Friday, November 15, 2019

अगर आपके भी है एक से ज्यादा बैंक खाते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान...?


केंद्र की मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में जनधन योजना के तहत करोड़ों खाते खुलवाए और उन लोगों तक भी बैंकिंग सुविधा पहुंचाई जिनके पास बैंक की सुविधा नहीं थी। जहां कई लोगों के पास एक ही खाता होता है वहीं कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनके पास एक से ज्यादा खाते होते हैं। एक से ज्यादा खाते खोलने में कोई दिक्कत नहीं है और इस बात की इजाजत सभी को है कि हम सब अपनी जरूरत के हिसाब से किसी भी राज्य में और किसी भी बैंक में खाता खोल सकते हैं,लेकिन यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर आपने एक से ज्यादा खाता खोल रखे हैं तो आपके सामने क्या-क्या परिस्थिति आ सकती हैं। अगर आपने कई खाते खोल रखे हैं और कोई बैंक खाता ऐसा है जिसका आप इस्तेमाल नहीं करते हैं तो इसे बंद करना ही ठीक है।
ऐसा इसलिए कि अब बैंक खाते में जो मिनिमम बैलेंस की रकम है वो बेहद बढ़ चुकी है और हरेक खाते में आपको अच्छी-खासी रकम न्यूनतम बैलेंस के रूप में रखनी होती है। जब अकाउंट बंद कराएं तो ये ध्यान रखें कि इससे जुड़े बीमे, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड आदि को भी उसी समय बंद करा दें जिससे आपको आगे चलकर परेशानी न हो। सैलरी अकाउंट हरेक एंप्लाई के लिए जरूरी होता है जिसमें उसकी सैलरी आती है। हालांकि अगर आपके पास ऐसा खाता है जो पहले सैलरी अकाउंट था और अब उसमें तीन महीने से सैलरी नहीं आ रही है तो वो सेविंग खाते में बदल जाता है। 
बता दें कि सेविंग खाते के लिए और सैलरी खाते के लिए नियम अलग होते हैं और अगर आप उसमें मिनिमम बैलेंस नहीं रखते हैं तो इसपर पेनल्टी या चार्ज लगता है जो खाते से अपनेआप कट जाता है। अब इनकम टैक्स भरते समय आपको अपने हरेक खाते की जानकारी देनी होती है और इसमें साल भर मिले हुए ब्याज का लेखाजोखा देना होता है। इसके अलावा बैंकों का स्टेटमेंट भी कई बार लगाना होता है। अगर आप होम लोन लेने जाते हैं और उस समय लोन के लिए सिबिल स्कोर भी देखा जाता है और अगर कोई ऐसा खाता है जिसे आपने निष्क्रिय छोड़ रखा है तो उसकी भी जानकारी आपको देनी ही होगी।
अगर उसमें बैलेंस मेनटेन नहीं कर रखा है तो उससे भी आपको लोने लेने के क्राइटेरिया पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा लोन लेते समय एक से अधिक खाते होने पर आपको सभी बैंकों का स्टेटमेंट लगाना होता है जो कि काफी बड़ा काम हो जाता है। आपको खुद बैंक जाकर अकाउंट क्लोजर फॉर्म भरना होगा और इसी के साथ डी-लिंकिंग फॉर्म भी भरना पड़ सकता है. आपको खाता बंद करने की वजह बतानी होगी और इसी फॉर्म में दूसरे खाते की जानकारी देनी होगी जिसमें आप बंद होने वाले खाते का पैसा ट्रांसफर करवाना चाहते हैं. अगर खाता ज्वाइंट है तो अकाउंट क्लोजर फॉर्म पर दोनों खाताधारकों के सिग्नेचर होने जरूरी हैं. आपके पास अगर चेक बुक बची है तो उसे जमा करना होगा और डेबिट कार्ड भी जमा करना होगा। खाता खालने के 14 दिन के भीतर अगर खाता बंद कराते हैं तो बैंक कोई चार्ज नहीं लेगा लेकिन एक साल से पहले खाता बंद कराने पर अकाउंट क्लोजिंग चार्ज देना पड़ता है। 
आमतौर पर एक साल के बाद खाता बंद करने पर बैंक आपको कोई चार्ज नहीं वसूलता है। हालांकि ये अलग-अलग बैंकों के नियमों पर निर्भर करता है। अगर आपके खाते में 20,000 रुपये से ज्यादा भी हैं तो भी आपको बैंक से खाता बंद करते समय कैश के रूप में 20 हजार रुपये ही मिल सकते हैं। इससे ऊपर की राशि आपको उस खाते में ट्रांसफर होकर मिलेगी जिसका उल्लेख आपने अकाउंट क्लोजिंग फॉर्म में किया है। ध्यान रखने वाली बात अगर आप खाता बंद कर रहे हैं तो उसमें ज्यादा पैसा न रखें और उसे खाता बंद करने से पहले ही अपने दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लें,लेकिन मिनिमम बैलेंस की शर्त को न भूलें वर्ना बैंक खाता बंद करते समय आपसे पेनल्टी वसूल कर लेगा। इसके साथ ही अकाउंट क्लोजिंग का जिक्र करने वाला आखिरी स्टेटमेंट भी अपने पास जरूर रखे।


