाल योजना में काम शुरू नहीं किया है,लेकिन रिकार्ड में यह नाम अब भी दर्ज हैं। बांसवाड़ा के घाटोल ब्लॉक के 40 वर्षीय रावण नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि उनका यह नाम उनके पिता ने नाम रखा है। इसीलिए वह नाम के साथ जीवन-यापन कर रहे है। प्रारंभिक दिनों में नाम को लेकर दिक्कत आई थी,लेकिन अब कोई समस्या नहीं हैं। लोगों की पहचान नाम से नहीं उनके काम से बनती है। इस व्यक्ति का एक बेटा है जो कि सरकारी स्कूल में सातवीं का छात्र है। उसने बताया कि उसे कई बार उसके पिता के नाम से स्कूल में उसके साथी चिढ़ाते है।

Monday, October 23, 2023

अंध भक्तों से मत उलझना,सबसे बड़ी देशभक्ति भाजपा को 2024 में हटाना....अरविंद केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर इंडिया एलाइंस टिक गया तो 2024 में बीजेपी की सरकार नहीं बनेगी। अभी तक लोग कहते थे कि कोई विकल्प नहीं है, लेकिन अब इंडिया एलाइंस को लोग विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। जब से इंडिया एलाइंस बना है, तब से मेरे पास बहुत से लोगों के संदेश आए कि अगर इंडिया एलाइंस टिक गया तो 2024 में उनकी सरकार दोबारा नहीं बनने वाली। केजरीवाल ने कहा कि आज सबसे बड़ी देशभक्ति का काम अगर कोई है तो वो ये कि भाजपा को 2024 में हटाओ। अरविंद 
केजरीवाल ने अपनी विधानसभा नई दिल्ली के वॉलिंटियर्स को संबोधित करते हुए ये बात कही। मुझे लगता है कि 2024 में इनको हटाना सबसे बड़ी देशभक्ति का काम है, देश तभी तरक्की करेगा। 2014 और 2019 में देश के लोगों ने इन्हें बहुत भारी बहुमत देकर जिताया था, ऐतिहासिक बहुमत था।  इनके पास मौका था अगर चाहते तो देश को जबरदस्त तरक्की के रास्ते पर ले जा सकते थे,  लेकिन आज देश में चारों तरफ माहौल इतना खराब हो गया है। खूब लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं, इतनी गुंडागर्दी, इतनी मारपीट, इतनी लूटमार,कहीं शांति नजर नहीं आती और अगर शांति नहीं होगी तो देश तरक्की नहीं कर सकता। केजरीवाल ने कहा कि अंध भक्तों से मत उलझना, देशभक्तों से बात करना,जो देशभक्त है, वह आपकी बात सुनेगा। आपके साथ बात करेगा,जो अंधभक्त हैं, उनका देश से कोई लेना-देना नहीं है। 
उसको बस एक आदमी से प्यार है और अब 2 मिनट में पता चल जाता है कि कौन देशभक्त है कौन अंधभक्त है,जो अंधभक्त हैं वह देशभक्त हो ही नहीं सकता और जो देशभक्त है, वह अंधभक्त हो ही नहीं सकता। दोनों बिल्कुल अलग-अलग जातियां हैंआप लोगों की जिम्मेदारी है एक-एक घर में जाकर लोगों से, अपने रिश्तेदारों से, अपनी कॉलोनी वालों से बात करने की,अगर तरक्की चाहते हो तो इस बार इनको भगाओ। अगर परिवार का भला चाहते हो तो अपने परिवार की सोचो।

भाजपा अन्याई और धोखेबाजी करने वालों का समर्थन कर रही...भाजपा छोड़ तमिल अभिनेत्री गौतमी तडिमल्ला ने खोली पोल

