Friday, October 27, 2023

इटली में मौते अधिक बच्चों की पैदाइश कम,पीएम जॉर्जिया मेलोनी इसे नेशनल इमरजेंसी मानने पर मजबूर...

अंग्रेजी न्यूज़ वेबसाइट मीडियम की एक रिपोर्ट के अनुसार, इटली ने बीते दिनों एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। ये वर्ल्ड रिकॉर्ड खुश होने लायक नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक देश तेजी से बूढ़ा हो रहा है। रिपोर्ट की मानें तो इटली में पिछले तीन महीनों के भीतर एक भी बच्चे का जन्म नहीं हुआ है। जबकि रॉयटर्स लिखता है, नेशनल स्टैटिक्स ब्यूरो ISTAT के आंकणों के अनुसार, इटली में जनवरी 2023 से जून 2023 तक जितने बच्चों का जन्म हुआ वो जनवरी 2022 से जून 2022 के बीच जन्में बच्चों की तुलना में 3500 कम हैं। 
इटली का मामला कितना गंभीर है कि वहां की पीएम जॉर्जिया मेलोनी इसे नेशनल इमरजेंसी की तरह देखती हैं। पिछले साल अपने चुनावी अभियान में भी उन्होंने इस मुद्दे को बड़े जोर-शोर से उठाया था। रिपोर्ट्स कहती हैं कि पिछले साल हर सात बच्चों के जन्म पर 12 लोगों की मौत रिकॉर्ड की गई थी। सीधी भाषा में आपको समझाऊं तो वहां अगर एक दिन में सात बच्चों का जन्म हो रहा था तो उसी दिन 12 लोगों की मौत हो रही थी। इसका मतलब कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वहां कि आबादी तेजी से कम हो जाएगी। इटली दुनिया तेजी से बूढ़ी होती जा रही है। चीन, जापान जैसे देश इसका बड़ा उदाहरण हैं। 
अब इटली भी इस लिस्ट में शामिल हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है वहां बच्चों का पैदा ना होना। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इटली में बीते तीन महीनों से किसी भी बच्चे का जन्म नहीं हुआ है। ये परेशानी इतनी बड़ी है कि वहां की पीएम इसे एक नेशनल इमरजेंसी की तरह देखती हैं।  

Thursday, October 26, 2023

खुद का है संविधान तीन बार हुए बैन, कौन है RSS…? देश भर में 1 करोड़ से ज्यादा है सदस्य....

कांग्रेस से अलग होकर साल 1925 में केशव बलिराम हेडगवार ने प्रथम विश्व युद्ध में बनी यूरोपियन राइट-विंग की तरह एक संगठन की स्थापना की। इसका नाम रखा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जो बाद में संघ के नाम से ज्यादा चर्चित हुआ। संघ पर शोध कर चुके विदेशी लेखक वाल्टर एंडरसन के मुताबिक दिसंबर 1920 में ही हेडगवार ने आरएसएस की परिकल्पना की थी। दरअसल, 1920 में नागपुर में ही कांग्रेस कार्यसमिति का वार्षिक अधिवेशन हुआ था। हेडगेवार ने इसका विरोध किया और कुछ युवकों के साथ अलग से कार्यक्रम आयोजित करवाए। इसमें शामिल होने वाले अधिकांश ब्राह्मण युवक थे। हेडगेवार का मानना था कि जब तक देश का हिंदू (बहुसंख्यक) 
एकजुट नहीं होगा, तब तक आजादी का कोई ज्यादा मतलब नहीं है। वे अक्सर कहते थे,भले ही अंग्रेज चले जाएं, जब तक हिंदू एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में संगठित नहीं होंगे, इसकी क्या गारंटी है कि हम अपनी स्वतंत्रता की रक्षा कर पाएंगे? शुरू में संगठन का काम सिर्फ नागपुर में संचलित होता था। यहां हेडगेवार के नेतृत्व में कुछ युवक सुबह शाखा लगाते थे और शाम को लोगों को जागरूक करते थे। धीरे-धीरे संघ का विस्तार नागपुर के आसपास के इलाकों में भी होने लगा। संघ का शुरुआती मिशन भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की थी, जिसे 1947 के बाद बदला गया। संघ के संविधान के मुताबिक यह संगठन हिंदुओं को एकजुट करेगा और उन्नत राष्ट्र बनाने के लिए काम करेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दशहरा 2023 को अपना 98 साल पूरा कर लिया है। 1925 में गठित आरएसएस के देश भर में 1 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं। 