Thursday, November 7, 2019

जो लोग खुश रहते हैं, वो ज्यादा जीते हैं,पर कैसे....? वैज्ञानिक रिसर्च


वैज्ञानिकों के मुताबिक, हमारा मस्तिष्क प्रतिदिन 60 हजार विचार पैदा करता है और एक सामान्य आदमी में इनमें से अधिकतर विचार नकारात्मक होते हैं। अगर रोज अपने मस्तिष्क को हजारों नकारात्मक विचारों से भरेंगे तो खुश रहना मुश्किल ही होगा। इसलिए खुश रहने वाले व्यक्ति दिमाग में आ रहे बुरे विचारों को अधिक देर तक पनपने नहीं देते। वो जानते हैं कि हो सकता है जो वो सोच रहे हैं वो गलत हो, जिसे वो बुरा समझ रहे हैं वो उस तरह नहीं हो। ऐसा करने से बुरे विचार आने के बावजूद इंसान रिलैक्स हो जाता है। दरअसल, हमारी सोच के हिसाब से मस्तिष्क में ऐसे केमिकल रिलीज होते हैं जो हमारे मूड को खुश या दुखी करते हैं। जब आप नकारात्मक विचारों को सच मान लेते हैं तो आप का ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है और आप तनाव से भर जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जब आप उस पर अपने नकारात्मक विचार पर संदेह करते हैं, तो आप अनजाने में ही मस्तिष्क को रिलैक्स रहने का सिग्नल दे देते हैं। फॉर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग खुश रहते हैं, वे आत्मविश्वास से लबरेज रहते हैं और दूसरों को प्रेरित करते हैं। 
कई कंपनियां हैं, जो अपने कर्मचारियों को खुश रहने के तरीके तलाशती रहती हैं, ताकि उनकी कार्य क्षमता बढ़े। पॉजिटिव सायकोलॉजी सेंटर वेबसाइट के अनुसार, वैज्ञानिक अध्ययनों में साबित हो चुका है कि जो लोग खुश रहते हैं, वो ज्यादा जीते हैं। यानी खुशी बीमारियों से लड़ने का सशक्त साधन है। आधुनिक लाइफस्टाइल, काम के साथ ही तरह-तरह के तनाव के बीच यह जानना जरूरी हो जाता है कि खुश कैसे रहा जाए। यहां जानिए आप कैसे खुश रह सकते हैं और बच्चों को भी सीखा सकते हैं कि जीवन में खुश रहना कितना जरूरी है। अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो सबसे पहले दूसरों से तुलना करने की आदत से छुटकारा पाना होगा। 
हर किसी की परिस्थितियां, परवरिश, आसपास का माहौल, सपने अलग-अलग होते हैं, इसलिए किसी से तुलना करना बिल्कुल सही नहीं है। आमतौर पर लोग अपनी कमजोरी ही देखते हैं और दूसरे की खूबी पर नजर रखते हैं जिससे वे हमेशा असंतुष्ट रहते हैं। तुलना बंद करो और खुश रहने का मौका मत गंवाओ। सायकोलॉकिल बुलेटिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, हमेशा हंसते हुए चेहरे देखने वाले लोग खुश रहते हैं यानी हमेशा खुश रहें। दूसरों की खुलकर तारीफ करें। यदि किसी अन्य व्यक्ति की सफलता, उसकी काबिलियत या उसकी अच्छाई देखकर आप चुप्पी साधे रहते हैं, या मन ही मन आपको किसी की तरक्की से घुटन महसूस होती है तो यह भावनाएं भी आपकी खुशियों में रुकावट है। 
बेहतर होगा कि आप अन्य लोगों की प्रशंसा करना सीखें। किसी में बुराई ढूढंने की बजाए अच्छाई पर गौर कीजिए और उनके सामने ही उनकी प्रशंसा कीजिए। इससे आप दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाकर खुद भी सुकून महसूस करेंगे। हैप्पीनेस इंडेक्स 2019 के अनुसार, जो लोग परिवार या दोस्त के साथ ज्यादा वक्त गुजारते हैं, वो खुश रहते हैं और स्वस्थ्य भी। कोई भले ही बड़ी उपलब्धियां हासिल कर ले लेकिन इन उपलब्धियों को पाने का उत्साह और खुशी अगर अपने परिवार-दोस्तों के बीच न बांट पाए तो सही मायने में सब फीका ही है। इसलिए परिवार और दोस्तों के साथ मजबूत संबंध बनाएं। खुद पर ध्यान दें कि क्या कर रहे हैं। इसी में खुशी छिपी है। 
अगर कुछ गलत कर रहे हैं तो उस पर ध्यान दे, हो सकता है आपके दुखी होने का कारण आप खुद हो। खुद की कमजोरी को पहचाने और उसे ठीक करें। खुद में कोई कमी है जिससे आप दुखी है वो बाहर करो, आप खुद खुश रहने लग जाओगे। हमेशा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, लोगों से खुलकर बात करें। किसी भी बात से हिचकिचाएं नहीं। हिचक सफलता में रोड़ा बनती है। जीवन की छोटी-बड़ी समस्याओं को हल कर जो खुशी मिलती है, वह किसी से कम नही है।खुशी किसी भी रूप में आए, वह अच्छी है। इसलिए हर छोटी-बड़ी खुशी का आनंद लें और एक शानदार जीवन जीएं।

