Tuesday, May 21, 2019

एक किलो अब 1000 ग्राम का नहीं रहा,हो गया रिटायर.....


अभी तक किलोग्राम के आधार पर सब्ज़ियां, फल और अनाज खरीदते हैं। उस किलोग्राम को रिटायर कर दिया गया है। फ्रांस में दुनिया के 60 वैज्ञानिकों ने वोटिंग करके किलोग्राम के सबसे बड़े पैमाने या मानक को रिटायर कर दिया है।  यानी एक किलोग्राम का वजन अब बदल गया है। आपको बता दें कि इस बदलाव का आम लोगों पर कोई असर नहीं होगा। इसको इस तरह समझिए कि एक किलो चीनी खरीदते समय आपको चीनी का एक दाना कम मिले या ज्यादा, क्या फर्क पड़ता है,लेकिन विज्ञान के प्रयोगों में इसका काफी असर होगा, क्योंकि वहां सटीक माप की जरूरत होती है। 
फ्रांस में दुनिया के 60 वैज्ञानिकों ने वोटिंग करके किलोग्राम के सबसे बड़े पैमाने या मानक को रिटायर कर दिया है यानी एक किलोग्राम का वजन अब बदल गया है। भारत ने सात आधार इकाइयों में से चार- किलोग्राम, केल्विन, मोल और एम्पीयर को फिर से परिभाषित करने के वैश्विक प्रस्ताव को सोमवार को स्वीकार कर लिया। पेरिस में पिछले साल 16 नबंवर को हुए अंतर्राष्ट्रीय बाट और माप ब्यूरो (BIPM) की जनरल कॉन्फ्रेंस ऑन वेट्स एंड मेजर्स (CGPM) में 60 देशों के प्रतिनिधियों ने सात आधार इकाइयों में से चार को फिर से परिभाषित करने के प्रस्ताव को पारित किया। आपको बता दें कि इस बदलाव का आम लोगों पर कोई असर नहीं होगा। हमारे एक किलो सब्जी खरीदने पर इसका क्या असर होगा-दरअसल, कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। 
सब्जी के ठेले पर सब्जीवाला आपको उसी काले लोहे के बाट से सब्जी तौलकर देगा। यह बस एक तौल को ज्यादा से ज्यादा सटीक बनाने का तरीका है, जिससे किसी भौतिक ईकाई से नापने की बजाए, नाप की ईकाई को प्राकृतिक बना दिया जाए। इसे दुनियाभर में 20 मई से लागू कर दिया गया। 100 से ज्यादा देशों ने माप की मीट्रिक प्रणाली को अपनाया जिसे इंटरनेशनल सिस्टम ऑफ यूनिट्स (SI) के तौर पर भी जाना जाता है जो 1889 से चलन में है। अन्य आधार इकाइयां सेकंड, मीटर और कंडेला हैं। पहले ऐसे पता करते थे एक किलो कितना होगा-एक किग्रा का वजन एक अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल का हिस्सा है। जिस पर सहमति 1889 में बनी थी। इसे इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम कहा जाता है। इस प्रोटोकॉल को 'ल ग्रैंड के' भी कहा जाता है। 
इसी के तहत प्लेटिनम और इरीडियम मिक्स धातु का छोटा सिलिंडर पेरिस की संस्था ब्यूरो इंटरनेशनल दे पॉइड्स एत मीजर्स इन सेवरेस में रखा है। इसी सिलिंडर के वजन को 1 किग्रा माना जाता है। जिसे हर 30-40 साल में जांच के एक बहुत बड़े अभ्यास के लिए बाहर निकाला जाता है और दुनिया भर के बहुत से बांटों और मापों को इससे नापा जाता है। अब इसे ऐसे बदला गया-वैज्ञानिक अब माप के तौर पर प्लांक कॉन्स्टैंट का प्रयोग करेंगे। यह क्वांटम मैकेनिक्स की एक वैल्यू है। यह ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेट्स का भार होता है। इसकी मात्रा 6.626069934*10-34 जूल सेकेण्ड है। जिसमें सिर्फ 0.0000013% की ही गड़बड़ी हो सकती है। इससे एम्पीयर, केल्विन और मोल जैसी ईकाईयों में भी बदलाव आ सकता है।

Sunday, May 19, 2019

शादी को सक्सेसफुल बनाने के लिए कौनसा महिना सबसे अधिक परफेक्ट होता है....?


