Friday, July 12, 2019

शिवाजी राव गायकवाड़ उर्फ राजनीकांत संघर्षो से सफलता के शिखर तक....


सुपरस्टार रजनीकांत  12 दिसंबर, 1950 को जन्मे रजनीकांत का पूरा नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है। उनका जन्म साल 1950 में बैंगलोर में हुआ था। फिल्मों में काम करने से पहले वो बस कंडक्टर थे। साल 1973 में उन्होंने मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट से एक्टिंग में डिप्लोमा लेने के बाद साल 1975 में तमिल फिल्म अपूर्व रागंगल से फिल्मी दुनिया में कदम रखा। साल 2007 में आई उनकी फिल्म शिवाजी द बॉस बॉक्स ऑफिस पर इतनी जबरदस्त हिट हुई कि उसके बाद वो एशिया में जैकी चेन के बाद सबसे महंगे अभिनेता बन गए। रजनीकांत ने बॉलीवुड में साल 1983 में फिल्म अंधा कानून से शुरुआत की। 
हाल में उनकी रोबोट 2.0 ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस फिल्म ने बाहुबली का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि यह फिल्म अब तक 520 करोड़ रुपये कमा चुकी है। फिल्मों में दमदार एक्टिंग, एक्शन, डायलॉग डिलीवरी की वजह से रजनीकांत ने लोगों के दिलों में जो जगह बनाई है। उम्र के 68वे साल में भी रजनी पूरी ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं। कहा जाता है कि टॉलीवुड, बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में अपने दमदार अभिनय की छाप छोड़ने वाले थलाइवा का बचपन भी मुश्किल दौर से गुजरा। पहले वो जो मिलता वो खा लेते थे, लेकिन जैसे ही उम्र 40 साल पार हुई वे खाने-पीने में परहेज करने लगे।
चलिए जानते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर भी वो कैसे ऊर्जावान रहते हैं। स्टाइल किंग रजनी स्ट्रिक्ट डाइट और मेडिटेशन में विश्वास रखते हैं। रजनी कई बार अपनी फिटनेस का राज बता चुके हैं। रजनीकांत चीनी, चावल, दूध, दही और घी का सेवन नहीं करते हैं। यही वजह है कि इस उम्र में भी वो हेल्दी और फिट नजर आते हैं। खासकर उन्होंने 40 की उम्र के बाद इन चीजों का सेवन छोड़ दिया। कहा जाता है कि एक जमाने में जूस और दही उनकी पसंदीदा चीजों में से एक थे। इसी वजह से वे अब हेल्दी और एक्टिव हैं, लेकिन मटन और चिकन से बनी चीजें उनकी फेवरेट डिशेस हैं। 
रजनीकांत का वर्कआउट प्लान:- वह सुबह 5 बजे उठ जाते हैं और एक घंटा जोगिंग करते हैं। इतना ही नहीं वो शाम को भी वॉकिंग पर जाते हैं और मेडिटेशन करते हैं। इसके अलावा वो नियमित रूप से योगासन के साथ अन्य एक्सरसाइज भी करते हैं। उनका मानना है कि योग से उन्हें तनावमुक्त रहने और खासकर रात को बेहतर नींद में सहायता मिलती है।


वेतन मामले में महिलाओं को पुरुषों की बराबरी करने में लगेंगे 202 साल....