इस रेलवे स्टेशन पर लगाया गया 'हेल्थ एटीएम' करेंगा लोगों का इलाज….


 भारतीय रेल की ओर से चारबाग रेलवे स्टेशन पर दो 'हेल्थ एटीएम' लगाए गए हैं। योलो हेल्थ एटीएम द्वारा प्रचारित कियोस्क 50-100 रुपये में 16 स्वास्थ्य जांच प्रदान करते हैं। यहां दो तरह के जांच उपलब्ध हैं-पहला नौ मिनट का, जिसके लिए 100 रुपये लगते हैं और दूसरा छह मिनट का जिसके 50 रुपये लगते हैं। रिपोर्ट तुंरत आपके ईमेल या स्मार्टफोन पर आ जाएगी। हेल्थ एटीएम को निजी, वॉक-इन-मेडिकल कियोस्क के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसमें चिकित्सा उपकरण लगे होते हैं, जिसकी मदद से आप बेसिक कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, पल्मोनरी टेस्टिंग, गाइनोकोलॉजी, बेसिक लैबोरेटॉरी टेस्टिंग करा सकते हैं और इसके साथ ही इसमें आपातकालीन सुविधाओं के साथ एक मेडिकल अटेनडेंट भी होता है। 
योलो हेल्थ एटीएम के राज्य प्रमुख अमरेश ठाकुर ने कहा,हर रोज करीब 50-60 लोग इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। ये एटीएम यात्रियों की मदद करते हैं। तेज बुखार या किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्ति आसानी से कम समय में इस प्रक्रिया से गुजर सकता है और यह तय कर सकता है कि उन्हें अपना सफर जारी रखना चाहिए या नहीं। योलो की योजना मुरादाबाद और बरेली में भी जल्द ही इस तरह के एटीएम लगाने की है।


Friday, November 1, 2019

भारतीय रेल में सिर्फ प्लेटफॉर्म टिकट से भी आप यात्रा कर सकते हैं, इसके लिए क्या नियम हैं जाने....?


