महाराष्ट्र हिंगोली के गोरेगांव के कर्ज से प्रभावित 10 किसानों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके शरीर के अंगों को बेचने और स्थानीय बैंकों से बकाया ऋण की वसूली करने के लिए कहा है। किसानों ने सीएम को एक पत्र लिखकर अपनी आंखें, लीवर, किडनी और अन्य अंग बेचने की पेशकश की है, जिससे प्राप्त आय का उपयोग उनके लंबित बकाया को चुकाने के लिए किया जा सकता है। इस चौंकाने वाले कदम पर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार और शिवसेना (यूबीटी) के किसान नेता किशोर तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अधिकारियों की सहायता करने के लिए, किसानों ने अपने कीमती शरीर के अंगों के लिए एक रेट-कार्ड भी जारी किया है- 90,000 रुपये प्रति लीवर, 75,000 रुपये प्रति किडनी और 25,000 रुपये प्रति आंख। कवरखे ने कहा कि अब पत्नियां, बच्चे और परिवार के
Friday, November 24, 2023
हमारी आंखें, लीवर, किडनी और अन्य अंग ले लो हमें कर्ज मुक्त करो महाराष्ट्र की शिंदे सरकार से किसानों ने लगाई गुहार....
अन्य सदस्य भी बैंकों और निजी ऋणदाताओं के लगातार उत्पीड़न से बचने के लिए अपने
शरीर के अंगों आदि को त्यागने के लिए स्वेच्छा से आगे आए हैं। जाधव, मुले और अन्य ने दावा
किया, यह सिर्फ शुरुआत है। हिंगोली और पड़ोसी जिलों के
सैकड़ों किसान आगे आकर अपना कर्ज चुकाने और शांति से जीने की उम्मीद के लिए अपने
शरीर के अंगों को बेचने की योजना बना रहे हैं। अनपेड लोन वाले किसान हैं,दीपक
कवरखे (3 लाख रुपये), नामदेव पतंगे (2.99
लाख
रुपये), धीरज मपारी (2.25
लाख
रुपये), गजानन कवरखे (2 लाख रुपये), रामेश्वर कवरखे, अशोक कवरखे, गजानन जाधव (1.50
लाख
रुपये प्रत्येक), दशरथ मुले (1.20
लाख
रुपये), विजय कवरखे (1.10
लाख
रुपये),
रामेश्वर कवरखे (90,000
रुपये)
हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक गजानन कवरखे ने आईएएनएस को बताया, हमने सीएम को संबोधित
ज्ञापन सेनगांव तहसीलदार और गोरेगांव पुलिस स्टेशन को सौंप दिया है और इसे सीएम तक
पहुंचाने का अनुरोध किया है। उन्होंने हमारे संचार को स्वीकार कर लिया है, लेकिन आगे कोई
प्रतिक्रिया नहीं आई है।अपनी निराशा बताते हुए कवरखे ने कहा,यहां के किसान कपास और
सोयाबीन की खेती करते हैं लेकिन इस साल मौसम की समस्याओं और खेतों में खड़ी फसलों
पर बीमारियों की मार के कारण लगभग 80 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई। परेशान टिलरों ने बताया
कि गंभीर नुकसान के साथ खरीफ सीजन व्यावहारिक रूप से नष्ट हो गया और अब किसानों के
पास चालू रबी सीजन की बुआई के लिए पैसे या संसाधन नहीं हैं। कवरखे ने अफसोस जताते
हुए कहा,फसल बीमा या यहां तक कि सरकार की ऋण माफी की बड़ी
घोषणा के रूप में कोई मदद नहीं मिल रही है।
कोई उचित मूल्य निर्धारण तंत्र या
न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं है। हमारी खेती की लागत आय से दोगुनी है। अब जीवित रहना
असंभव हो गया है। हमारे पास अपने शरीर के अंगों को बेचने और कर्ज चुकाने के अलावा
कोई विकल्प नहीं बचा है। मुंबई में वडेट्टीवार ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताया और
राज्य सरकार से महाराष्ट्र में तुरंत सूखा घोषित करने और पीड़ित किसानों को आवश्यक
सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। यवतमाल में तिवारी ने जमीनी
हकीकतों की अनदेखी करने या राज्य के बड़े हिस्से में सूखे की गंभीर स्थिति के लिए
सरकार की आलोचना की, जिसने किसानों को ऐसे चरम कदम उठाने के लिए मजबूर
किया है।
वडेट्टीवार ने कहा कि,अगर ये किसान विधायक या सांसद होते, तो राज्य सरकार उनके
पास खोखा (करोड़ रुपये के लिए बोली जाने वाली भाषा) लेकर
दौड़ पड़ती,लेकिन उसी शासन के पास इन सूखा प्रभावित और कर्ज के बोझ
से दबे किसानों के लिए कोई धन नहीं है।
दुनिया एक परिवार है और हम सबको आर्य बनाएंगे,हिंदू हिंदू से संपर्क करें....RSS चीफ मोहन भागवत ने किया आव्हान....