स्थापना के बाद से कई बार विवादों रहने वाले इस संगठन पर 3 बार बैन भी लग चुका है। पहली बार बैन महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगा था। उस वक्त केंद्र सरकार को शक था कि गांधी की हत्या के पीछे आरएसएस की साजिश है। पहली बार संघ प्रमुख समेत संगठन के बड़े नेताओं को जेल भेजा गया था। दूसरी बार आपातकाल के दौरान संघ पर बैन लगा। संघ के सभी कार्यकर्ताओं को मीसा कानून के तहत जेल भेजा गया। तीसरी बार 1992 में संघ पर बैन लगा और इस बार आरएसएस पर द्वेष फैलाने का आरोप था। हालांकि, इस बार बैन की मियाद सिर्फ 6 महीने की थी। संघ का अपना संविधान भी है, जो 1949 में बनाया गया था। 




इस संविधान में कुल 25 अनुच्छेद हैं, जिसके हिसाब से संघ अपने कामकाज को संचलित करता है। संघ की पूरी इकॉनोमी चंदा और उपहार के सहारे है. संगठन के संविधान के मुताबिक संघ से जुड़े किसी भी ब्रांच या व्यक्ति को अगर कोई दान या उपहार मिलता है, तो वह संघ के फंड में जाएगा। संघ में फंड मैनेजमेंट का काम प्रांत स्तर पर संघचालक और निधि प्रमुख का होता है। हालांकि, संघ अपने आय और व्यय को सार्वजनिक नहीं करता है। कोरोना के वक्त संघ के इनकम पर विवाद भी हुआ था। नागपुर के एक कार्यकर्ता ने ईडी से शिकायत की थी कि आरएसएस न तो कोई ट्रस्ट है और न ही एनजीओ, तो फिर इसके पास लाखों-करोड़ों रुपए कहां से आए?हालांकि, यह मामला ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाया। शाखा के सदस्यों को स्वयंसेवक कहा जाता है। 
18 साल से अधिक उम्र के कोई भी व्यक्ति स्वयंसेवक बन सकता है। संघ का सभी बड़े फैसले केंद्रीय कार्यकारिणी मंडल और अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में लिया जाता है। इस फैसले को जमीन पर उतारने का काम प्रचारकों का होता है। प्रचारक प्रांतीय सभा के जरिए शाखा से संपर्क साधकर लोगों तक अपना संदेश पहुंचाते हैं। शारीरिक क्रियान्वयन के अलावा संघ शैक्षणिक क्रियाकलाप के जरिए भी लोगों तक अपनी पहुंच बनाता है। इसके लिए संघ देश के कई हिस्सों में सरस्वती विद्या मंदिर जैसे छोटी पाठशालाएं संचलित करता है। इन पाठशालाओं में संघ के पदाधिकारी ही पढ़ाते हैं। विश्व संवाद केंद्र के जरिए संघ अपना विचार बौद्धिक जगत के लोगों तक पहुंचाता है। यह केंद्र देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित है।
 
 

राशन वितरण घोटाला ममता बनर्जी के मंत्री पर ED रेड....

प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि निदेशालय के अधिकारियों ने केंद्रीय बलों की एक टीम के सहयोग से कोलकाता साल्ट लेक इलाके में ने पश्चिम बंगाल के राज्य वन मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक के दो फ्लैट पर छापा मारा। उन्होंने बताया कि मल्लिक के पूर्व निजी सहायक के मकानों समेत आठ अन्य फ्लैट पर भी छापा मारा गया। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा,छापेमारी के दौरान मंत्री वहां नहीं थे। वह बाद में आए और उनका फोन ले लिया गया है। फ्लैट के अंदर आठ अधिकारी हैं। हम उनके पूर्व निजी सहायक 
के दमदम स्थित आवास और कुछ अन्य स्थानों पर भी तलाशी ले रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी पहले ही एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसके सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मलिक के साथ कथित तौर पर करीबी संबंध है। गौरतलब है की पश्चिम बंगाल में राशन वितरण घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशायल ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की टीम ने पश्चिम बंगाल के मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक के ठिकानों पर आज रेड मारी है। यह बड़ी कार्रवाई PMLA के तहत की गई। ED की टीम ने इसी मामले में पिछले हफ्ते कारोबारी बकीबुर रहमान को गिरफ्तार किया था। बकीबुर रहमान ममता बनर्जी के मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का बेहद करीबी है। ईडी की टीम ने ममता के मंत्री के आवास पर जाकर तलाशी भी ली।