रेलवे प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत 10 रुपये है। प्लेटफॉर्म टिकट लेने के बाद कोई भी व्यक्ति 2 घंटे तक प्लेटफॉर्म पर रहा सकता है। प्लेटफॉर्म टिकट लेने के बाद अगर अचानक आपको भी यात्रा करनी पड़ती है तो ट्रेन में बैठते ही सबसे पहले टीटीई को इस बारे में जानकारी दें। 
इसके बाद टीटीई यात्री से गंतव्य तक के किराये के साथ 250 रुपये का फाइन लेंगे। हालांकि, प्लेटफॉर्म टिकट से यात्रा करने के लिए यात्री को गार्ड से एक सर्टिफिकेट लेना होता है। 
वहीं,बिना टिकट ट्रेन में बैठने के बाद भी अगर यात्री ने टीटीई को यह नहीं बताया कि उसके पास प्लेटफॉर्म टिकट है तो उससे 1260 रुपये तक का जुर्माना वसूला जा सकता है।
इसके अतिरिक्त 6 महीने तक की कैद भी हो सकती है।



क्या खाए क्या ना खाए जिससे ऑफिस में लंच खाने के बाद नींद न आए....?


आजकल के दिनों में ब्रेकफास्ट के दौरान ओट्स (Oats) खाने का ट्रेंड बहुत बढ़ा है। इसी के साथ ही कुछ लोग हेल्दी डाइट को फॉलो करने के लिए लंच टाइम में भी ओट्स से बनी वेराइटी की रेसिपी खाते हैं,लेकिन ओट्स में मौजूद मेलाटॉनिन बॉडी को रिलैक्स कर आंखों में नींद लाता है। इसलिए इसे भी रात में ही खाएं। शकरकंद में मौजूद पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम बॉडी को रिलैक्स महसूस कराता है इसलिए आप स्वीट पोटैटो को दिन में खाने के बजाय रात में खाएं। इससे आपको रात में नींद अच्छी आएगी। पिस्ता की ही तरह बादाम भी आंखों में नींद लाता है। इसमें मौजूद ट्राइप्टोफेन और मैग्नीशियम मसल्स और नसों को आराम देकर बेहतर नींद में मदद करता है। 
दिन में एक बार एक मुठ्ठी ड्राई फ्रूट्स (काजू, बादाम, पिस्ता या फिर अखरोट) खाने चाहिए।  इसकी वजह है शरीर को हेल्दी बनाए रखना,लेकिन आप पिस्ता को दिन में खाने की वजाय रात में खाएं। क्योंकि पिस्ता में मौजूद मैग्नीशियम, प्रोटीन और विटामिन बी6 शरीर को रिलैक्स महसूस कराकर बेहतर नींद देने में मदद करता है। कई लोगों को दिन में खाना खाने के बाद ग्रीन टी या हर्बल टी पीने का बहुत शौक होता है,जिसके बाद आती है नींद। 
जी हां, हर्बल टी जैसे कैमोमाइल टी नसों को आराम पहुंचाती है और इसका नतीजा होती है शानदार नींद।  इसलिए बेहतर है कि आप इस चाय को रात को सोने से पहले पिएं। इसलिए  ऑफिस में लंच के खाने में चपाती यानी रोटी के साथ हरी सब्जी व सलाद ले। चावल भी ले सकते है लेकिन चावल से भी नींद आने की संभवना बड़ जाती है इसलिए इसे सिर्फ जरूरत के हिसाब से खाने में शामिल करे। खाने के बाद कुछ देर टहले जिससे आप हल्का महसूस करेंगे और ऑफिस में नींद आने की समस्या से बच सकते है।      

Monday, October 21, 2019

प्रोटीन पर नहीं, बल्कि प्रोटीन के हेल्दी स्रोत पर ध्यान दें..जानिए एक दिन में शरीर के लिए कितना प्रोटीन लेना चाहिए...?