थाइलैंड की राजधानी में बैंकॉक तीसरी विश्व हिंदू
कांग्रेस [WHC] के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ [RSS] के प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया भर के हिंदुओं
से अपील की कि वे एक दूसरे से जुड़ें और मिलकर दुनिया से कड़ी जोड़ें। उन्होंने
आगे कहा,दुनिया एक परिवार है और हम सबको आर्य बनाएंगे। उन्होंने
दुनिया भर से आए विचारकों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा,हमें हर हिंदू तक पहुंचना होगा, संपर्क साधना होगा। सभी हिंदू मिलकर दुनिया में सभी से संपर्क साधेंगे।
हिंदू अधिक से अधिक संख्या में जुड़ रहे हैं और दुनिया के साथ जुड़ने की प्रक्रिया
शुरू हो गई है। उन्होंने कहा,इसके लिए हमें साथ
आना
होगा, साथ रहना होगा और साथ में काम करना होगा। भागवत
ने कहा, सभी को दुनिया के लिए कुछ योगदान देना होगा। हमने
अपनी विशेषता पहचान ली है। हमारे अंदर सभी के प्रति सम्मान है। हमारे पूर्वजों ने
इसे पहचाना था,लेकिन हम इस कौशल को भूल गए और टुकड़ों में बांट दिए गए और अधीन हो
गए। अब हमें एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि आक्रोश, घृणा, घृणा भरे भाषण, द्वेष और अहंकार लोगों को साथ में आने से रोकते हैं और समाज या संगठन
को तोड़ देते हैं।
भागवत ने कहा,आज का विश्व लड़खड़ा रहा है। 2,000 साल से उन्होंने खुशी, आनंद और शांति लाने
के लिए अनेक प्रयोग किए हैं। उन्होंने भौतिकवाद,साम्यवाद और पूंजीवाद के प्रयोग किए हैं। उन्होंने अनेक धर्मों से
जुड़े प्रयोग किए हैं। उन्हें भौतिक समृद्धि मिल गई है, लेकिन संतोष नहीं है। उन्होंने कहा,कोविड महामारी के बाद उन्होंने पुनर्विचार करना शुरू किया। अब ऐसा
लगता है कि वे यह सोचने में एकमत हैं कि भारत रास्ता दिखाएगा। भागवत ने कहा,हमें सभी के पास जाकर संपर्क करना होगा, उनसे जुड़ना होगा और अपनी सेवाओं से उन्हें अपनी ओर लाना होगा, हमारे पास उमंग है।
हम निस्वार्थ सेवा के मामले में दुनिया में अग्रणी
हैं,
यह हमारी परंपराओं और मूल्यों में है। इसलिए
लोगों तक पहुंचिए और दिल जीतिए। वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक और वैश्विक
अध्यक्ष स्वामी विज्ञानानंद ने शंख बजाकर सम्मेलन की शुरुआत की। इसमें 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस तीन दिवसीय सम्मेलन
में शामिल प्रतिनिधियों को दुनियाभर में हिंदुओं के समक्ष आ रहीं चुनौतियों पर
विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा। भागवत ने कहा कि हिंदुओं को वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का प्रसार करने में अहम भूमिका निभानी होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भौतिकवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद के साथ प्रयोगों के बाद लड़खड़ा रही दुनिया को
प्रसन्नता और संतोष का मार्ग भारत दिखाएगा।