डब्ल्यूईएफ के मुताबिक, पिछले साल के दौरान वैश्विक तौर पर वेतन में लैगिंक असमानता का अंतर थोड़ा कम हो गया है, लेकिन कार्यस्थलों पर महिलाओं की संख्या में कमी आई है। 2017 में डब्ल्यूईएफ ने अनुमान लगाया था कि वेतन अंतर को खत्म करने में 217 साल लगेंगे। महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन हासिल करने में 202 साल लग सकते हैं,क्योंकि वैश्विक वेतन का अंतर बहुत बड़ा है और परिवर्तन की गति बेहद धीमी है। यह बात विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की रिपोर्ट में कही गई है। डब्ल्यूईएफ की वार्षिक रिपोर्ट में पाया गया है कि महिलाएं पुरुषों की औसत कमाई का 63 प्रतिशत ही कमाती हैं। 
149 में से एक भी देश का आकलन ऐसा नहीं है, जहां महिलाओं ने औसतन पुरुषों के बराबर वेतन हासिल किया हो। डब्ल्यूईएफ में सामाजिक और आर्थिक एजेंडे की प्रमुख सादिया जहीदी ने 'द गार्जियन' को बताया,समग्र तस्वीर यह है कि लैगिंक समानता रुक गई है। हमारे श्रम बाजार का भविष्य उतना समान नहीं हो सकता, जितना हमने एक समय सोचा था। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशिया में लाओस महिलाओं के साथ समान व्यवहार करने के सबसे नजदीक है, जहां महिलाएं पुरुषों के वेतन का 91 प्रतिशत कमाती हैं। 
वहीं, यमन, सीरिया और इराक में महिलाओं व पुरुषों के वेतन में सर्वाधिक अंतर देखा गया, जहां महिलाएं पुरुषों के वेतन का 30 प्रतिशत ही कमाती हैं। डब्ल्यूईएफ की 50 देशों की सूची में ब्रिटेन 149वें स्थान पर है, जहां की महिलाएं पुरुषों के वेतन का 70 प्रतिशत कमाती हैं। आइसलैंड राजनीतिक भूमिकाओं के मामले में सबसे समतावादी देश है, लेकिन अभी भी यहां महिला व पुरुष के वेतन में 33 प्रतिशत अंतर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है।

Wednesday, July 10, 2019

निकाह की शर्तों में ड्राइविंग के अधिकार को शामिल करा रही हैं सऊदी अरब की महिलाएं...


 सऊदी अरब में निकाह की शर्तों का इस्तेमाल महिलाएं और पुरूष दोनों, लेकिन खास तौर से महिलाएं अपने कुछ खास अधिकारों को सुरक्षित कराने के लिए करती हैं। पितृसत्तात्मक सऊदी अरब में महिलाओं को सामान्य तौर पर अपने पुरूष अभिभावक (पति, पिता या अन्य) की सभी बातें मानने के लिए मजबूर होना पड़ता है और वह कानून की शरण में भी नहीं जा सकती हैं,लेकिन पुरूष यदि निकाहनामे में लिखी किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो महिलाएं इस आधार पर उससे तलाक ले सकती हैं। अभी तक महिलाएं निकाहनामे का इस्तेमाल अपने लिए मकान, घरेलू सहायिका रखने, आगे पढ़ाई जारी रखने या शादी के बाद भी नौकरी करते रहने जैसी शर्तें रखने के लिए करती थीं,लेकिन अब ड्राइविंग का अधिकार भी इसमें जुड़ रहा है।
90 के दशक में कई महिलाओं को नियम तोड़कर शहर में गाड़ी चलाने के लिए गिरफ्तार तक किया गया था. कई महिलाएं ब्रिटेन, कनाडा या लेबनान जैसे मुल्कों में जाकर अपने लिए अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया करती थीं। साथ ही आपको यह भी बता दें कि सऊदी अरब में अब भी महिलाओं को वो अधिकार हासिल नहीं है जो दूसरे देशों की महिलाओं के पास हैं। सऊदी अरब में अब भी महिलाएं अकेले प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकतीं और अब भी कई काम महिलाओं के लिए बैन हैं।  
2015 तक सऊदी अरब में महिलाओं को मतदान तक का अधिकार नहीं था। सऊदी अरब ने कानूनी तौर पर भले ही महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति जरूर दे दी है,लेकिन इस अधिकार के उपयोग में कभी कोई रोड़ा ना अटकाए यह सुनिश्चित करने के लिए महिलाएं कार रखने और उसके चलाने के अधिकार को अपने निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं। दम्मम के रहने वाले सेल्समैन माजद ने हाल ही में अपने निकाह की शर्तों के बारे में बातचीत करते हुए बताया कि कैसे उनकी मंगेतर ने शर्त रखी है कि वह कभी उसे गाड़ी चलाने से नहीं रोकेंगे। 
माजद (29) बताते हैं कि अगले महीने उनकी शादी होने वाली है। उनकी 21 वर्षीय मंगेतर ने दो शर्तें रखी हैं। एक वह शादी के बाद भी काम करेंगी और दूसरा कि उन्हें वाहन चलाने का अधिकार होगा। माजद कहते हैं कि वह (मंगेतर) स्वतंत्र रहना चाहती है।  मैंने इस पर कहा, हां, क्यों नहीं। माजद अपना पूरा नाम साझा नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि निकाहनामा और उसकी शर्तें निहायत निजी और पारिवारिक मामला है। रियाद में निकाह पढ़ाने वाले एक मौलवी अब्दुलमोसेन अल-अजेमी का कहना है, निकाह में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए कुछ महिलाएं ड्राइविंग के अधिकार को निकाहमाने में शामिल करा रही हैं। 
अल-अजेमी के पास हाल ही में ऐसा पहला निकाहनामा आया है। उनका कहना है कि निकाहनामा एक तरह से सुनिश्वित करता है कि शौहर अपने वादे को नहीं भूलेगा, क्योंकि यह वादा खिलाफ तलाक का आधार बन सकती है। सऊदी सरकार ने महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार तो दे दिया है, लेकिन घर के पुरूष अभिभावकों द्वारा ड्राइविंग से मना किए जाने या कार रखने की इजाजत नहीं मिलने की सूरत में क्या किया जा सकता है, उस संबंध में कुछ नहीं कहा है।