37,000 से अधिक गर्भवती महिलाएं बिना चिकित्सा सुविधा बच्चो को जन्म देने के लिए मजबूर गाजा पर गिरी इजरायल और हमास की गाज से

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनपीएफ) के अनुसार, गाजा के युद्धग्रस्त क्षेत्र में करीब 50,000 गर्भवती महिलाएं हैं, जिनमें से कई नियमित जांच और उपचार की कमी से पीड़ित हैं। अल-बारबरी कहती हैं,बच्चों के घरों के मलबे के नीचे या चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती होने की तस्वीरें मुझे मेरे बच्चे के लिए बहुत डरा देती हैं मैं रोज अपने बच्चे को इन मिसाइलों से बचाने के लिए युद्ध समाप्त होने की प्रार्थना करती हूं। खान यूनिस में नासिर मेडिकल कॉम्प्लेक्स में प्रसूति और स्त्री रोग विज्ञान में एक चिकित्सा सलाहकार, वालिद अबू हताब के अनुसार, विस्थापन की वजह से स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच बहुत मुश्किल हो गई है। फलस्तीनी परिवार नियोजन और संरक्षण 
संघ के अनुसार, आने वाले महीनों में गाजा में 37,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं को बिना बिजली या चिकित्सा आपूर्ति के बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर किया जाएगा, जिससे आपातकालीन प्रसूति सेवाओं तक पहुंच के बिना जीवन-घातक जटिलताओं का खतरा होगा। अबू हताब ने कहा,मुझे गर्भवती महिलाओं के दर्जनों कॉल आए, जिनमें उन्होंने बताया कि वे इंसुलिन और हृदय रोग से पीड़ित हैं और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।





स्वास्थ्य देखभाल और उपचार तक पहुंच की कमी उनके जीवन को खतरे में डालती है और मृत्यु का कारण बन सकती है। इस बीच कैंप में कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं, जो कई दर्दनाक आईवीएफ चक्रों के बाद गर्भवती हुईं, अब उन्हें चिंता है कि उनका गर्भपात हो जाएगा। 30 साल की लैला बराका, दूसरे बच्चे के लिए वर्षों की कोशिश के बाद आईवीएफ के जरिये गर्भ धारण करने में सफल रही। वह तीन महीने की गर्भवती है। वह कहती हैं पूरे दिन और रात मैं बम धमाकों की आवाज से डरती हूं।  मैं अपने पांच साल के बेटे को गले लगाती हूं और अपने डर को निगलने की कोशिश करती हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाती। हम जो सुनते हैं वह सिर्फ इंसानों को ही नहीं बल्कि पत्थरों को भी भयभीत कर सकता है। इजरायल और हमास के बीच गाजा में चल रहे युद्ध की दो तस्वीरें हैं। एक वो जिसमें हम सिर्फ मौत देख रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर है वो जिसमें लोग भूख, प्यास और मूलभूत सुविधाओं के अभाव में तड़प रहे हैं।  लाखों लोग राहत शिविरों में इस तरह की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
 
 

रेलवे का दीपावली-छठ पूजा पर 283 अतिरिक्त स्पेशन ट्रेने चलाने का एकलं ऐलान...