अजित पवार गुट और शिंदे गट के विधायक- सांसद भविष्य में बीजेपी पार्टी में शामिल हो जाएंगे...संजय राउत के बयान से गरमाई राजनीति
महाराष्ट्र
में बीते लगभग एकवर्ष से राजनीति के उतार चड़ाव में कई बदलाव आए। शिवसेना से विद्रोह के बाद पिछले साल जून में शिवसेना विभाजित हो गई थी और एकनाथ शिंदे ने ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया। इस साल 2 जुलाई को अजित पवार और आठ विधायकों के शिंदे सरकार में शामिल होने के
बाद एनसीपी को विभाजन का सामना करना पड़ा था। उस वक्त अजित पवार ने शरद पवार को
झटका देते हुए शिवसेना और बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम
पद
की शपथ ली और उनके साथ आए विधायकों को भी आगे चलकर राज्य में मंत्री पद मिला।
जैसे ही अजित पवार ने शरद पवार का साथ छोड़ा उन्होंने फिर एनसीपी पार्टी और अध्यक्ष
पद को लेकर भी दावा कर दिया है। इसकी
सुनवाई निर्वाचन आयोग कर रहा है। राज्यसभा सदस्य व शिवसेना (यूबीटी) के
नेता संजय राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अगर बीजेपी अजित पवार खेमे और
शिंदे नीत शिवसेना के सांसदों और विधायकों को टिकट देती है तो वे उसके चुनाव चिह्न
पर लड़ेंगे।
राउत ने दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजित पवार
गुट और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के विधायक और सांसद भविष्य
में बीजेपी पार्टी में शामिल हो जाएंगे। उन्होंने कहा, मेरे पास जो विश्वसनीय जानकारी है, उसके अनुसार अजित पवार खेमे (राकांपा) के अधिकतर विधायक और सांसद तथा
शिंदे खेमे के लगभग सभी विधायक और सांसद भविष्य में बीजेपी में शामिल हो जाएंगे। राउत ने कहा कि शिंदे और अजित पवार खेमों के विधायकों और सांसदों को
क्रमश: तीर कमान और घड़ी चुनाव चिह्न नहीं मिलेंगे और उन्हें बीजेपी के चुनाव चिह्न पर मैदान
में उतरना होगा। राउत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे और शरद पवार
को छोड़ने वाले अधिकतर सांसद-विधायक चुनाव हार जाएंगे।
Thursday, November 23, 2023
सिख धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले कौन होते है पंज [पाँच] प्यारे + क्या है पंच ककारों की मर्यादा....?
सिख धर्म में जब भी कोई शुभ कार्य आरंभ
किया जाता है उसमें पंज प्यारो की अहम भूमिका होती है। चाहे अमृत पान करना हो या किसी
के द्वारा अनजाने में कोई बहुत बड़ी भूल हो गई हो या धर्म पर कोई आंच आ रही हो जिससे
सिख संगत की हानी हो सकती है ऐसे में पंज प्यारे मोर्चा संभालकर संगत को मार्गदर्शन
देते है वहीं शोभा यात्रा का नेतृत्व
की अगुवाई में पंज प्यारे हमेशा से
ही आगे चलते है। 1699 में सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह ने पांच लोगों को (भाई दया सिंह, भाई साहिब सिंह, भाई धर्म सिंह, भाई हिम्मत सिंह,
भाई मोहकम सिंह) को यह नाम दिया था। पंच प्यारे सिख