Tuesday, July 9, 2019

शराब की है लत तो पुरुषों और महिलाओं को एक सप्ताह में कितने पैग पीने चाहिए...


नोएडा के जेपी अस्पताल में वरिष्ठ परामर्श चिकित्सक के अनुसार शराब हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए हानिकारक है और हमारी मनोदशा में उतार-चढ़ाव ला सकती है. शराब हमारे मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को कम करती है। इसके नियमित सेवन से मस्तिष्क का रसायन विज्ञान बदल जाता है जिससे मस्तिष्क स्वास्थ्य में गिरावट आती है। अगर आपको लगता है कि कम मात्रा में शराब पीने से आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा, तो आपको फिर से सोचने की जरूरत है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि शराब छोड़ने से पूरी तरह से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है। खासकर महिलाओं के लिए यह अधिक कारगर है। 
शराब का औसत सेवन पुरुषों के लिए सप्ताह में 14 पैग जबकि महिलाओं के लिए सप्ताह में 7 पैग निर्धारित किया गया है। अध्ययन में पाया गया है कि जिन पुरुष और महिलाओं ने जीवनभर शराब से दूरी बनाए रखी, उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहा। सीएमएजे पत्रिका में प्रकाशित खबर के अनुसार, जो महिलाएं औसत शराब पीती थी या शराब पीना छोड़ देती थी, उनमें मानसिक तौर पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले। फिलहाल यह अध्ययन चीन व अमेरिका के नागरिकों पर हुआ है। 
विशेषज्ञों का कहना है कि यह शोध भारतीय नागरिकों पर भी किया जा सकता है। गुरुग्राम के नारायणा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के परामर्श चिकित्सक गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी के मुताबिक, एक महीने के लिए भी शराब छोड़ना पेट और शरीर की रस प्रक्रिया (मेटाबॉलिक) सिस्टम को दुरुस्त करने में मदद कर सकता है और इसके लक्षणों को खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ को भी बढ़ावा देता है। एक स्वस्थ मस्तिष्क और जिगर के लिए शराब से परहेज अनिवार्य है। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और दिल के लिए भी शराब से दूरी बनानी जरूरी है। खासकर महिलाओं पर शराब का प्रभाव अधिक हानिकारक है।

अपने बच्चे को टॉपर बनाने के लिए घर में आजमाएं ये तरीका....