शुरुआत में रिश्ते में प्यार होना लाजमी हैलेकिन गुजरते वक्त के साथ इत्र की तरह प्यार की खुशबू भी उड़ने लगती हैं और लोग बस सोचते रह जाते हैं कि उनका साथी कितना बदल गया है। जिंदगी भर खुद को ठगा महसूस करने से बेहतर है कि आप शुरुआत में ही कुछ चीजों पर ध्यान दें ताकि आपका रिश्ता बिखराव के कगार पर न पहुंचे और जिंदगी भर आपके रिश्ते में पहले सी प्यार की ताजगी बनी रहे। शादी करना बेहद आसान हो सकता है,लेकिन इस रिश्ते को निभाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी देनी पड़ती है। क्या आप जानते हैं कि आप जिस महीने में शादी कर रहे हैं इससे भी आपके रिश्ते का भविष्य तय होता है। 
आइए जानते हैं किस महीने में शादी करना होता है बेहद शुभ। # जनवरी में शादी करते वालों के रिश्ते टिकाऊ होते हैं उनके रिश्ते में हमेशा गर्माहट का एहसास बना रहता है। इस महीने शादी करने वाले कपल्स मौका-बेमौका अपने साथी को सरप्राइज देकर चौंका देते हैं। इनकी शादी आसानी से टूट नहीं सकती है। इस महीने शादी करने वाले कुम्भ राशि से प्रभावित होते हैं। # फरवरी में शादी करने वाले लोग एक-दूसरे के प्रति काफी प्रतिबद्ध होते हैं। ये अपने पार्टनर को लेकर काफी इमोशनल होते हैं और उनकी जिम्मेदारी बखूबी समझते हैं। इसके साथ ही ये अपने साथी के लिए कुछ भी कर सकते हैं। ये उनकी ख्वाहिश को पूरा करने का भरसक प्रयास करते हैं और अपने साथी को लेकर काफी इमोशनल होते हैं। फरवरी में शादी करने वाले मीन राशि से प्रभावित होते हैं। 
# मार्च माह में शादी करने वालों का रिश्ता खट्टा-मीठा होता है। कपल्स में हमेशा प्यार भरी नोंक-झोंक होती रहती है। इन लोगों के रिश्ते में कई यू-टर्न आते रहते हैं। कई बार ये अपने साथी के साथ एकमत नहीं हो पाते हैं और इसी को लेकर दोनों साथियों के बीच झगड़े होते रहते हैं। इस माह में शादी करने वालों पर मेष राशि का असर होता है। # अप्रैल माह विवाह के बंधन में बंधने के लिए काफी शुभ फलदायक माना जाता है। इस महीने में जो लोग शादी करते हैं जो अपने पार्टनर से बेइंतेहा प्यार करते हैं और उनका साथी भी उनसे प्यार करता है। इनके संबंध में किसी प्रकार की दिक्कत सामने नहीं आती है। इस माह में शादी करने वालों पर वृषभ राशि का असर होता है। # मई माह में शादी करने वालों के रिश्ते में कई बदलाव और उतार-चढ़ाव आते हैं। इनका रिश्ता किसी भी समय बदल सकता है। इस माह में शादी करने वालों में आपसी समझ का अभाव रहता है और ये लोग किसी भी चीज की हद पार कर देते हैं।  इनका रिश्ता अच्छे और खराब के बीच गोते लगाता रहता है। ये कपल्स या तो आखिरी सांस तक साथ रहते हैं या बहुत जल्दी इनका अलगाव हो जाता है। इस माह में शादी करने वालों पर मिथुन राशि का प्रभाव होता है। 