रेल मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में कहा, दिल्ली-पटना, दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा, दानापुर-सहरसा, दानापुर-बेंगलुरु, अंबाला-सहरसा, मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर, पुरी-पटना, ओखा-नाहरलागुन, सियालदह-न्यू जलपाईगुड़ी, कोचुवेली-बेंगलुरु, बनारस-मुंबई, हावड़ा-रक्सौल आदि जैसे रेलवे मार्गों पर देश भर के प्रमुख स्थलों को जोड़ने के लिए विशेष ट्रेनों की योजना बनाई गई है। अनारक्षित कोचों में यात्रियों के व्यवस्थित प्रवेश के लिए RPF कर्मचारियों की देखरेख में टर्मिनस स्टेशनों पर कतारें बनाकर भीड़-कंट्रोल करने के उपाय 
सुनिश्चित किए जा रहे हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए और यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए छठ पूजा  तक 283 स्पेशल ट्रेनें चला रहा है। रेल मंत्रालय ने आगे कहा,पैसेंजर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त आरपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया है। ट्रेनों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर अधिकारियों को आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात किया गया है। 





प्राथमिकता के आधार पर ट्रेन सेवा में किसी भी व्यवधान से निपटने के लिए विभिन्न अनुभागों में कर्मचारियों को तैनात किया गया है। रेल मंत्रालय ने कहा, सुरक्षा और सतर्कता विभाग के कर्मचारियों द्वारा किसी भी कदाचार पर कड़ी नजर रखी जा रही है। वेटिंग हॉल, रिटायरिंग रूम, विशेष रूप से प्लेटफार्मों और सामान्य तौर पर स्टेशनों पर सफाई बनाए रखने के निर्देश जोनल मुख्यालय द्वारा दिए गए हैं। प्लेटफॉर्म नंबरों के साथ ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान की लगातार और समय पर घोषणा के लिए उपाय किए गए हैं।  महत्वपूर्ण स्टेशनों पर मे आई हेल्प यू बूथ चालू रखे गए हैं जहां यात्रियों की उचित सहायता और मार्गदर्शन के लिए आरपीएफ कार्मिक और टीटीई तैनात हैं। मेडिकल टीमें कॉल पर प्रमुख स्टेशनों पर उपलब्ध हैं। पैरामेडिकल टीम के साथ एम्बुलेंस भी उपलब्ध है।

घटता भूजल मानव जीवन पर गंभीर संकट होने का अनुमान....

भारत दुनिया में भूजल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है, जो अमेरिका और चीन के संयुक्त उपयोग से अधिक है। भारत का उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र देश की बढ़ती 1.4 अरब आबादी के लिए रोटी की टोकरी के रूप में कार्य करता है, जिसमें पंजाब और हरियाणा राज्य देश में चावल उत्पादन का 50 प्रतिशत और 85 प्रतिशत गेहूं भंडार का उत्पादन करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है,पंजाब में 78 प्रतिशत कुओं को अतिदोहित माना जाता है और पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 2025 तक गंभीर रूप से कम भूजल उपलब्धता का अनुभव होने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र की एक नयी रिपोर्ट के अनुसार भारत में सिंधु-गंगा के मैदान के कुछ क्षेत्र पहले ही भूजल की कमी के खतरनाक बिंदु को 
पार कर चुके हैं और पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में साल 2025 तक कम भूजल उपलब्धता का गंभीर संकट होने का अनुमान है। इंटरकनेक्टेड डिजास्टर रिस्क रिपोर्ट 2023 शीर्षक से संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय-पर्यावरण और मानव सुरक्षा संस्थान (यूएनयू-ईएचएस) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि दुनिया पर्यावरणीय रूप से छह महत्वपूर्ण बिंदुओं के करीब पहुंच रही है। तेजी से विलुप्त होने, भूजल की कमी, पर्वतीय ग्लेशियर का पिघलना, अंतरिक्ष मलबा, असहनीय गर्मी और अनिश्चित भविष्य। 



पर्यावरणीय रूप से चरम बिंदु पृथ्वी की प्रणालियों में महत्वपूर्ण सीमाएं हैं, जिसके परे अचानक और अक्सर अपरिवर्तनीय बदलाव होते हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र, जलवायु के पैटर्न और समग्र पर्यावरण में गहरा और कभी-कभी विनाशकारी बदलाव होता है। भूमिगत जलस्रोत अपर्याप्त होने की स्थिति में अक्सर कृषि के लिए लगभग 70 प्रतिशत भूजल निकासी का उपयोग किया जाता है। सूखे के कारण होने वाले कृषि नुकसान को कम करने में ये भूमिगत जल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  जलवायु परिवर्तन के कारण यह चुनौती और भी बदतर होने की आशंका है। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भूमिगत जल स्रोत खुद अपने चरम बिंदु पर पहुंच रहे हैं। 
दुनिया के आधे से अधिक प्रमुख भूमिगत जल स्रोत प्राकृतिक रूप से फिर से भरने के बजाय तेजी से कम हो रहे हैं। कुओं में जिस भूमिगत जलस्तर से पानी आता है अगर पानी उस भूमिगत जलस्तर से नीचे चला जाता है तो किसान पानी तक पहुंच खो सकते हैं, जिससे संपूर्ण खाद्य उत्पादन प्रणालियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब जैसे कुछ देश पहले ही भूजल जोखिम चरम बिंदु को पार कर चुके हैं, जबकि भारत समेत अन्य देश इससे ज्यादा दूर नहीं हैं।