बामबर्ग विश्वविद्यालय हुए शोध के प्रमुख लेखक सिमोन लेहरल ने कहा,हमारे परिणाम न केवल साक्षरता, बल्कि संख्यात्मकता में भी विकास के लिए बच्चों को पुस्तकों के लिए उजागर करने के महान महत्व को रेखांकित करते हैं। उन्होंने कहा,प्रारंभिक भाषा कौशल न केवल एक बच्चे के पढ़ने में सुधार करते हैं, बल्कि उसकी गणितीय क्षमता को भी बढ़ाते हैं। जीवन के शुरुआती सालों में ही यदि बच्चों को घर में पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल मिल जाए, तो वे होम लर्निग के माध्यम से भविष्य में अच्छी श्रेणी में उत्तीण हो सकते हैं और पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। एक शोध में यह बात सामने आई है।
स्कूल प्रभावशीलता और स्कूल सुधार' में प्रकाशित शोध में यह बात सामने आई है कि जिन बच्चों के माता-पिता ने स्कूल भेजने से पहले ही बच्चों के साथ पढ़ा और किताबों के बारे में बात की, वे सभी 12 साल की उम्र में गणित के विषय में अच्छे अंक लेकर आए। निष्कर्ष के लिए शोधकर्ताओं ने 229 जर्मन बच्चों का तीन साल की उम्र से लेकर माध्यमिक विद्यालय तक अध्ययन किया। 
प्रतिभागियों की साक्षरता और संख्यात्मक कौशल का परीक्षण उनके तीन साल के पूर्वस्कूली (उम्र 3-5) में किया और दूसरी बार फिर जब वे 12 या 13 वर्ष के हुए तब यह परीक्षण किया गया। उन्होंने पाया कि बच्चों ने अपने पूर्वस्कूली वर्षों में साक्षरता, भाषा और अंकगणितीय कौशल घर के प्रोत्साहन से प्राप्त किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने इसके बाद घर में सीखने के माहौल की परवाह किए बिना माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने और गणितीय कौशल में उच्च परिणाम प्राप्त किए।


अपनाएं वॉट्सऐप से ब्रेक लेने का यह तरीका, बिना अकाउंट डिलीट किए ऐसे हो जाएं 'गायब'….?


सबसे पॉप्युलर चैटिंग ऐप्स में से एक वॉट्सऐप में एक बड़ा फीचर नहीं है, यह यूजर्स को ऐप से ब्रेक लेने या गायब होने का विकल्प नहीं देता। ट्विटर, फेसबुक या स्नैपचैट जैसे प्लैटफॉर्म्स से आसानी से 'लॉग आउट' कर वक्त बिताया जा सकता है। वॉट्सऐप आपके स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्शन होने के चलते हमेशा ऐक्टिव रहता है और इसे ऑफ नहीं किया जा सकता। ऐसे में अगर आप बोर हो गए हैं और ऐप से गायब होना चाहते हैं तो अकाउंट डिलीट करना ही  अकेला ऑप्शन बचता है। बार-बार अकाउंट डिलीट करना और वॉट्सऐप फिर से इंस्टॉल करना आसान नहीं है। साथ ही मेसेज भेजने वाले तो भी डबल टिक मिलते ही समझ आ जाता है कि आप वॉट्सऐप चला रहे हैं। वॉट्सऐप पर ऐक्टिव होने पर दूसरे कॉन्टैक्ट को आप ऑनलाइन भी दिख जाएंगे। ऐसे में कोई वन-टैप सॉल्यूशन तो नहीं है, लेकिन बिना डिवाइस को रूट किए इन सेटिंग्स को बदलकर आप वॉट्सऐप से ब्रेक ले सकते हैं
# वॉट्सऐप नोटिफिकेशन टोन करें डिसेबल:- वॉट्सऐप पर नोटिफिकेशन के लिए No Ringtone का कोई ऑप्शन नहीं है। अगर आप वॉट्सऐप मेसेज का नोटिफिकेशन नहीं सुनना चाहते तो फोन साइलेंट करना पड़ता है। मजे की बात यह है कि आप खुद की साइलेंट टोन बना सकते हैं। इसके लिए किसी शांत जगह पर दो सेकेंड के लिए ऑडियो रिकॉर्ड करें और इसे ढंग का फाइल नेम देने के बाद ऐप की सेटिंग्स में जाकर नोटिफिकेशन और कॉल रिंगटोन बना दें। # नए मेसेजेस के लिए नोटिफिकेशन पॉप-अप को करें डिसेबल:- अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर ऐप्स में जाएं और वॉट्सऐप को खोजकर उस पर टैप करें। यहां आपको सभी नोटिफिकेशन डिसेबल करने का ऑप्शन मिलेगा। आपको वाइब्रेशन और पॉप-अप भी डिसेबल कर देना है। इससे कोई नया मेसेज आने पर आपको नोटिफिकेशन नहीं आएगा और बिना ऐप ओपन किए आपको कोई नया मेसेज नहीं दिखेगा। इस तरह वॉट्सऐप आपको परेशान नहीं करेगा।
# नोटिफिकेशन लाइट भी कर दें ऑफ:- अगर आपके स्मार्टफोन में नोटिफिकेशन लाइट दी गई है तो आपके स्मार्टफोन सेटिंग्स में जाना होगा। यहां नोटिफिकेशन सेटिंग्स में जाकर आप नोटिफिकेशन लाइट के लिए none सेलेक्ट कर सकते हैं। इस तरह वॉट्सऐप मेसेज आने पर भी आपको उनका अलर्ट नहीं मिलेगा और आपको बार-बार फोन नहीं देखना पड़ेगा। ऐसे में आप वॉट्सऐप से ब्रेक ले सकते हैं।# वॉट्सऐप के लिए मोबाइल डेटा ऐक्सेस कर दें ऑफ:- अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर आप वॉट्सऐप के लिए मोबाइल डेटा ऐक्सेस भी ऑफ कर सकते हैं। इसके लिए आपको ऐप्स में जाकर वॉट्सऐप सेलेक्ट करना होगा और यहां 'Force Stop' पर टैप करना होगा। कुछ फोन्स में यह ऑप्शन अलग से भी मिल जाता है।