धर्म में पांच भक्तों का समूह है जो गुरु गोबिंद सिंह जी के समय में उनके साथ थे। गुरु
गोबिंद सिंह जी ने इन पंज प्यारों को खालसा पंथ की स्थापना के लिए अपने साथ रखा
था और उन्हें खालसा समुदाय के स्थानांतरण करने का कारण भी बनाया था। इन पंज
प्यारों ने गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेशों का पालन करते हुए खालसा पंथ की स्थापना
में अहम भूमिका निभाई और उनकी शिक्षा का पालन किया। इन्हें खालसा ब्रिगेड भी कहा
जाता है कहते हैं कि इन पंज प्यारों ने सिख इतिहास को मूल आधार प्रदान किया और सिख
धर्म को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
इन आध्यात्मिक योद्धाओं ने न केवल युद्ध
के मैदान में विरोधियों से लड़ने की शपथ ली, बल्कि विनम्रता और सेवा भाव को भी दिखाया। पंज प्यारों
को खंडा दी पाहुल को शुरू करने, गुरुद्वारा
भवन की आधारशिला रखने,
कार-सेवा का उद्घाटन करने, प्रमुख धार्मिक जुलूसों का नेतृत्व करने या सिख धर्म से
जुड़े सभी प्रमुख कार्यों व समारोहों में अहमियत दी जाती है। आज भी पंज प्यारों को
नगर कीर्तन या शोभा यात्रा के दौरान विशेष महत्व दिया जाता है और वे ही शोभा
यात्रा का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिखों के दसवें गुरू गुरु गोविन्द सिंह के कहने
पर धर्म की रक्षा के लिये अपना-अपना सिर कटवाने के उनके जो पांच साथी तैयार हुए
उन्हें सिखों के इतिहास में पंच प्यारे कहा जाता है।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने
इन्हें अमृत पिलाया था। जिनमे
भाई दया सिंह, भाई धरम
सिंह,भाई मोहकम सिंह, भाई
सहीब सिंह, भाई हिम्मत सिंह। वे
सभी गुरु गोबिंद सिंह जी के विश्वासपूर्वक भक्त थे और
उन्होंने खालसा समुदाय की उत्थान के लिए अपना सब कुछ बलिदान किया।
खालसा पंथ की स्थापना के साथ ही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने
पंज प्यारो के लिए एक मर्यादित यूनिफ़ार्म यानि ड्रेस भी बताई जिसे खालसा की पहचान के
रूप में जाना जाता है,जिसे पंच ककार यानि शरीर को शुशोभित करने वाली पोशाख जिसमें 1.केश रखना यानि आजीवन बाल नहीं
कटवाने। 2.कंगा यानि
कंगी [कोम्ब] बालों को संभालने व स्वारने के लिए। 3.कछहरा यानि अंडर गरमेन्ट जो पूरी तरह से सूती
कपड़े का नाड़े वाला हाफ पैंट जैसा खुला व ढीला-ढाला हो जिसे गुप्तांगो को ढका जा सके।
4. किरपान या
तलवार जिसे मुसीबत के समय अपनी रक्षा के साथ दूसरों की जान बचाने के लिए प्रयोग में
लाया जा सके। 5.कड़ा लोहा
का वो गोल आकार वाला छलला जिसे खालसा या सिख व्यक्ति हाथों में धारण करते है जिसे सिख
होने का प्रतीक भी माना है। इस प्रकार गुरूओ ने अपने खालसे और सिख को एक मर्यादित यूनिफ़ार्म
यानि ड्रेस प्रदान की जिसका अमृत धारी सिख पूरा पालन करते है।
गन्ने के न्यूनतम मूल्य की मांगों को लेकर किसानों ने किया चक्का जाम....