Wednesday, October 25, 2023

सत्ता के लिए हमास, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों को गले लगा सकते है उद्धव ठाकरे, MH-CM एकनाथ शिंदे

आजाद मैदान में शिव सेना की दशहरा रैली में विशाल सभा को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को दफन कर दिया तथा कांग्रेस और समाजवादी दलों से हाथ मिला लियाशिंदे ने ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि उन्होंने अपनी वैचारिक विरासत के साथ बेईमानी करके बाल ठाकरे की पीठ में छुरा घोंपा हैशिंदे ने कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर वे (शिवसेना-यूबीटी) असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के साथ गठबंधन कर लें और वे अपने स्वार्थी उद्देश्यों और कुर्सी (सत्ता) के लिए हमास, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों को गले लगा लें। 
विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि लोग 2024 के चुनावों में दस सिर वाले इंडिया गठबंधन रावण को दफना देंगे।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अगले साल लगातार तीसरी बार सत्ता में आएंगे और हम उनका हाथ मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र से 45 सांसद भेजेंगे। महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीट है। शिंदे ने कहा कि यह मोदी ही थे जिन्होंने अनुच्छेद 370 हटाकर और राम मंदिर निर्माण के जरिए बाल ठाकरे के सपनों को पूरा किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है जो कानूनी जांच में खरा उतरेगा। साथ ही, उन्होंने युवाओं से आत्महत्या जैसे कदम नहीं उठाने की अपील की।
शिंदे ने कहा,आपने सत्ता के लिए कांग्रेस और समाजवादियों के साथ जाकर बाला साहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा को दफन कर दिया। बाला साहेब ने शिवतीर्थ (शिवाजी पार्क मैदान) से गर्व से कहो हम हिंदू हैं का नारा दिया था, लेकिन उस स्थान से गर्व से कहो हम कांग्रेसी और समाजवादी हैं जैसे नारे दिए जा रहे हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने दादर के शिवाजी पार्क मैदान पर पारंपरिक वार्षिक दशहरा रैली का आयोजन किया। शिंदे ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे 2004 से ही मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए थे, लेकिन बात नहीं बनी। शिंदे ने दावा किया, उनकी (उद्धव की) इच्छा 2004 से ही मुख्यमंत्री बनने की थी लेकिन जुगाड़ काम नहीं आया।  





उन्होंने दिखावा किया कि उनकी इस पद में कभी दिलचस्पी नहीं रही है। सार्वजनिक रूप से कहा गया कि उन्होंने शरद पवार की सलाह पर (2019 विधानसभा चुनाव के बाद) जिम्मेदारी स्वीकार की।

ब्यूटी पार्लर जैसे फेस पैक बनाए घर पर जाने कैसे....?

आपको पार्लर से किसी तरह के फेशियल कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी और मिनटों में ही त्वचा घर बैठे-बैठे ही चमक जाएगी। ऑयली स्किन से परेशान लोग इस फेस पैक को लगाकर देखें।  चेहरे से चिकनाहट हटाने में यह फेस पैक बेहद असरदार है। आपको करना बस इतना है कि जरूरत के अनुसार बेसन लेकर इसमें गुलाबजल मिलाना है और मुलायम पेस्ट बना लेना है।  इस फेस पैक को कुछ देर चेहरे पर लगाए रखने के बाद चेहरा धोकर साफ करें। त्वचा निखर उठेगी और चिपचिपी भी नहीं दिखेगी। बेसन में त्वचा से डेड स्किन सेल्स हटाने, चेहरा निखारने और टैनिंग कम करने के गुण पाए जाते हैं जो महंगी क्रीम से भी नहीं हो पाता। बस सही तरह से 