Monday, July 8, 2019

सिम कार्ड निकाल देने या फोन का आइएमईआइ नंबर बदलने पर भी मिलेगा चोरी गया मोबाइल फोन...


केंद्र सरकार एक नई तकनीक की शुरुआत अगले महीने अगस्त से करेगी जिसके द्वारा चोरी हुए फोन आसानी से मिल जाएंगे एक अधिकारी ने बताया कि अगर मोबाइल चोरी होते ही फोन से सिम कार्ड निकाल दिया जाता है या उसका आइएमईआइ नंबर बदल दिया जाता है, तब भी नई टेक्नोलॉजी से मोबाइल को ट्रेस किया जा सकेगा। इसके लिए दूरसंचार विभाग ने देश के सभी मोबाइल फोन्स का डेटाबेस तैयार किया है जिसे सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर का नाम दिया गया है। इसमें देश के सभी मोबाइल फोन्स का IMEI नंबर रेजिस्टर किया गया है। 
अगर आपका फोन चोरी हो जाता है तो पुलिस में शिकायत करने के बाद यहां से आपका फोन ब्लॉक कर दिया जाएगा, फिर वह किसी भी ऑपरेटर के नेटवर्क पर काम नहीं करेगा। इस डेटाबेस की वजह से पुलिस को भी यह फोन ढंढ़ने में आसानी हो जाएगी। देश में कहीं भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा हो पुलिस आसानी से इसे खोज निकालेगी। गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन से सिम कार्ड निकाले जाने या उसका आइएमईआइ नंबर बदल दिए जाने के बावजूद सीईआइआर(CEIR) मोबाइल फोन की सारी सुविधा ब्लॉक कर देगा, चाहे भले ही वह डिवाइस किसी भी नेटवर्क पर चलाया जा रहा हो। 
सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DoT) ने टेक्नोलॉजी तैयार कर ली है। दूरसंचार विभाग (डीओटी) के अधिकारी ने कहा कि संसद का सत्र खत्म होने के बाद दूरसंचार विभाग इस टेक्नोलॉजी को लॉन्च करने के लिए मंत्री से संपर्क करेगा। संसद का चालू सत्र 26 जुलाई को समाप्त होगा, इसलिए उम्मीद है कि देशभर में इसे अगस्त में लॉन्च कर दिया जाएगा। सबसे पहले इसका ट्रायल महाराष्ट्र सर्किल में किया गया, जहां यह काफी सफल रहा। इसे देखते हुए दूरसंचार अब इसे पूरे देश में लागू करने पर विचार किया गया है। इसके अलावा सरकार ने फोन का IMEI बदलने पर तीन साल की सज़ा का प्रावधान भी कर रखा है। 
इसके बावजूद अगर कोई फोन का IMEI बदलता है तो उसे भी ब्लॉक कर दिया जाएगा। कुल मिलाकर किसी भी हालत में चोरी किए हुए फोन को शिकायत दर्ज करने के बाद यूज़ नहीं किया जा सकेगा।  

Friday, July 5, 2019

कब पेश हुआ था देश का पहला आम बजट,कैसे तैयार होता है,क्यू होती है बजट की छपाई से पहले हलवे की रस्‍म.....?