# जून माह में शादी करने वालों का रिश्ता लोगों के लिए एक आदर्श बनता है। इन लोगों में इतना ज्यादा आपसी प्रेम और भावुकता होती है कि कभी कोई तीसरा इनके रिश्ते में दरार नहीं डाल सकता है। ये कपल अपने साथी के परिवार की भी इज्जत करना जानते हैं। इस माह में शादी करने वालों का जीवन कर्क राशि से प्रभावित होता है। # जुलाई माह में शादी करने वाले लोग रिश्तों की अहमियत समझते हैं और उन्हें सहेजना जानते हैं। इस माह में शादी करने वाले रॉयल लाइफ जीते हैं। ये जीवन में हमेशा ऊंचें ख्वाब देखना पसंद करते हैं। इस कपल्स में प्यार की खुशबू हमेशा ताज़ी रहती है और ये हमेशा एक दूसरे से खिंचाव महसूस करते हैं। ये सिंह राशि से प्रभावित होते हैं। # अगस्त माह में शादी करने वाले लोगों की जिंदगी में उहापोह और संघर्ष बने रहते हैं। हालांकि विपरीत परिस्थितियों का सामना करना इन्हें बखूबी आता है। अगर ये लोग अपने साथी के मन की बात भांप पाएं तो इनके बीच एक गहरा रिश्ता पनप सकता है। इस माह में शादी करने वालों पर कन्या राशि का प्रभाव होता है। 
# सितंबर माह में शादी करने वाले संतुलित जीवन बिताते हैं। इन्हें जिंदगी के उतार चढ़ावों को बैलेंस करना आता है। यही वजह है कि मतभेद होने पर भी इनके साथी से इनकी लड़ाई न के बराबर होती है। इस माह में शादी करने वालों पर तुला राशि का प्रभाव होता है। # अक्टूबर माह में शादी करने वाले कपल्स काफी जिंदादिल होते हैं। ये लाइफ के हर मोमेंट को अच्छे से एन्जॉय करते हैं और परेशानियों को भी मुस्कुराकर उड़ा देते हैं। फैमिली प्लानिंग के मामले में ये बिलकुल जल्दी नहीं करते हैं और बेहद धीरज और सोच-समझ से काम करते हैं। इस माह में शादी करने वालों पर वृश्चिक राशि का प्रभाव दिखाई पड़ता है।# नवंबर माह में शादी करने वालों का जीवन काफी बेहतर होता है। ये जानते हैं कि ये अपने साथी के जीवन को किस तरह संवार सकते हैं और इसके लिए साथ मिलकर इस मसले पर काम करते हैं। 
ये जानते हैं कि किस तरह जिंदगी को खुशनुमा बनाया जा सकता है। इनका रिश्ता इतना मजबूत होता है कि दूर रहने के बावजूद भी ये अपने साथी को करीब ही महसूस करते हैं। इन पर धनु राशि का प्रभाव होता है। # दिसंबर माह में शादी करने वाले लोग वर्तमान खुशियों को न एन्जॉय कर आने वाले समय की फ़िक्र में डूबे रहते हैं। किसी भी मसले पर मन मारकर समझौता करना इन्हें बखूबी आता है। अपनी पूरी म्हणत और जिंदगी ये पैसा कमाने में लगाते हैं। साथ ही भविष्य के लिए योजना बनाते हैं। इनका रिश्ता टूटने की संभावना दूसरों की अपेक्षा ज्यादा होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित मुरली शर्मा द्वारा प्राप्त जानकारी [नागपुर महाराष्ट्र]