क्‍या आप जानते हैं हमें कितना प्रोटीन खाना चाहिए? यह जानना भी आपके लिए बहुत जरूरी है कि आप कितना प्रोटीन लें। आहार में हर चीज की मात्रा सही होनी चाहिए। आपको कितना प्रोटीन खाना है यह पूरी तरह से आपकी जरूरतों पर निर्भर करता है। क्योंकि प्रोटीन ही वज़न कम करने का काम करता है, तो प्रोटीन ही वजन बढ़ा भी सकता है। इसलिए आपनी जरूरत के अनुसार आपको यह जानने की और मापने की जरूरत है कि आपको दिन में कितना प्रोटीन लेना चाहिए। तो अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि मुझे कितना प्रोटीन लेना चाहिए' तो इसका जवाब हम आपको देते हैं। प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। 
शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए तीन माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स में से एक जरूरी तत्व प्रोटीन ही है। प्रोटीन के अलावा दो स्थूल पोषक तत्व हैं कार्बोहाइड्रेट और वसा अक्सर हमारे 'फिटनेस आहार प्रोटीन पर लोड पर जोर दिया जाता है। लोग प्रोटीन खाने पर जोर देते हैं, जोकि अच्छा भी है, लेकिन वे कहते हैं न कि अति ही चीज की बुरी होती है।  ठीक इसी तरह यह भी समझने जी जरूरत है कि कितना प्रोटीन आपकी सेहत के लिए अच्छा है। हम आपको बताते हैं कि आपको एक दिन में कितना प्रोटीन लेना चाहिए। इसके साथ ही साथ आपको अपने लिए प्रोटीन युक्त आहार की लिस्ट भी आपको तैयार कर लेनी चाहिए। 
प्रोटीन का चार्ट और प्रोटीन की खुराक की सही जानकारी यहां मिलेगी। तो चलिए जानते हैं। एक दिन में हमें कितना प्रोटीन लेना चाहिए। इस बारे में हमने बात की बीएचएमएस डॉक्टर रोशन आरा डॉक्टर का कहना है कि प्रोटीन निश्चित रूप से पूरे शरीर के लिए जरूरी है,लेकिन मासपेशियों के लिए खासतौर पर अहम है। प्रोटीन एक पोषक तत्व है जो मांसपेशियों को बनाने और बनाए रखने में मदद करता है, यही वजह है कि फिटनेस का ख्याल रखने वाले लोगों को और बॉडी बिल्डिंग के लिए हम दैनिक आहार में इस पोषक तत्व को सावधानीपूर्वक लेने की सलाह देते हैं। डॉक्टर आरा के अनुसार प्रोटीन हमारे शरीर के लिए जरूरी अवयवों में से एक है। 
प्रोटीन इनटेक सभी के लिए जरूरी होता है। यह शरीर के उत्तकों की मरम्मत और उनके पुनर्निमाण में मददगार होता है,लेकिन इसके साथ ही साथ इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है कि आप इसे अपनी जरूरत के मुताबित ही लें। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है, तो वहीं प्रोटीन का कम सेवन भी ठीक नहीं। आपको रोज कितना प्रोटीन लेना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लक्ष्य क्या हैं। रोज कितना प्रोटीन खाएं यह आपके वजन, आकार पर निर्भर करता है। हर किसी को एकसमान प्रोटीन की जरूरत नहीं होती तो इस राशी ने इस बात पर जोर दिया कि अपने आहार में 30 फीसदी कैलोरी प्रोटीन से लेनी चाहिए।  
प्रोटीन के अच्छे स्रोत का करें उपभोग:- यह जरूरी है कि आप सिर्फ प्रोटीन पर नहीं, बल्कि प्रोटीन के हेल्दी स्रोत पर ध्यान दें। राशी के अनुसार ऐसे आहार का चुनाव करें जो प्रोसेस्ड न हो। वेगन के लिए बेस्ट प्रोटीन सोर्स वे लोग जो वेगन हैं अगर प्रोटीन के लिए फलियों और हरी सब्जियों से ऊब चुके हैं तो वे प्लांट बेस्ड प्रोटीन का विकल्प चुन सकते हैं। इसके अलावा तील, चिया सीड्स वगैरह को भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। महत्वपूर्ण सूचना:- अपने आहार में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।  डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही आहार में बदलाव करें।

नया इनकम टैक्स स्लैब बदलाव कैसे प्रभावित करेगा आपको.....?