देश का पहला आम बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने बजट पेश किया था। वहीं आजादी के बाद देश के पहले वित्‍त मंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को बजट पेश किया था। संविधान गठन के बाद पहला बजट 28 फरवरी 1950 को पेश हुआ था। देश की पहली महिला वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण आज देश का आम बजट संसद में पेश किया। संसद में वित्‍तीय वर्ष 2019-20 के लिए आम बजट पेश करने से पहले कैसे तैयार होता है बजट और उससे जुड़ी कुछ खास बातें। वार्षिक वित्त रिपोर्ट को सामान्‍य बोलचाल की भाषा में आम बजट कहा जाता है। आम बजट संविधान के अनुच्छेद 112 में आय-व्यय का लेखा-जोखा है। आम बजट तैयार करने में वित्‍त मंत्रालय के साथ-साथ योजना आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और प्रशासनिक मंत्रालय भी अहम भूमिका अदा करते हैं। बजट बनाने की प्रक्रिया सामान्‍य रूप से सितंबर में शुरू हो जाती है। 
प्रक्रिया के पहले चरण में सभी मंत्रालयों और विभागों से उनके खर्चों का लेखा-जोखा मांगा जाता है।  जिसके बाद सभी मंत्रालयों और विभागों से उनके फंड को लेकर चर्चा की जाती है। चर्चा के बाद वित्‍त मंत्रालय, नीति आयोग के साथ मिलकर विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों के फंड का ब्‍लू प्रिंट तैयार करते हैं। इसी ब्‍लू प्रिंट के आधार पर अक्‍टूबर से नबंवर के बीच अन्‍य मंत्रालयों के साथ बैठक कर चर्चा की जाती है।  वित्‍त मंत्रालय बजट को अंतिम रूप देने से पहले देश के विभिन्‍न कॉपरेट हाउस और बैंकिंग सेक्‍टर के प्रतिनिधियों से भी बातचीत करता है। विभिन्‍न मंत्रालयों, राज्‍य सरकारों, कॉपरेट हाउस और बैंकिंग सेक्‍टर से विचार विमर्श के बाद बजट की ड्राफ्ट कॉपी तैयार की जाती है। बजट का यह ड्राफ्ट नीले रंग का होता है।
सबसे पहले बजट की ड्राफ्ट कॉपी वित्‍त मंत्री को सौंपी जाती है। ड्राफ्ट कॉपी के निरीक्षण के बाद वित्‍त मंत्री बजट की छपाई का निर्देश जारी करती हैं। वहीं, बजट को पेश करने से पहले राष्‍ट्रपति से अनुमति ली जाती है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बजट को केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी के बाद बजट को संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। यह बजट सामान्‍यत: दो हिस्‍सों में बंटा होता है। पहले हिस्से में आर्थिक सर्वे और नीतियों का ब्यौरा होता है और दूसरे हिस्से में प्रत्यक्ष और परोक्ष कर के प्रस्ताव रखे जाते हैं। बजट की छपाई से पहले वित्‍त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्‍म निभाई जाती है। वित्‍त मंत्रालय की परंपरा है कि हलवा के कड़ाहे पर अंतिम कलछी चलाने के बाद वित्‍त मंत्री बजट तैयारी से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हलवा बांटते हैं।
हलवा की रस्‍म पूरी होने के बाद बजट से जुड़े दस्‍तावजों की छपाई की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। उल्‍लेखनीय है कि हलवे की रस्‍म शुरू होने से पहले बजट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को नार्थ ब्‍लॉक में एकत्रित किया जाता है। इसके बाद, ये अधिकारी और कर्मचारी संसद में बजट पेश होने के बाद ही नार्थ ब्‍लॉक से बाहर आते हैं। इस बीच इन अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने परिवार से भी संपर्क करने की इजाजत नहीं होती है।

स्‍वामी विवेकानंद जी के प्रेरणा दायक विचार जो बदले आपका जीवन....