Saturday, May 18, 2019

चलिए थोड़ी मज़ाक बाजी हो जाए.....


@ पति घबराया हुआ घर आया और पत्नी से बोला:- सुनो, आज मैं आ ही रहा था कि रास्ते में एक कुत्ता...इतने में छोटी बेटी बोल पड़ी:- मम्मी, भैया ने मेरी गुड़िया तोड़ दी….पति ने फिर से बोलना शुरु किया:-हां तो मैं कह रहा था कि रास्ते में एक कुत्ता...अबकी बार बेटा बोल पड़ा:- नहीं मम्मी, पहले छुटकी ने मेरी कार तोड़ी....पत्नी:- भगवान के लिए तुम दोनों चुप रहो...पहले मुझे "कुत्ते" की बात सुन लेने दो.....@ अगर आपकी पत्नी दो सिम कार्ड वाला फोन प्रयोग करती है तो उनका नंबर केवल wife नाम से ही save करें।"Wife-1 और wife-2" के नाम से कभी save ना करें। ये बहुमूल्य सलाह ICU में भर्ती रमेश भाई ने वेंटीलेटर से मुंह हटा कर दिया है... !!@ बीवी से परेशान पति बालकनी से कूदने ही वाला था कि....उसकी बीवी ने अन्दर से आवाज़ दी। मेरी सहेलियाँ आयीं हैं, आओ आप की पहचान करा दूँ पति: हाँ हाँ आया....
@ खूबसूरती की बात ना करो साहब.. मैं अपनी wife पर मरता हूं.. वो अलग बात है, के घुट-घुट के-भारतीय पति.... @ मेरा नेट हिचकोले खा रहा है नेटवर्क प्रॉब्लम है..... या किसी किसी चाहनेवाली की बद्दुआ लग गयी....@पति-पत्नी में किसी बात पर बहस हो रही थी...!तकरीबन घंटे भर की तू-तू मैं-मैं के बाद, पत्नी की एक पंक्ति ने सारा विवाद खत्म कर दिया...!! "तुम जीतना चाहते हो या जीना  चाहते हो...?? @ एक सरकारी कार्यालय के बरामदे में एक तख्ती लगी हुई थी, जिस पर लिखा था -कृपया शोर न मचाएं.... किसी मजाकिये ने इस लाइन के आगे जोड़ दिया इससे हमारी नींद टूट सकती है। 
@ घर में..लेक्चर टाईम..बाप:- पिता कौन होता हैं पता हैं ? बेटा:- हा..जो खुद पीताहो तो चलता हैं लेकिन हमें पीतादेखकर पीटदेता हैं...वही पिता होता हैं!@ एक महिला एक पार्टी में गाना गा रही थी। छगन (मंगलू से): कितना घटिया गा रही है ये महिला। बेकार ही गला फाड़ रही है। कौन है ये पागल? मंगलू: मेरी पत्नी है। छगन: ओह.. नहीं मेरा मतलब था कि ये गाना ही घटिया है। एकदम बेकार। किस बेवकूफ ने लिखा होगा ये गाना? मंगलू: मैंने लिखा है। @ पुरानी फिल्मो में ज़हर बहुत घटिया क्वालिटी का आता था…..एक बोतल पीने के बाद भी हीरोइन पूरे गाने में नांच लेती थी....
@ मोबाईल कंपनी वालो को ऐसा मोबाईल बनाना चाहिये,की तीसरी बार और बताओ बोलते ही कॉल कट हो जाए....@ 10वीं और 12वीं को मिलाकर मेरी भी 99.9% बनी थी..लेंकिन मैंने कभी सोशल मीडिया पर ढ़िंढ़ोरा नहीं पीटा..!!@ कल मार्केट में पुरानी गर्लफ्रैंड मिल गयी बस पूछने लगी कैसे हो ?मैं बोला बस ठीक हू,बच्चों को ट्यूशन से लाता हू,आफिस से आते वक्त सब्जी ले आता हूं,बीवी को शॉपिंग करवा देता हूं,कभी कभी उसकी डांट भी सुन लेता हूं सुनकर वो बोली गलती हो गई रे तेरे को ही हाँ बोलना था। @ Drunk Husband to wife:- तू मोटी, ढोल, बे अक़्ल। Wife:-तू शराबी, बेवड़ा..... Husband laughing:- मेरा क्या है, मैं तो सुबह ठीक हो जाऊंगा......

Friday, May 17, 2019

जल्द ही 24 घंटे+सातों दिन कर सकते है ऑनलाइन फंड ट्रांसफर....


आज पैसा सभी की अहम जरूरतों मे से एक है ना जाने इसकी कब जरूरत पड़ जाए। पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा 24 घंटे और सातों दिन मिल सकती है। रिजर्व बैंक (RBI) ने हफ्ते के सभी सात दिनों और 24 घंटे ऑनलाइन फंड ट्रांसफर का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) के जरिए यह सुविधा मिलेगी। RBI ने यह प्रस्‍ताव पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्‍टम्‍स इन इंडिया Vision 2019-2021 दस्‍तावेज में किया है। यही नहीं, RBI रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RGTS) में ग्राहक लेनदेन के लिए उद्योग की तैयारियों और ग्राहक की मांग के आधार पर विस्तार करने की संभावना की भी जांच करेगा। 
RBI ने कहा है कि NEFT का समय बढ़ाने से पहले इसका परीक्षण करना जरूरी है। अभी NEFT दो घंटे के अंतराल पर बैंकिंग समय के दौरान होता है। फिलहाल, NEFT में रविवार, महीने के दूसरे और चौथे शनिवार और बैंक हॉलिडे पर भी आप ये ट्रांजैक्शन नहीं कर सकते हैं। कामकाजी दिनों में फंड ट्रांसफर के लिए एनईएफटी का इस्तेमाल सुबह 8 बजे से लेकर शाम के 7 बजे तक ही किया जा सकता है। 
इसके अलावा कामकाजी शनिवार को इसका वक्त सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक ही रहता है। ऑनलाइन RGTS ट्रांजैक्शन का वक्त और भी कम है। फिलहाल इसके जरिए शाम 4 बजे तक ही पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं। ट्रांजैक्शन का समय हर बैंक में अलग-अलग हो सकता है। कस्टमर फिलहाल NEFT के जरिए कहीं भी 1 लाख से 25 लाख रुपए तक नेट बैंकिंग के जरिए एक दिन में भेज सकते हैं। जबकि RGTS के जरिए एक दिन में 2 लाख से 25 लाख रुपए तक नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करके भेजे जा सकते हैं। 
ट्रांजैक्शन लिमिट हर बैंक का अलग-अलग हो सकता है। कस्टमर ऑनलाइन IMPS सेवा के जरिए हफ्ते के सातों दिन, 24 घंटे कहीं भी फौरन पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, लेकिन इसके जरिए अधिकतम 2 लाख रुपये की रकम ही ट्रांसफर की जा सकती है।