अगस्त के महीने में सरकार को नए डायरेक्ट टैक्स कोड पर रिपोर्ट सौंपी गई थी। हालांकि, उस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था। खबरों के मुताबिक, टास्कफोर्स ने जनरल टैक्सपेयर्स के लिए छूट की सीमा (2.5 लाख रुपये) पर बरकरार रखा था। सीनियर सिटिजंस के लिए 3 लाख तक छूट और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये पर बरकरार रखी गई। सबसे बड़ी बात टैक्स स्लैब में बदलाव लाए जाने की बात है। 10% टैक्स वाले स्लैब की सीमा सीधे 10 लाख तक की आय तक होगी, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। 
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस(CBDT) के मुताबिक, 2017-18 में रिटर्न फाइल करने वाले 5.52 करोड़ इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स में से 27 फीसदी 5 से 10 लाख रुपये की आयवर्ग से थे। अगर टास्कफोर्स की सिफारिशें लागू हो जाती हैं तो 20% वाले टैक्स स्लैब में से 1.47 करोड़ करदाता सीधे 10% वाले स्लैब में आ जाएंगे। यानी उन पर कम टैक्स बनेगा।# कैसा हो सकता है नया टैक्स स्लैब:- मौजूदा समय में कुल टैक्स पर 4% सेस लगता है और 5 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स फुल रिबेट मिलता है। खबरों के मुताबिक, DTC ने सरचार्ज को खत्म करने और रिबेट को बरकरार रखने की सिफारिश की है।
# बड़े स्लैब्स पर ज्यादा असर:- DTC की सिफारिशों से कम आय वाले टैक्सपेयर्स पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। 5-6 लाख की आय वाले लोगों की टैक्स देनदारी में कोई खास फर्क नहीं आएगा, बल्कि वे कुछ डिडक्शन्स के जरिए टैक्स के दायरे से बाहर भी आ सकते हैं। अगर किसी की शुद्ध कर योग्य आय 7 लाख रुपये है, तो उसको भी कोई खास फायदा नहीं होगा। उसकी टैक्स देनदारी 44,200 रुपये से घटकर 40,000 रुपये हो जाएगी, यानी सिर्फ 9.5% की बचत। बहरहाल, ज्यादा आय वाले लोगों को ज्यादा फायदा होगा। 10 लाख रुपये की नेट टैक्सेबल इनकम पर 34% का फायदा होगा, यानी टैक्स देनदारी 1.06 लाख रुपये से घटकर 70,000 रुपये पर आ जाएगी। 10% टैक्स वाले स्लैब की सीमा सीधे 10 लाख तक की आय तक हो सकती है
CBDT के आंकड़ों के मुताबिक, अगर टैक्स स्लैब्स में बदलाव किया जाता है तो करीब 40 लाख टैक्सपेयर्स 30% के स्लैब से 20% वाले स्लैब में आ जाएंगे। 22 लाख रुपये की आय वाले हर साल 1.7 लाख रुपये की बचत कर सकेंगे, उनकी टैक्स देनदारी में 36% की कमी आएगी। यानी 4.75 लाख रुपये की जगह उनपर 3 लाख रुपये का टैक्स बनेगा। टास्कफोर्स ने 2 करोड़ रुपये से ऊपर की आय वालों के लिए 35% के नए स्लैब की शुरुआत की है। अगर 25 पर्सेंट सरचार्ज और 4% सेस को जोड़ दिया जाए तो 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के बीच आय वालों के लिए इफेक्टिव टैक्स रेट 39% होगा। यही वजह है कि इस स्लैब में आने वालों को उतना फायदा नहीं होगा जितना अन्य स्लैब वालों को। हालांकि, 20% वाले टैक्स स्लैब के 10 लाख से 20 लाख रुपये होने से उन्होंने थोड़ा फायदा जरूर मिलेगा। 
क्या खत्म हो जाएगा सरचार्ज:- सुपर रिच के लिए भी अच्छी खबर हो सकती है। टास्कफोर्स ने सिफारिश की है कि टेंपररी तौर पर टैक्स सरचार्ज वसूला जाना चाहिए। 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरचार्ज की शुरुआत की थी। उस वक्त इसे एक बार के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा था कि यह टेंपररी है, लेकिन आने वाले सभी बजटों में इसे पर्मानेंट फीचर की तरह जारी रखा गया। जब कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में कटौती कर उसे 25% तक लाया गया था, तब कहा जा रहा था कि कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए दिवाली से पहले ही दिवाली आ गई। अब आम नागरिक टैक्स के मोर्चे पर सरकार से इसी तरह की राहत की उम्मीद कर रहे हैं। खुशखबरी यह है कि टैक्स स्लैब में बदलाव हो सकता है, जिससे लाखों टैक्सपेयर्स को फायदा होगा। 

Tuesday, October 15, 2019

क्या होता है हंसने से….लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन ऐसा क्यू कहा जाता है....?