स्‍वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। स्‍वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। स्‍वामी विवेकानंद ने न सिर्फ भारत के उत्‍थान के लिए काम किया बल्‍कि लोगों को जीवन जीने की कला भी सिखाई। स्‍वामी विवेकानंद का जीवन बड़ा ही संघर्षमयी था। मात्र 25 साल की उम्र में अपने गुरु से प्रेरित होकर उन्‍होंने सांसारिक मोह-माया त्‍याग दी और संन्‍यासी बन गए। स्‍वामी विवेकानंद जीवन भर संन्‍यासी रहे और अपनी आख‍री सांस तक वह समाज की भलाई के लिए काम करते रहे। स्‍वामी विवेकानंद की कही बातें दुनिया भर के लोगों को प्रेरणा देती हैं। 
आज स्‍वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको उनकी कही 10 ऐसी बातों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपना कर आप अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं। खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमी हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है। जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। किसी की निंदा न करें। अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो जरूर बढाएं। अगर नहीं बढ़ा सकते तो अपने हाथ जोड़िए, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिए। जब लोग तुम्हे गाली दें तो तुम उन्हें आशीर्वाद दो। सोचो, तुम्हारे झूठे दंभ को बाहर निकालकर वो तुम्हारी कितनी मदद कर रहे हैं।
ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पर विश्वास नहीं कर सकते। हम जितना ज्यादा बाहर जाएं और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा और परमात्मा उसमे बसेंगे। तुम्हें अंदर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई तुम्‍हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्‍हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुम्हारी आत्मा के आलावा कोई और गुरू नहीं है। दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।
महान दार्शनिक स्‍वामी विवेकानंद 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को उनका निधन हो गया था।

Thursday, July 4, 2019

जाने सबसे ताकतवर पासपोर्ट किस देश का है.....?


कुछ देशों के पासपोर्ट इतने ताकतवर होते हैं कि दुनिया घूमने में आपको कोई दिक्‍कत नहीं आती। हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स ने इस साल की लिस्‍ट जारी करते हुए बता दिया है कि सबसे ताकतवर पासपोर्ट किस देश का है। तो इस लिस्‍ट के मुताबिक जापान और सिंगापुर के पासपोर्ट सबसे ताकतवर हैं क्‍योंकि इसके जरिए आप 189 देशो में जाकर घूम सकते हैं और वो भी वीजा के बिना।  
इससे पहले 2018 में जर्मनी के पासपोर्ट को सबसे ताकतवर करार दिया था।  
वहीं दूसरी तरफ इस लिस्‍ट में भारतीय पासपोर्ट 86वें नंबर पर है और उसका मोबिलिटी स्‍कोर 58 है। इस मोबिलिटी स्‍कोर का मतलब है कि अगर आपके पास भारतीय पासपोर्ट है तो आप बिना वीजा के 58 देशों की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि सिर्फ भारत ही 86वें नंबर पर नहीं है। भारत के साथ-साथ इस स्‍थान पर मार्टियाना, साओ टोम और प्रिंसिपे भी हैं। 
आपको बता दें कि इस लिस्‍ट में 199 पासपोर्ट और 227 पर्यटक स्‍थलों का जिक्र है। इस लिस्‍ट में यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, बेल्जियम, कनाडा, ग्रीस, आयरलैंड और नॉर्वे समेत आठ देश छठे स्‍थान पर हैं। वहीं डेनमार्क, इटली और लग्‍जमबर्ग तीसरे स्‍थान पर हैं, जबकि फ्रांस, स्‍पेन और स्‍वीडन चौथे नंबर पर हैं।
इसके अलावा इराक और अफगानिस्‍तान इस लिस्‍ट में अभी भी सबसे नीचे हैं। इराकी नागरिक बिना वीजा के 27 और अफगानी 25 देशों की यात्रा कर सकते हैं।


Tuesday, July 2, 2019

हवा से बनेगा शुद्ध पानी, जानें कैसे और क्या होगी कीमत....?