मी टू' किसी को हमेशा के लिए कलंकित करने का अभियान नहीं बन सकता...दिल्ली हाई कोर्ट


दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकायतों जिनमें शिकायतकर्ताओं के नाम गुमनाम रहे, पर आधारित लेखों को लगातार दोबारा पब्लिश कर 'मी टू' के कैम्पेन को भड़काना, एक पुरुष की निजता का हनन है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने एक मीडिया हाउस के मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ दोबारा आर्टिकल पब्लिश करने पर रोक लगाते हुए कहा, 'मी टू' कैम्पेन किसी को हमेशा कलंकित करने वाला कैम्पेन नहीं बन सकता। अगर एक ही आर्टिकल को बार-बार प्रकाशित करने की इजाजत दी जाती है, तो याचिकाकर्ता का अधिकार गंभीर रूप से खतरे में पड़ जाएगा। 
दरअसल, 'मी टू' कैम्पेन के तहत यौन उत्पीड़न को लेकर मिली शिकायत के आधार पर पिछले अक्टूबर में एक प्रतिष्ठित डिजिटल प्लैटफॉर्म ने दो स्टोरी पब्लिश की थी। जिन तीन महिलाओं ने इस व्यक्ति पर आरोप लगाए थे उनके नाम गुमनाम रहे। आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि उसके खिलाफ एक आर्टिकल बार-बार छापे गए और वह मीडिया का जाना-माना चेहरा हैं और आधारहीन आरापों के कारण उन्हें काफी टॉर्चर और दुख झेलना पड़ा। पिछले साल 14 दिसंबर को हाई कोर्ट ने लेखों पर रोक लगा दिया था और पांच दिन के बाद वेब पोर्टल और लेखक ने दो लेख हटा लिए थे। 
9 मई को एमडी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वेब पोर्टल पर छपे लेख को दूसरे डिजिटल प्लैटफॉर्म ने इस्तेमाल किया है। इसपर जस्टिस प्रतिभा ने कहा, आरोप 'मी टू' कैम्पेन के तहत लगाए गए थे और तीनों आरोपी गुमनाम रहे। प्रकाशक ने लेखों को हटाने का फैसला किया। उसी लेख को दोबारा पब्लिश करने पर रोक लगनी चाहिए। अगर दोबारा पब्लिश करने की इजाजत दी जाती है तो यह वादी के अधिकार का हनन है।

Thursday, May 16, 2019

वर्ल्ड वाइड बेव (www) का जन्म कब और किसने किया.....?