तमिल अभिनेत्री गौतमी तडिमल्‍ला ने कहा कि उन्होंने भारी मन और निराशा के साथ पार्टी से इस्तीफा देने का फैसला किया है। तडिमल्ला ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' अकाउंट पर अपलोड किए गए एक बयान पोस्ट में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा और पार्टी की तमिलनाडु इकाई के प्रमुख के.अन्नामलाई सहित अन्य लोगों को टैग किया है। उन्‍होंने आरोप लगाया,एक विशेष व्यक्ति ने मेरे पैसे, संपत्ति और दस्तावेजों की धोखाधड़ी की। मुझे पार्टी और नेताओं से तो कोई समर्थन नहीं मिला, बल्कि मुझे यह पता चला है कि 
उनमें से कई लोग सक्रिय रूप से उसी व्यक्ति की मदद और समर्थन कर रहे हैं, जिसने मेरे विश्वास को धोखा दिया और मेरे जीवन की कमाई की धोखाधड़ी की। तडिमल्‍ला ने एक बार फिर बताया कि उन्होंने इस धोखाधड़ी के बारे में पुलिस में शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन और न्यायिक प्रणाली से उम्मीद है। गौतमी तडिमल्ला ने कहा कि उन्हें 2021 के चुनावों के दौरान राजपलायम निर्वाचन क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वह आश्वस्त थीं कि उन्हें वहां से चुनाव मैदान में उतारा जाएगा, जिसके बाद उन्होंने खुद को जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए समर्पित कर दिया। 
उन्होंने खेद व्यक्त किया कि संगठन में 25 साल की सेवा के बाद भी कोई समर्थन नहीं मिला। तडिमल्ला के अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्य उस व्यक्ति को सक्षम बना रहे थे, जिसने उन्हें धोखा देकर न्याय को चकमा दिया और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी पिछले 40 दिनों से फरार हैउन्होंने कहा कि वह बड़ी पीड़ा और दुख में लेकिन बहुत दृढ़ संकल्प के साथ इस्तीफा पत्र लिख रही हैं।

घर बैठे आसानी से इस तरह बनाए पासपोर्ट...

पासपोर्ट भारत से विदेश जाने के लिए कई तरह के यात्रा दस्तावेजों की व्यवस्था की जा सकती है। साधारण पासपोर्ट यानि नीले रंग की उपलब्ध बुकलेट आम नागरिकों के लिए होती है। इसके बाद डिप्लोमैटिक पासपोर्ट बनाया जाता है। भारतीय राजनयिक और सरकारी अधिकारी यानी आईएएस रैंक और आईपीएस रैंक के लोग इस पासपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। डिप्लोमैटिक पासपोर्ट का रंग मैरून होता है। इसके बाद आधिकारिक पासपोर्ट आता है जो सफेद रंग का होता है। यदि कोई सरकारी अधिकारी या सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति है और वह किसी आधिकारिक या सरकारी काम के लिए विदेश जाता है, तो वह सफेद पासपोर्ट का उपयोग करता है। इसके अलावा विदेश जाने के लिए सरकार द्वारा आपातकालीन प्रमाणपत्र और पहचान प्रमाणपत्र का भी उपयोग किया जा सकता है। 
यदि आपके पास पासपोर्ट नहीं है और कोई आपात स्थिति है तो इस प्रकार के प्रमाणपत्र का उपयोग किया जा सकता है।# पासपोर्ट फॉर्म ऑनलाइन कैसे भरें?:- चाहे नया पासपोर्ट बनवाना हो या पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण, दोनों ही मामलों में चरण समान हैं। सबसे पहले आपको पासपोर्ट सेवा पोर्टल में अपनी आईडी बनानी होगी। अगर आपकी आईडी पहले से बनी हुई है तो उसी पर लॉग इन करें, लेकिन अगर नहीं है तो आपको नया रजिस्ट्रेशन कराना होगा। आजकल पासपोर्ट फॉर्म ऑनलाइन भरा जा रहा है,इसलिए कई लोग एजेंटों के जरिए भी यह काम करवा रहे हैं। ऐसा न करें और फॉर्म खुद भरें। पासपोर्ट सेवा पोर्टल में पंजीकरण करने के बाद आपको होम पेज दिखाई देगा जिसमें आपको नया पासपोर्ट/पासपोर्ट पुनः जारी करने के लिए आवेदन करें विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद आपके सामने एक ई-फॉर्म आएगा। 
इस ई-फॉर्म में लगभग 5-6 पेज होंगे और हर बार आपको एक विंडो में विवरण भरना होगा और वैलिडेट एंड सेव बटन पर क्लिक करना होगा। ऐसा इसलिए ताकि एक बार फॉर्म भरने के बाद आपकी डिटेल्स सेव रहें। ऐसे में अगर किसी भी चरण पर विंडो बंद हो तो भी उससे पहले की डिटेल्स सेव हो जाएंगी। सारी जानकारी भरने के बाद आखिरी पेज पर आपका आवेदन सबमिट हो जाएगा। आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपके आवेदन में सभी विवरण आपके पहचान पत्र के अनुसार ही होने चाहिए।



# पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए अपॉइंटमेंट लें:- एक बार पासपोर्ट फॉर्म ऑनलाइन भरने के बाद आपको पासपोर्ट सेवा केंद्र जाकर अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना होगा। पासपोर्ट सेवा पोर्टल में ही आपको एक विकल्प दिया गया होगा जिसमें पे एंड शेड्यूल अपॉइंटमेंट लिखा होगा। इस विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद सबसे पहले अपने नजदीकी पासपोर्ट सेवा केंद्र का पता लगाएं। इसके बाद इसे सेलेक्ट करें और आपको कई तारीख के विकल्प दिखाई देंगे। आपको केवल वही तारीखें दिखेंगी जिनमें स्लॉट खाली है। इसके बाद आप अपनी तारीख चुनें और अब बारी आती है पासपोर्ट फीस की। 30 पेज की बुकलेट के लिए 1500 रुपये और 60 पेज की बुकलेट के लिए 2000 रुपये चुकाने होंगे। 

आप फीस का भुगतान ऑनलाइन भुगतान, क्रेडिट या डेबिट कार्ड भुगतान, इंटरनेट बैंकिंग या एसबीआई चालान के माध्यम से कर सकते हैं। एक बार जब आपको अपॉइंटमेंट मिल जाएगा, तो आपको एक एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (एआरएन) मिलेगा। जिस दिन आपकी अपॉइंटमेंट बुक हो, उस दिन अपने सभी पहचान प्रमाणों के साथ जाएं और अपना बायोमेट्रिक सत्यापन करवाएं। एक बार बायोमेट्रिक्स पूरा हो जाने के बाद, यह जांचने के लिए पुलिस सत्यापन होगा कि आपके सभी दस्तावेजों में आपका नाम और पता सही है या नहीं और आप अपने बताए गए पते पर रहते हैं या नहीं। हालांकि अब पुलिस सत्यापन प्रक्रिया को लगभग समाप्त कर दिया गया है। ये सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 दिन के अंदर आपका पासपोर्ट प्रिंट हो जाएगा। पासपोर्ट फॉर्म भरते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपके दस्तावेज में सारी जानकारी एक जैसी होनी चाहिए। अगर यह अलग है तो पासपोर्ट आवेदन खारिज कर दिया जाएगा। पासपोर्ट वेरिफिकेशन में सिर्फ आधार कार्ड ही नहीं, बल्कि तीन पहचान प्रमाण की जरूरत होती है, जिसमें 10वीं की मार्कशीट, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस आदि शामिल हैं।

रेखा की खातिर अमिताभ बच्चन ने की थी व्यक्ति की धुनाई....

अमिताभ बच्चन और रेखा का अफेयर बॉलीवुड में सबसे ज्यादा चर्चित रहा। दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे। एक बार अमिताभ बच्चन ने रेखा के लिए एक शख्स को बुरी तरह पीट दिया था। बात साल 1976 की है,जब फिल्म दो अंजाने की शूटिंग चल रही थी। उस दौरान रेखा और अमिताभ के बीच खूब नज़दीकियां बढ़ गईं थीं। दोनों इस रिश्ते को दुनिया से छिपाकर निभा रहे थे, लेकिन एक फिल्म की शूटिंग के दौरान इस रिश्ते के बारे में सबको पता चल गया। दरअसल अमिताभ ने एक शख्स को रेखा के लिए बुरी तरीके से पीट 
दिया था। अमिताभ और रेखा जयपुर में अपनी फिल्म गंगा की सौगंध की शूटिंग कर रहे थे। इस दौरान दोनों को देखने के लिए काफी भीड़ आई। भीड़ में एक शख्स रेखा को बुरी नजर से देख रहा था। इस दौरान फिल्म के क्रू मेंबर ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वह शख्स नहीं माना,उसके बाद उस शख्स ने रेखा पर फब्तियां कसना शुरू कर दिया। इसके बाद बिग बी को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने उस शख्स को पकड़कर पीटना शुरू कर दिया। 
इस घटना के बाद दोनों के अफेयर की खबरें सबकी जुबां पर आ गई।  अमिताभ बच्चन और एक्ट्रेस रेखा का प्यार एक समय खूब परवान चढ़ा, लेकिन इनका प्यार मुकाम तक न पहुंच सका और दोनों के रास्ते जुदा हो गए।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...