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में गन्ना
किसानों को पेराई सत्र के गन्ने के दामों की दूसरी किश्त के 400 रुपये और इस पेराई सत्र के गन्ने के दामों को प्रति टन 3500 रुपये का न्यूनतम मूल्य मिले ऐसी मांग स्वाभिमानी किसान संगठन ने
सरकार के सामने रखी है। बुधवार को मुंबई में महाराष्ट्र के सहकार मंत्री के साथ इस
विषय को लेकर हुई बैठक में योग्य निर्णय न होने से आक्रमक पूर्व सांसद राजू शेट्टी
ने आज गुरुवार को नैशनल हाइवे पर चक्का जाम आंदोलन करने का निर्णय लिया। किसानों
के जत्थे सुबह से ही नेशनल हाईवे पर जमा होने शुरू हुए। चक्का जाम आंदोलन के
निर्णय से हड़बड़ाए जिला प्रशासन और पुलिस ने कल रात से ही स्वाभिमानी किसान संगठन
के
प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। फिर भी तकरीबन
10 हजार से ज्यादा किसानों और कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे पर अपनी
मौजूदगी लगाकर हाइवे रोक दिया। अनुचित घटना न हो इसकी खबरदारी लेते हुए जिला पुलिस
ने भारी बंदोबस्त तैनात किया है। किसान नेता पूर्व सांसद राजू
शेट्टी आज सुबह महालक्ष्मी मंदिर में जाकर देवी के दर्शन के बाद किसानों के
प्रश्नों के हल होने की मन्नत मांगकर आंदोलन स्थल पर पहुंचे।
पिछले साल के पेराई
सत्र में चीनी मिलों को भेजे गए गन्ने की दामों की दूसरी किश्त के 400 रुपये और इस वर्ष भेजे जानेवाले गन्ने के 3500 रुपये प्रति टन
न्यूनतम मूल्य किसानों को मिले,
यह मांग राज्य सरकार और चीनी मिल मालिकों के
सामने रखी गई थी,लेकिन दोनों ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसलिए आखिरकार
आज गुरुवार को स्वाभिमानी किसान संगठन ने पुणे बेंगलुरु हाइवे पर चक्का जाम कर
आंदोलन करने करी ठानी। आंदोलन शामिल किसानों की संख्या को देखकर कोल्हापुर पुलिस
ने भारी बंदोबस्त तैनात किया है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतारें लगी हुई थी
इसलिए पुलिस ने बाईपास से वाहनों को आगे की ओर भेजने का प्रयास शुरू किया। आंदोलन
स्थल पर स्वाभिमानी किसान संगठन के नेता राजू शेट्टी ने शिरोली पंचगंगा नदी के
ब्रिज पर अनिश्चितकाल तक ठान मारने का निर्णय लिया। जब तक मांगें नहीं मानी जाती
तब तक सड़कें नहीं छोड़ेंगे ऐसा ऐलान किसान नेता राजू शेट्टी ने किया है।
P.M.मतलब पनौती मोदी टिप्पणी राहुल गांधी को पड़ी भारी मिला चुनाव आयोग का कारण बताओं नोटिस....
भाजपा
के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ
निवर्तमान मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की थी। इसके
लिए आयोग को प्रतिनिधिमंडल की ओर से एक पत्र दिया गया था। इस पर आयोग ने राहुल
गांधी को तलब किया है। दरअसल
कांग्रेस के वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी पर तंज
कसते हुए P.M.मतलब पनौती मोदी जैसे अपमानजनक शब्दों
का उपयोग किया था। जिस पर चुनाव
आयोग ने कारण बताओं नोटिस जारी किया। भाजपा की शिकायत के बाद
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के राजस्थान की चुनावी सभा में पीएम मोदी पर दिए
बयान पर
को लेकर तलब किया है। इसे लेकर चुनाव आयोग ने 25 नवम्बर तक राहुल गांधी से छह बजे तक जवाब मांगा है। इस
सप्ताह की शुरुआत में राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने पीएम
मोदी पर तंज कसा था। उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया था। उन्होंने कहा
था कि उनके जाने की वजह से भारत बीते रविवार को ऑस्ट्रेलिया से विश्व कप 2023 का फाइनल मैच हार गया। चुनाव आयोग की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि
यह आरोप लगाए गए हैं कि पीएम को लेकर अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया गया।
Wednesday, November 22, 2023