बेसन का इस्तेमाल किया जाए। बेसन और मलाई इस फेस पैक को बनाने के लिए आपको बेसन, नींबू और दूध की मलाई की जरूरत होगी। सबसे पहले एक कटोरी में 2 चम्मच भरकर बेसन ले लें। इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की डालें और एक चम्मच भरकर मलाई मिला लें। पेस्ट बहुत गाढ़ा ना हो इसके लिए पानी या दूध डालकर अच्छे से मिलाएं। बस तैयार है आपका फेस पैक,चेहरे पर 15 से 20 मिनट इस फेस पैक को लगाए रखने के बाद चेहरा धोकर साफ कर लें। बेसन और शहद एक्ने और फुंसियों वाली त्वचा के लिए यह फेस पैक भी अच्छा रहेगा। इस फेस पैक से त्वचा को जरूरी नमी भी मिल जाती है। फेस पैक बनाने के लिए 2 चम्मच बेसन में एक चम्मच शहद मिलाएं। पेस्ट ज्यादा गाढ़ा हो तो शहद की मात्रा बढ़ा सकते हैं।
इस तैयार फेस पैक को चेहरे पर 20 मिनट लगाकर रखने के बाद धोकर हटा लें। हफ्ते में एक बार इस फेस पैक को लगाया जा सकता है। बेसन और हल्दी फुंसियों और एक्ने वाली स्किन के लिए बेसन का यह फेस पैक बेहद अच्छा साबित होता है। इस फेस पैक को बनाने के लिए 2 चम्मच बेसन में आधा चम्मच हल्दी मिलाएं और पानी डालकर पेस्ट तैयार करें। इसे 15 मिनट चेहरे पर लगाए रखने के बाद धो लें। चेहरे पर सुनहरा निखार तो आएगा ही, साथ ही स्किन पर ब्रेकआउट्स नहीं होंगे और दाने नजर नहीं आएंगे।  

एक दाग ने धकेल मंदाकिनी को शोहरत की बुलंदियों से गुमनामी के अंधेरे में....

रिपोर्ट्स के मुताबिक जब बॉलीवुड के शोमैन डायरेक्टर और एक्टर राज कपूर ने पहली बार मंदाकिनी को देखा था तो वह महज 22 साल की थीं। राज कपूर ने जैसे ही मंदाकिनी को देखा उन्होंने मन बना लिया था कि वह उन्हें अपनी फिल्म की हीरोइन बनाएंगे। इसके बाद राज कपूर ने मंदाकिनी को अपनी फिल्म राम तेरी गंगा मैली की हीरोइन बनाया। राज कपूर ने ही एक्ट्रेस का नाम यास्मीन से बदलकर मंदाकिनी रखा था। 1985 में रिलीज हुई राज कपूर की ब्लॉकबस्टर फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी ने गंगा का किरदार निभाया था। एक्ट्रेसेज कम उम्र में ही नाम और शोहरत कमाने में सफल रहीं। 1985 में अपनी एक ही फिल्म से धमाल मचा दिया और 
रातों-रात सुपरस्टार बन गई लेकिन उस एक्ट्रेस पर एक दाग लगा और इस वजह से उसका करियर हमेशा के लिए खत्म हो गया। मंदाकिनी ने अपनी बोल्ड पर्सनैलिटी से सभी को हैरान कर दिया था। फिल्म में झरने का सीन उस वक्त काफी कंट्रोवर्सी में  रहा। फिल्म ने कई अवॉर्ड भी जीते। इस फिल्म से मंदाकिनी रातों-रात स्टार बन गईं और उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। मंदाकिनी का करियर बहुत अच्छा चल रहा था,लेकिन उनका नाम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ जुड़ने के बाद ट्रैक से उतरता गया।
हालांकि मंदाकिनी ने इस दावे का जोरदार खंडन किया। यही एक दाग जो मंदाकिनी के करियर के चरम पर की थी जो नासूर बना और इससे उनका पूरा करियर बर्बाद हो गया। बॉलीवुड छोड़ने के बाद मंदाकिनी ने पूर्व बौद्ध भिक्षु डॉ.काग्यूर टी.रिनपोचे ठाकुर से शादी कर ली और बौद्ध धर्म अपना लिया। इनका एक बेटा रब्बिल और एक बेटी रब्ज इनाया है।

Tuesday, October 24, 2023

मणिपुर में हिंसा किसने कराई संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कही बात....