देश में पहली बार 2005 में वॉटरमेकर नाम की कंपनी ने इस तरह की मशीन की शुरूआत की थी। इस कंपनी को शुरू करने वाले मेहर भंडारा ने एक मीडिया समूह को बताया कि शुरूआत में इन मशीनों को लेकर मुश्किलें आईं लेकिन पिछले करीब तीन सालों से इनकी बिक्री होने लगी है। आपने मौसम की तमाम खबरों से गुज़रते हुए आर्द्रता या ह्यूमिडिटी शब्द सुना है। इस शब्द का मतलब हवा में पानी की मौजूदगी से ही समझा जाता है। एटमॉसफेरिक वॉटर जनरेटर इसी तकनीक पर काम करता है कि हवा में मौजूद पानी को लिक्विड के रूप में निकाला जा सके। ये मशीन बिजली से चलती है, जिसमें कॉइल्स लगी होती हैं।  इनकी मदद से हवा में मौजूद पानी कंडेन्स होकर द्रव रूप में आ जाता है। फिर इस मशीन में फिल्टर लगाए गए हैं, जिनके ज़रिए ये पानी शुद्ध रूप में आपको मिलता है। ये कंपनी घरों, स्कूलों और क्लीनिकों में हवा से पानी निकालने वाली मशीनें सप्लाई कर रही है। 
वहीं, कोलकाता में भी ऐसी एक कंपनी एक्वो है और इसके प्रमुख नवकरण बग्गा का कहना है कि ये मशीन आपको पानी का एक स्वतंत्र स्रोत देती है, जिसके लिए आपको किसी और पर निर्भर नहीं रहना होता। हैदराबाद में मैत्री एक्वाटेक ने इस मशीन को मेघदूत नाम दिया है और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक समझौता करते हुए ऐसी एक लाख मशीनें बनाने का ज़िम्मा उठाया है। अभी तक इन मशीनों का इस्तेमाल कॉरपोरेट्स या लद्दाख जैसे कठिन इलाकों में सेना और नौसेना के लिए होता रहा है,लेकिन जलसंकट के चलते अब इन मशीनों को आम जनता तक पहुंचाने की कोशिशें हो रही हैं। भारी क्षमता वाली इन मशीनों को अब 25 से 100 लीटर पानी उत्पादन करने की क्षमता वाला बनाया जा रहा है, जो घरों के उपयोग के लिहाज़ से है। घरों में उपयोग के लिहाज़ से 25 से 30 लीटर पानी क्षमता वाली ये मशीनें बनाई जा रही हैं और विभिन्न कंपनियों की कीमतों के हिसाब से ऐसी एक मशीन आपको 45 से 70 हज़ार रुपये तक की कीमत में मिल सकेगी। वहीं दफ्तरों, स्कूलों या बड़ी कंपनियों के लिहाज़ से 5000 लीटर पानी पैदा करने वाली क्षमता तक की मशीनें भी बन रही हैं। 
मैत्री कंपनी की 1000 लीटर क्षमता वाली मशीन की कीमत करीब दस लाख रुपये है। अब सवाल ये है कि हवा में अगर प्रदूषण के तत्व पाए जाते हैं तो इससे निकलने वाला पानी कैसे शुद्ध होगा। इस बारे में मशीन बनाने वाली कंपनियां दावा कर रही हैं कि इन मशीनों में फिल्टर की तकनीक लगाई गई है, जिनके ज़रिए पानी शुद्ध और पीने लायक निकलेगा। पांच स्टेप में पानी फिल्टर होगा और ये फिल्टर स्टेप हैं कचरा हटाना, प्री कार्बन, पोस्ट कार्बन, खनिज गुणवत्ता सुधार और यूवी फिल्टर। इन मशीनों की उपलब्धता के बाद फायदा तो ये होगा कि आपको पानी के लिए किसी और स्रोत पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा,लेकिन इसकी एक शर्त भी होगी। वो ये कि हवा में अगर आर्द्रता ज़्यादा होगी, तभी पानी निकल सकेगा। यानी हवा में अगर ह्यूमिडिटी 20 फीसदी से कम है, तो ये मशीन पानी नहीं निकालेगी।  मैत्री कंपनी के एमडी रामकृष्णन कहते हैं कि ये मशीनें भविष्य हैं। उनकी मानें तो अगर हम वातावरण से सिर्फ 0.1 फीसदी आर्द्रता को ही कन्वर्ट कर लेंगे तो हम सबके लिए पीने का पर्याप्त पानी होगा।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...