सक्रिय हुए सटोरिए चुनावी परिणामों पर लगने लगा सट्टा....सट्टा सेंटर से रेट जारी
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव खत्म
हो चुके हैं और अब नतीजे 3 दिसंबर को आने हैं। ऐसे में सटोरियों का सट्टा बाजार गर्म हो गया है
और भाव भी तय हो चुके हैं। रेट मुंबई और इंदौर से संचालित सट्टा सेंटर से जारी हुए
हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम से पहले ही सटोरियों ने कांग्रेस
की जीत का ऐलान कर दिया है। सटोरियों के सियासी गणित के मुताबिक मध्य प्रदेश और
छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मैजिक फिगर आराम से छुएगी। दोनों ही
राज्यों की मतगणना से पहले सटोरियों ने सट्टे की
रेट लिस्ट भी जारी कर दी है।
सटोरियों के मुताबिक मध्य प्रदेश में 116 के मैजिक फिगर में से कांग्रेस पार्टी को 116-119 सीट मिलने का अनुमान है। वहीं छत्तीसगढ़ चुनाव में भी कांग्रेस को 50 से 52 सीटें मिलने का अंदेशा है। बता दें कि देश में चुनाव में भले ही
राजनीतिक विश्लेषकों और जनता की राय मायने रखती हो,लेकिन इससे अलग दुनिया सट्टा
बाजार और उनके सटोरियों की है। जो बाकायदा अपने आंकलनों से चुनाव में पार्टियों की जीत और हार तय कर
देते हैं। मध्य
प्रदेश-छत्तीसगढ़ के सट्टे की रेट लिस्ट,मध्य प्रदेश में नतीजे से पहले सट्टे का भाव- कांग्रेस: 116- 119
सीट (भाव- 75 पैसा) भाजपा: 106-109 सीट (भाव- 1.25 पैसा) छत्तीसगढ़ में सट्टे का भाव- कांग्रेस:
50- 52 सीट (भाव- 85 पैसा)भाजपा: 37-39 सीट (भाव- 1.15 पैसा)।
जैन और हिंदू गाय का मांस मुस्लिम नाम से बेचते हैं,मौलाना खलील उर रहमान नूरी का यूपी सीएम योगी पर हमला
रज़ा अकादमी के मौलाना खलील उर रहमान ने कहा
कि अल कबीर है और अल अरबिया है। यह सब जैन लोगों की कंपनी है। कोई और करता तो उसकी
मॉब लिंचिंग हो जाती है। यह सब मुस्लिम नाम से चल रहे हैं। यह सब देवबंद से ही
सर्टिफिकेट लेते हैं। इनपर कोई एक्शन क्यों नहीं लेते? किस चीज़ का बैन कर
रहे हैं? हमारी थाली में आकर देखोगे क्या खा रहे हैं, हलाल खा रहे हैं या
हराम खा रहे हैं, आपको क्या हक है? आपके बाप का राज है?
आप लोगों को धमका रहे हैं, आपकी गुंडागर्दी
नहीं चलेगी। मौलाना खलील उर रहमान नूरी ने हलाल प्रोडक्ट को
लेकर चल रहे मामले पर कहा कि योगी जी को हर जगह टेरर दिखता है क्योंकि वो खुद एक
दहशतगर्द रह चुके हैं। इस पर कितने मर्डर के केस हैं। बहुत सार जैन और हिंदू गाय
का मांस मुस्लिम नाम से बेचते हैं उन पर कर्रवाई नहीं करेंगे। शरीयत ने हमे हलाल
और हराम की जानकारी दी है, मार्केट में जो कंपनियां बेचती हैं, उनके बहुत से
प्रोडक्ट में हराम चीज़े शामिल हैं तो मुसलमान देखकर खाते हैं। 2014 से यही लोगों को बांट रहे हैं, यह हलाल सर्टिफिकेट
किसको बाटेंगे।
मौलाना ने कहा कि हर किसी को हक है कि उसे जो खाना है, बेचना है, बेचे। जमाने से
दारुल उलूम सर्टिफिकेट दे रहा है। परफ्यूम में अल्कोहल होता है, उसे लगाकर नमाज नहीं
पढ़ सकते हैं। अल्कोहल हमारे धर्म में नजायज है। नेलपॉलिश में हो सकता है, गाय और सुवर की
चर्बी हो वो तो हराम है। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार की मानसिकता ही खराब है।
पब्लिक इसको इस नजरिए से नहीं देखती है। हर चीज पर नहीं आता है हलाल सर्टिफिकेट।
सिर्फ गल्फ देशों में जो जाता है,
उस पर ही सर्टिफिकेट लगता है। भारत में ऐसी कई
कंपनी हैं जो बीफ का एक्सपोर्ट करती हैं। 2024 का मुद्दा बना रहे
हैं। अगर टेरर फंडिंग हो रहा था तो अब तक कहां सो रहे थे। आपकी बड़ी एजेंसियां
कहां थीं। केस तो आप पर चलना चाहिए। जो चाहे वो इस वक्त करें, 2024 के बाद बिस्तर लेकर चले जायेंगे फिर खुद इनकी जांच होगी। उन्होंने कहा
कि हमको हक है हमको हलाल या हराम खाना है तो वो हम देखकर खाएं।
लालू यादव के लड़के9वीं फेल तेजस्वी यादव यही उनकी पहचान....