मानव इतिहास के बड़े आविष्कारों में से एक इंटरनेट या वर्ल्ड वाइड बेव (www) का आविष्कार 12 मार्च, 1989 को जब हुआ तो शायद ही किसी को अंदाजा था कि यह इतनी तेजी से बढ़ेगा। आज करीब 30 साल का हो चुका इंटरनेट दुनिया भर में फैला है और लोगों की जिंदगी से जुड़ चुका है। मार्च, 1989 में सबसे पहले ब्रिटिश इंजिनियर और साइंटिस्ट टिम बर्नर्स ली वर्ल्ड वाइड वेब का प्रस्ताव लेकर आए थे। टिम बर्नर्स के साथ बेल्जियम के इंफॉर्मेटिक्स इंजिनियर और कम्प्यूटर साइंटिस्ट रॉबर्ट कैलिउ ने मिलकर वर्ल्ड वाइड वेब को डिवेलप किया। आपको बता दें, वैसे तो इंटरनेट के आविष्कार का श्रेय बर्नर्स ली को दिया जाता है, लेकिन सबसे पहला ऑफिशल सर्वर टिम बर्नर्स नहीं बल्कि कैलिउ बने थे। जिस सिस्टम पर प्रोग्राम कोड लिखा गया था, उस NeXt को स्टीव जॉब्स ने डिवेलप किया था। 12 मार्च 1989 को ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी टिम बर्नर्स ली (Tim Berners-Lee) यूरोप के रिसर्च सेंटर CERN में काम करते थे। वहां उन्होंने वर्ल्ड वाइड वेब का आविष्कार किया। उनकी वजह से आज करोड़ों लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। WWW के उत्पत्ति के लक्षण 1980 में ही दिखने लगे थे। 1989-90 में पहली बार कंप्‍यूटर वैज्ञानिक टिम बर्नर्स ली (Tim Berners-Lee) ने वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) का आइडिया दिया था। उस समय टिम (Tim Berners-Lee) को अंदाजा भी नहीं था कि वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) इतना बड़ा आकार ले लेगा। 
हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैस आया वर्ल्ड वाइड वेब:- 1. टिम बर्नर्स ली (Tim Berners-Lee) ने स्विटजरलैंड में यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन (CERN)में नौकरी करने के दौरान ब्राउजर कंप्यूटर प्रोग्राम लिखा था। उन्‍होंने तीन टेक्‍नोलॉजी के फंडामेंटल लिखे जिनमें, HTML, URL और HTTP शामिल है। 6 अगस्त 1991 को टिम (Tim Berners-Lee) ने वर्ल्ड वाइड वेब प्रोजेक्ट का रिसर्च पेपर पब्लिश किया। 2. इस रिसर्च पेपर में टिम (Tim Berners-Lee) ने CERN के अपने मैनेजर से एक ऐसे इंफॉर्मेशन सिस्टम की मांग की थी जो उनकी लैब में एक कम्प्यूटर से दूसरे को कनेक्ट  कर सके। टिम (Tim Berners-Lee) का यह प्रपोजल स्वीकार कर लिया गया और इसके बाद यूनिवर्सिटी और रिसर्चर्स एक कनेक्शन नेटवर्क से जुड़े। 
3. यह था इंटरनेट पर पहला कम्युनिकेशन। 1991 में वेब ब्राउजर को CERN के बाहर रिलीज किया गया। अन्य रिसर्च संगठनों ने भी इस पर काम किया। इस तरह से 6 अगस्त को इंटरनेट का जन्म हुआ। पहली वेबसाइट http://info.cern.ch थी। 4. इसके बाद शुरू हुआ वो दौर जिसने आज के जमाने के इंटरनेट की नींव रखी। इस दौर में कई वेब कंपनियों ने जन्म लिया। जिसमें गूगल, अमेजन जैसी कंपनियां शामिल हैं। 5. भारत में जन सामान्य के लिए इंटरनेट सेवा का आरम्भ 15 अगस्त 1995 को किया गया जिसे विदेश संचार लिमिटेड द्वारा प्रारम्भ किया गया। सिस्को की विजुअल नेटवर्किंग इंडेक्स (VNI) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 तक इंटरनेट यूजर्स की संख्या बढ़कर 82.9 करोड़ हो जाएगी। मित्र तरुनेश्वर द्वारा [बैंगलोर]

खोए हुए आधार कार्ड को फिर से पा सकते हैं...ऐसे....?


आज हर जगह आधार कार्ड या फिर यूनिक आइडेंटिटी नंबर के बिना कोई सरकारी काम मुमकिन नहीं है। इनकम टैक्स भरना हो या फिर पैन कार्ड के लिए अप्लाई करना हो। हर एक चीज़ के लिए आधार नंबर की जरुरत होती है।  ऐसे में आपका आधार कार्ड खो जाए और उसमें रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भी ना हो, तो दिक्कत और भी बढ़ जाती है,लेकिन आप अपने आधार कार्ड को एक बार फिर से पा सकते हैं। इसके लिए आपको घंटों लाइनों में खड़े होने की ज़रुरत नहीं बल्कि ऑनलाइन आप इसे आसानी से हासिल कर सकते हैं। UIDAI के रूल्स के मुताबिक, आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर/ईमेल जो आपने नामांकन के समय प्रदान किया था। 
आधार कार्ड को फिर से पाने के लिए इसकी जरुरत पड़ती है। अगर आपके पास रजिस्टर मोबाइल नंबर नहीं है तो चिंता मत कीजिए UIDAI पंजीकृत मोबाइल नंबर न होने पर भी ग्राहक ऑनलाइन सेवा के माध्यम से आधार कार्ड को रि-प्रिंट करा सकते हैं। Aadhaar के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो ट्वीट किया गया, जिसके मुताबिक- यदि आपने अपना आधार खो दिया है और आपके पास पंजीकृत मोबाइल नंबर नहीं है, तो आप इस सेवा से अपने आधार को फिर से पा सकते हैं। 
उसके लिए आपको फिलहाल यूज़ कर रहे मोबाइल नंबर को डालना होगा। जिस पर OTP आएगा।   आप ऑनलाइन resident.uidai.gov.in/aadhaar-reprint के जरिए अपने आधार कार्ड को रि-प्रिंट करा सकते हैं। नए मोबाइल नंबर से इन 6 स्टेप्स से पा सकते हैं नया आधार कार्ड:- स्टेप 1- uidai.gov.in पर जाएं। स्टेप 2- Order Aadhaar Reprint पर क्लिक करें। स्टेप 3- आधार नंबर डालें और बाकी डीटेल्स फिल करें। 
स्टेप 4- वेरिफिकेशन के लिए नया मोबाइल नंबर एंटर करें। स्टेप 5- रि-प्रिंट के लिए 50 रुपये देनें होंगे। ऑनलाइन पेमेंट करने के बाद आपको सर्विस रिक्वेस्ट नंबर (SRN) मिल जाएगा। स्टेप 6- आधार लेटर आपके दिए गए पते पर पहुंच जाएगा।