आज कल सभी लोग खूब हंसते है,लेकिन बनावटी या दिखावटी,वर्ल्ड लॉफ्टर्स डे 1998 में मुंबई से शुरू हुआ था तो वर्ल्ड स्माइल्स डे का आयोजन स्माइली की इमोजी दुनिया को देने वाले हाव्रे बॉल ने 1999 में शुरू किया था। हंसना, मुस्कुराना एक ऐसी भावना है जो इंसान के अलावा किसी अन्य प्राणि के नसीब में नहीं आई है। खास बात यह है कि खुशी सौ रोगों की एक दवा है। यही वजह है कि आजकल महानगरों में भी लॉफ्टर क्लबों की संख्या में दिनोंदिन इज़ाफा होता जा रहा है। हंसने से ऑक्सीजन लेने की क्षमता में इज़ाफा आपकी एयरोबिक क्षमता (दिल और फेफड़े) को बढ़ा देता है।
इससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर में भी सेहत के लिए उपयोगी सुधार आता है। हंसना शरीर को ठीक वैसे ही फायदा पहुंचाता है जैसा कि तेजी से चलना। यह आपके पूरे शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय कर देता है। इसलिए हंसते रहिए मुस्कुराते रहिए और अंग्रेजी की इस कहावत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लीजिए, ‘‘लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन।’’ लीड रिसर्चर केरिना डब्ल्यू. डेविडसन (पीएचडी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी) के मुताबिक खुश रहने वाले लोग भी अवसाद और नकारात्मक भावनाओं का सामना करते हैं, लेकिन यह स्थिति बहुत कम वक्त की और परिस्थितवश होती है। 
रिसर्च में पाया गया कि खुश रहने वाले लोगों में दिल की बीमारी की आशंका हमेशा ग़म और खुशी के बीच झूलते रहने वाले लोगों की तुलना में 22 प्रतिशत कम रही। खुश रहना न केवल हमारे दिल बल्कि दिमाग के लिए भी बहुत अच्छा होता है। अवसाद, क्रोध, आक्रामकता जैसी भावनाएं मुस्कुराने, खिलखिलाने से दूर भाग जाती हैं। खुशी, संतोष, उत्साह भरा सकारात्मक व्यक्तित्व आपको दिल की बीमारियों से दूर रखने में महत्वपूर्ण साबित होता है। कनाडा में किए गए अध्ययन के दौरान रिसर्चर्स ने तकरीबन एक दशक तक 1739 स्वस्थ वयस्कों को निगरानी में रखा। अध्ययन की शुरूआत में प्रशिक्षित पेशेवरों ने इन लोगों में मौजूद नकारात्मकता (अवसाद, आक्रामकता, चिंता) और सकारात्मकता (खुशी, उत्साह, उमंग) की स्थिति का जायजा लिया। 
आपका हंसना, खिलखिलाना दिमाग से लेकर पूरे शरीर में एक सकारात्मक चेन रिएक्शन सी चला देता है। इससे शरीर में कोर्टिसोल का स्तर कम हो जाता है। कोर्टिसोल तनाव से उत्पन्न होने वाला एक केमिकल है जो दिल की बीमारियों, हाइपरटेंशन, कमर के इर्द-गिर्द मोटापे के लिए जिम्मेदार होता है। हंसी से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी और अधिक मजबूत होती है, हमारी लार और खून में एंटीबॉडीज का ज्यादा उत्पादन कर बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी पर अंकुश लगाती है। हंसना त्वचा के लिए भी अच्छा होता है। देखा गया है कि एक्जिमा के मरीजों को नियमित तौर पर कॉमेडी फिल्में देखने से फायदा होता है। एलर्जी के मरीजों को नियमित तौर पर हंसने से शरीर पर होने वाली लाल फुंसियों, खराशों से निजात मिल जाती है।

इन एप को तुरंत करें अनस्टॉल लेकिन क्यू.....?