प्रशांत किशोर ने कहा कि मैंने उनके
क्रिकेट करियर की भी बात कही थी। पत्रकारों से मैंने कहा भी कि उनकी पहचान बस इतनी
है कि वो लालू यादव के लड़के हैं। तेजस्वी यादव ने पढ़ाई के क्षेत्र में, खेलकूद के क्षेत्र
में सामाजिक क्षेत्र में अगर पराक्रम किया है तो बता दें उसको हम लोग सीखकर नोट कर
लेंगे। प्रशांत किशोर ने मधुबनी के झंझारपुर में पत्रकारों से बातचीत में आगे कहा
कि वो लोग खुद उछल रहे हैं कि मैंने उनको अज्ञानी कहा है। मैंने तो बस जनता के
सामने फैक्ट रखा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि मुझे समझ नहीं आ रहा है कि तेजस्वी
यादव इतना क्यों घबरा रहे। पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि मेरे बाबूजी डॉक्टर
थे तो मैं हर रोज
कह रहा हूं कि मेरे बाबूजी डॉक्टर थे और मेरे दादाजी बैलगाड़ी
चलाते थे। उसी तरह से अगर आपके बाबूजी मुख्यमंत्री थे तो आपको बताया जाएगा कि आपके
बाबूजी मुख्यमंत्री थे। यही कारण है कि आप उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए
हैं। इसमें बुरा मानने की क्या बात है। अगर मैं गलत हूं तो वह खंडन कर दें। वह बता
दें कि मैं झूठ फैला रहा हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि तेजस्वी यादव इतना घबरा
क्यों रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा उन पर दिए अपमानजनक बयान पर बुधवार को जवाब देते हुए कहा कि लालू जी के बेटे, उनकी बेटी, उनके नाती, उनके घर पर काम करने वाले लोगों पर अगर मैं बयान पर बयान देने लग जाऊं तब तो हो गया। मेरे ऊपर जिसको जो बयान देना है, दे। मैंने जो बात कही उसे रोज दोहरा रहा हूं। आज भी कह रहा हूं,मैंने ये नहीं कहा है कि तेजस्वी यादव अच्छे हैं, खराब हैं, ज्ञानी हैं या मूर्ख हैं। मैंने बस ये कहा कि उनकी पहचान बस इतनी है कि वो लालू यादव के लड़के हैं। मैंने कहा कि वो 9वीं फेल हैं, अगर वो नहीं हैं तो कैमरे के सामने आकर बोल दें कि PhD किए हुए हैं।
अमेठी में फिर भिड़ेंगे राहुल गांधी और स्मृति ईरानी
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ और
अन्य लोगों के साथ यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने राम मंदिर के उद्घाटन को एक राजनीतिक कार्यक्रम में बदलकर इसे
भुनाने की कोशिश के लिए केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा की आलोचना की।
उन्होंने कहा, राम मंदिर का निर्माण आस्था का विषय है, न कि इसे कोई बड़ा
आयोजन बना दिया जाए। यदि राम के प्रति आस्था हो तो एक दीपक और एक फूल भी पर्याप्त
है। चुनावी वर्ष में लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए भाजपा यह सब कर रही है। राम
सबके हैं, सिर्फ भाजपा के नहीं।
2019
के संसदीय चुनाव में कांग्रेस को यहां शर्मनाक
हार का सामना करना पड़ा था। राहुल गांधी अमेठी सीट पर भाजपा की स्मृति ईरानी से 55,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे। हालांकि, वह केरल की वायनाड
सीट 4.31 लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीते थे और पहली बार दक्षिण भारत
से गहरा नाता जोड़ लिया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में अपने
पिछले अमेठी निर्वाचन क्षेत्र से 2024
का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, एक शीर्ष नेता ने