क्या आप भी अपने बच्चे को बीजी रखने के लिए स्मार्टफोन या टेबलेट थमा देते हैं...तो हो जाए सावधान....


अमेरिकन अकेडमी ऑफ पीडियेट्रिक्स (आप) के अनुसार, 18 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए केवल 15-20 मिनट ही स्क्रीन पर बिताना स्वास्थ्य के लिहाज से सही है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यस्त शेड्यूल और छोटे बच्चों की सुरक्षा के प्रति जरूरत से अधिक सुरक्षात्मक रुख रखने वाले माता-पिता अपने छोटे बच्चों को स्मार्ट स्क्रीन में संलग्न कर रहे हैं। खिलौनों के साथ खेलने या बाहर खेलने की जगह, इतनी छोटी उम्र में उन्हें डिजिटल स्क्रीन की लत लगा देना उनके सर्वागीण विकास में बाधा डाल सकता है, उनकी आंखों की रोशनी को खराब कर सकता है और बचपन में ही उन्हें मोटापे का शिकार बना सकता है, जो फलस्वरूप आगे चलकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कॉलेस्ट्रॉल का कारण बन सकता है। 
आप भी उन माता-पिता में से हैं, जो अपने छोटे बच्चों को खाना खिलाते समय या उन्हें व्यस्त रखने के लिए उनके हाथ में स्मार्टफोन या टेबलेट थमा देते हैं, तो समय रहते सावधान हो जाइए, क्योंकि यह आदत उन्हें न केवल आलसी बना सकती है, बल्कि उनकी उम्र के शुरुआती दौर में ही उन्हें डिजिटल एडिक्शन की ओर धकेल सकती है। मैक्स हेल्थकेयर, गुरुग्राम की मनोविशेषज्ञ के अनुसार  खिलौने छोटे बच्चों के दिमाग में विजुअल ज्ञान और स्पर्श का ज्ञान बढ़ाते हैं। ज्यादा स्क्रीन टाइम छोटे बच्चों को आलस्य और समस्या सुलझाने, अन्य लोगों पर ध्यान देने और समय पर सोने जैसी उनकी ज्ञानात्मक क्षमताओं को स्थायी रूप से नष्ट कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों के लिए स्क्रीन पर सामान्य समय बिताने की सही उम्र 11 साल है,लेकिन ब्रिटेन की ऑनलाइन ट्रेड-इन आउटलेट म्यूजिक मैगपाई ने पाया कि छह साल या उससे छोटी उम्र के 25 प्रतिशत बच्चों के पास अपना खुद का मोबाइल फोन है और उनमें से करीब आधे अपने फोन पर हर सप्ताह 21 घंटे तक का समय बिताते हैं।
इस दौरान वे स्क्रीन पर गेम्स खेलते हैं और वीडियोज देखते हैं। विशेषज्ञ माता-पिता को अपने बच्चों को स्क्रीन पर ओपन-एंडिड कंटेंट में संलग्न करने की सलाह देते हैं, ताकि यह एप पर समय बिताने के दौरान उनकी रचनात्मकता को बढ़ाने में मदद करे और यह उनके लिए केवल इनाम या उनका ध्यान बंटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने के स्थान पर उनके ज्ञानात्मक विकास में योगदान दे। हालांकि, थोड़ी देर और किसी की निगरानी में स्क्रीन पर समय बिताना नुकसानदायक नहीं है। प्रौद्योगिकी बच्चे के सामान्य सामाजिक परस्पर क्रिया और आसपास के परिवेश से सीखने में बाधा नहीं बननी चाहिए।  एक बार स्मार्ट फोन या टेबलेट की लत लगने पर बाद में उन्हें स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से रोकने पर बच्चों में चिड़चिड़ा व्यवहार, जिद करना, बार-बार मांगना और सोने, खाने या फिर जागने में नखरे करने जैसे विदड्रॉल सिम्पटम की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को डिजिटल लत से दूर रखने के लिए माता-पिता को न केवल बच्चों के लिए, बल्कि खुद के लिए भी घर में डिजिटल उपकरणों से मुक्त जोन बनाने चाहिए, खासतौर पर खाने की मेज पर और बेडरूम में। बच्चे वही सीखते हैं, जो वे देखते हैं। बच्चों को इस लत से दूर रखने के लिए माता-पिता को उनके सामने खुद भी सही उदाहरण रखना चाहिए। मित्र रमेश मूलचंदनी [मध्य प्रदेश-जिल्हा मंडला-अमरपुर]