गूगल ने हाल ही में Google Play Store से करीब 29 बेहद पॉपुलर ऐप को रिमूव कर दिया है। ये सारे वैसे ऐप थे, जिन्हें लाखों-करोड़ों बार डाउनलोड किया जा चुका था। इन एप को तुरंत करें अनस्टॉल:- गूगल के मुताबिक अगर आप एंड्रॉयड स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो आपको Feel Camera HD, Filter Photo Frame, Lens Flares, Magic Effect, QR Code Scanner, Super Mark, Photo Effect Pro, Art Filter, Lie Detector prank, New Hair Fashion, Smart Magnifier Pro, Magnifier Pro- Magnifying glass, Magnifying Glass Pro, Cut Cut Mix, Cut Cut Mix Pro, Galaxy Overlay, Color Splash Photo Effect, Age Face, Photo Blur, Blur Image, Super Magnifier Lite, Magnifying Pro, Qing Camera, Reflex Camera HD, First Camera HD, Rhythm Camera, Pretty Makerup Photo, Glitch Lens - Vaporwave & Ghost Photo Editor, Multi Apps – Multiple Accounts simultaneously शेयरों को तुरंत अपने स्मार्टफोन से रिमूव कर देना चाहिए। 
क्यों इन्हें हटाना है जरूरी:- साइबर सिक्योरिटी और एंटी वायरस फर्म Quick Heal Security Labs ने कहा है कि गूगल (Google) ने जो 29 ऐप को रिमूव किया है, उसमें 24 ऐप ऐसे हैं जो मैलिसियस ऐप हैं यानी नुकसान पहुंचाने वाले हैं जो HiddAd कैटेगरी में आते हैं। ये ऐप पहली बार स्मार्टफोन पर इन्स्टॉल होने पर अपना आइकॉन छुपा लेते हैं और स्क्रीन पर शॉर्टकट क्रिएट कर देते हैं। इनका मकसद होता है कि यूजर ऐप को फोन से रिमूव न करें। 
जब यूजर शॉर्टकट के जरिये ऐप को लॉन्च करता है या ओपन करता है तो स्क्रीन पर फुल स्क्रीन ऐड दिखाया जाता है। बाकी 5 ऐप असल में ऐडवेयर हैं जो य़ूजर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे YouTube, Facebook और दूसरे प्लेटफॉर्म पर विजिट के दौरान इन्स्टॉल हो जाते हैं। गूगल ने इन्हीं वजहों से 29 ऐप को प्ले स्टोर से हटा दिया है।

Sunday, October 13, 2019

क्या आप जानते है इस जीवन बीमा निगम (LIC) के बारे में.....?


भारतीय जीवन बीमा निगम LIC की बीमा श्री (Bima Shree) एक नॉन-लिंक्ड पॉलिसी है। इस पॉलिसी में प्रॉफिट के साथ लिमिटेड प्रीमियम पेमेंट की सुविधा मिलती है। साथ ही इसमें सुरक्षा और सेविंग्स के साथ ग्राहकों को कई अन्य सुविधाएं भी दी जाती हैं। एलआईसी की बीमा श्री पॉलिसी ज्यादा इनकम वालों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत आपको गारंटीड लाभ के साथ-साथ लॉयल्टी लाभ का भी फायदा मिलता है। इस पॉलिसी में न्यूनतम 10 लाख रुपये के सम एश्योर्ड की गारंटी है। अधिकतम सम एश्योर्ड बेसिक पर कोई लिमिट नहीं है। 
यह योजना की पूरी अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्‍यु हो जाने पर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है और पॉलिसी की अवधि के अंत में पॉलिसीधारक के जीवित रहने पर उसे परिपक्वता राशि का भुगतान किया जाता है। बीमा श्री पॉलिसी की खास बातें:- बीमा श्री पॉलिसी का टर्म 14, 16, 18 और 20 साल के लिए है। 14 साल की पॉलिसी को लेने के लिए न्यूनतम उम्र 8 वर्ष है तो वहीं अधिकतम उम्र 55 है। इसके अलावा 16 साल के प्लान को लेने के लिए अधिकतम उम्र 55 साल है। 18 साल के प्लान के लिए 48 साल अधिकतम उम्र जबकि 20 साल के प्लान के लिए अधिकतम उम्र 45 साल है।
किस्त भुगतान का तरीका प्रति माह 5000 रुपये, तिमाही 15000 रुपये, 25000 रुपये अर्धवार्षिक और सालाना 50000 रुपये। पहले पांच साल के लिए 50 हजार रुपये का बेसिक सम एश्योर्ड की गारंटी। इसके बाद प्रीमियम भुगतान अवधि के अंत तक बाद के वर्षों के लिए 55 हजार रुपये प्रति बेसिक सम एश्योर्ड की गारंटी। LIC बीमा श्री पर मृत्यु लाभ:- पहले पांच वर्षों के दौरान मृत्यु की स्थिति पर सम एश्योर्ड और जमा गारंटीकृत वृद्धि दिया जाता है। पांच वर्ष की समाप्ति के बाद मृत्यु के मामले में या परिपक्वता से पहले मृत्यु पर सम एश्योर्ड और जमा गारंटीकृत वृद्धि और लॉयल्टी वृद्धि दी जाती है।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...