यहां मंगलवार को यह बात कही। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने दोहराया कि गांधी
परिवार पीढ़ियों से अमेठी के लोगों के लिए बहुत मेहनत करता रहा है और राहुल जी
निश्चित रूप से 2024 के चुनाव में इस सीट से चुनाव लड़ेंगे। यह दूसरी बार है, जब अजय राय ने राहुल गांधी के अपने पुराने गढ़ अमेठी लौटने की संभावना जताई है। इससे
पहले अगस्त में उन्होंने लखनऊ में ऐसा ही बयान दिया था।
Tuesday, November 21, 2023
अभिभावकों का दबाव और गहन प्रतिस्पर्धा बन रही आत्महत्या की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण है... उच्चतम न्यायालय ने दी प्रतिक्रिया
उच्चतम न्यायालय
ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की जिसमें तेजी से बढ़ते कोचिंग
संस्थानों के
विनियमन का अनुरोध किया गया और छात्रों की आत्महत्याओं के आंकड़ों का हवाला दिया
गया। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी की पीठ ने बेबसी व्यक्त की और कहा कि
न्यायपालिका ऐसे परिदृश्य में निर्देश पारित नहीं कर सकती है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की
तैयारी करने वाले बच्चों के बीच गहन प्रतिस्पर्धा और अपने अभिभावकों का दबाव देश भर में आत्महत्या की
बढ़ती संख्या का मुख्य कारण है।
पीठ ने याचिकाकर्ता-मुंबई
के डॉक्टर अनिरुद्ध नारायण मालपानी की ओर से पेश वकील मोहिनी प्रिया से कहा,ये आसान चीजें नहीं हैं। इन सभी घटनाओं के पीछे अभिभावकों का दबाव है। बच्चों से ज्यादा अभिभावक ही उन पर दबाव डाल रहे हैं। ऐसे में अदालत कैसे निर्देश पारित कर सकती है। न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, हालांकि, हममें से ज्यादातर लोग नहीं चाहेंगे कि कोई कोचिंग
संस्थान हो, लेकिन
स्कूलों की स्थितियों को देखें। वहां
कड़ी प्रतिस्पर्धा है और छात्रों के पास इन कोचिंग संस्थानों में जाने के अलावा
कोई अन्य विकल्प नहीं है। पीठ ने कहा कि वह स्थिति के बारे में जानती है,लेकिन
अदालत निर्देश पारित नहीं कर सकती और सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता अपने सुझावों के
साथ सरकार से संपर्क करें। प्रिया ने उचित मंच पर जाने के लिए याचिका वापस लेने का
अनुरोध किया, जिसे
अदालत ने अनुमति दे दी।
प्रिया के माध्यम से मालपानी द्वारा दायर याचिका में कहा
गया कि वह पूरे भारत में तेजी से बढ़ रहे लाभ के भूखे निजी कोचिंग संस्थानों के
संचालन को विनियमित करने के लिए उचित दिशा-निर्देश चाहते हैं जो आईआईटी-जेईई
(भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-संयुक्त प्रवेश परीक्षा) और नीट (राष्ट्रीय पात्रता
सह प्रवेश परीक्षा) जैसी विभिन्न प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान
करते हैं। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को अदालत का रुख करने के लिए मजबूर
होना पड़ा,
क्योंकि हाल के वर्षों में प्रतिवादियों (केंद्र और राज्य सरकारों)
द्वारा विनियमन और निरीक्षण की कमी के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या की है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड
ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2020 के आंकड़ों के आधार पर प्रिया ने देश में छात्रों की
आत्महत्या की संख्या का जिक्र किया।
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