क्या हम वो आखरी पीढ़ी कहलाएंगे.....


जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है। जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे जैसे खेल खेले हैं। जिन्होंने कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और नावेल पढ़े हैं। जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये है। जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे। जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपीकिताबें, कपड़े और हाथ काले, नीले किये है। जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है। 
जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे। जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं। जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है। जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है। जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो और बिनाका जैसे प्रोग्राम सुने हैं। जब हम सब शाम होते ही छत पर पानी का छिड़काव किया करते थे। उसके बाद सफ़ेद चादरें बिछा कर सोते थे। एक स्टैंड वाला पंखा सब को हवा के लिए हुआ करता था। सुबह सूरज निकलने के बाद भी ढीठ बने सोते रहते थे। वो सब दौर बीत गया। 
चादरें अब नहीं बिछा करतीं। डब्बों जैसे कमरों में कूलर, एसी के सामने रात होती है, दिन गुज़रते हैं। जिन्होने वो खूबसूरत रिश्ते और उनकी मिठास बांटने वाले लोग देखे हैं, जो लगातार कम होते चले गए। अब तो लोग जितना पढ़ लिख रहे हैं, उतना ही खुदगर्ज़ी, बेमुरव्वती, अनिश्चितता, अकेलेपन, व निराशा में खोते जा रहे हैं। हम ही वो खुशनसीब लोग हैं, जिन्होंने रिश्तों की मिठास महसूस की है..हम एक मात्र वह पीढी है जिसने अपने माँ-बाप की बात भी मानी और बच्चों की भी मान रहे है। मित्र प्रेम ब्रिजवानी द्वारा [रायपुर]

Wednesday, May 15, 2019

रेल यात्रा के दौरान नींद ना खुलने की वजह से स्टेशन पर न उतर पाने की समस्या से मिलेगा छुटकारा रेलवे ने की नई शुरुवात...

ट्रेन में सफर करने वाले अपने यात्रियों की यात्रा आरामदायक बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने कई सर्विसेज शुरू की हैं। इन्ही सर्विसेज में एक है डेस्टिनेशन अलर्ट वेकअप अलार्म सर्विस, इस सर्विस की खासियत है कि रेलवे यात्री को उसके डेस्टिनेशन स्टेशन आने पर फोन करके या एसएमएस अलर्ट भेजकर जगा देता है। जिसकी वजह से अब यात्रा के दौरान नींद ना खुलने की वजह से स्टेशन पर न उतर पाने की समस्या नहीं रहेगी। इसके अनुसार आधे घंटे पहले फोन कर यात्री को स्टेशन के बारे में बताया जाएगा। पूछताछ सेवा पर आईवीआर (IVR) से इस सुविधा को जोड़ते हुए अलार्म सेवा शुरू की गई है।  कस्टमर केयर के प्रतिनिधि से 139 नंबर पर यात्री बात कर अलर्ट की सुविधा भी ले सकते हैं। 
डेस्टिनेशन अलर्ट एक्टिवेट करने के लिए यात्री को अपने मोबाइल से 139 नंबर पर कॉल या एसएमएस करना होगा। कॉल रिसीव होने पर पहले भाषा का चयन करें। उसके बाद डेस्टिनेशन अलर्ट के लिए पहले 7 नंबर और फिर 2 नंबर दबाएं। फिर 10 अंकों का PNR नंबर एंटर करें जिसे डायल करने के बाद कन्फर्म करने के लिए 1 डायल करना होगा। सिस्टम PNR नंबर का सत्यापन कर डेस्टिनेशन स्टेशन के लिए अलर्ट फीड कर देगा। इसके बाद कंफर्मेशन का SMS मिलेगा। डेस्टिनेशन आने से पहले मोबाइल पर कॉल आएगी। प्रति अलर्ट SMS का चार्ज 3 रुपये लगेगा। इसी तरह कॉल के लिए भी शुल्क देना होगा।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...