 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ चीफ मोहन भागवत ने नागपुर में आयोजित विजयदशमी उत्सव पर लोगों से देश की एकता, अखंडता, पहचान और विकास को ध्यान में रखते हुए मतदान करने का आह्वान किया। उन्होंने इस दौरान जी-20 सम्मेलन का भी जिक्र किया। मोहन भागवत ने कहा कि भारत में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों ने हमारे देश की विविधता में एकता का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि समस्याओं को सुलझाने के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा पर पूछा कि क्या हिंसा में सीमा पार के उग्रवादी शामिल थे। नागपुर में आरएसएस की दशहरा रैली को 
संबोधित करते हुए भागवत ने कहा,मेइती और कुकी समुदाय के लोग कई वर्षों से साथ रहते आ रहे हैं। अचानक उनके बीच हिंसा कैसे भड़क गई? संघर्ष से बाहरी ताकतों को फायदा होता है। क्या बाहरी कारक शामिल हैं? उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन तक मणिपुर में थे। वास्तव में संघर्ष को किसने बढ़ावा दिया? यह हिंसा हो नहीं रही है, इसे कराया जा रहा है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि उन्हें संघ के उन कार्यकर्ताओं पर गर्व है, जिन्होंने मणिपुर में शांति बहाल करने की दिशा में काम किया।
भागवत ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व खुद को सांस्कृतिक मार्क्सवादी या जाग्रत कहते हैं,लेकिन वे मार्क्स को भूल गए हैं। उन्होंने लोगों को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भावनाएं भड़काकर वोट हासिल करने की कोशिशों के प्रति आगाह किया।

इंदिरा गांधी ने क्यू कहा मेरा तीसरा बेटा है कमलनाथ....?

मध्य प्रदेश की राजनीति में आज एक बड़ा चेहरा बन चुके कमलनाथ का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई दून स्कूल से हुई जहां इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी भी पढ़ते थे।स्कूल में ही कमलनाथ और संजय गांधी अच्छे दोस्त बने। स्कूल के बाद कमलनाथ कोलकाता चले गए जहां सेंट जेवियर कॉलेज से उन्होंने बी.कॉम किया। 27 जनवरी 1973 को अलका नाथ से उनकी शादी हुई और आज कमलनाथ के दो बेटे हैं जिसमें से बड़ा बेटा नकुलनाथ उनके साथ राजनीति में सक्रिय है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से 9 बार लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन चुके हैं। 1980 में उन्होंने पहली बार यहां जीत दर्ज की थी। तब उनकी उम्र सिर्फ 34 साल थी। 1997 के उपचुनाव को अगर छोड़ दें तो छिंदवाड़ा जीत का दूसरा नाम कमलनाथ हैं। 1984, 1989, 
1991 में उन्होंने लगातार तीन बार चुनाव जीता। 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी यहां कमलनाथ को ही जीत मिली। केंद्र में जब भी कांग्रेस की सरकार रही कमलनाथ को कैबिनेट में जगह मिली। उन्हें पर्यावरण, कपड़ा, वाणिज्य और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारियां मिलीं। अपने शुरुआती दिनों में एक बार जब कमलनाथ छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे तब इंदिरा गांधी उनके लिए प्रचार करने क्षेत्र में आई थीं। 
उन्होंने जनता से वोटों की अपील करते हुए कहा कि कमलनाथ उनके तीसरे बेटे जैसे हैं। स्कूल में संजय गांधी से हुई दोस्ती ने कमलनाथ के राजनीतिक करियर की नींव रखी। उन्हें गांधी परिवार के करीबी लोगों में गिना जाता है जो हर संकट की घड़ी में कांग्रेस के साथ खड़े रहे। इमरजेंसी जब खत्म हुई तो कांग्रेस एक बुरे वक्त से गुजर रही थी। प्लेन हादसे में संजय गांधी का निधन हो गया, इंदिरा गांधी पर बढ़ती उम्र का असर दिखने लगा था और एकजुट विपक्ष के सामने कांग्रेस कमजोर पड़ती दिखाई दे रही थी। ऐसे वक्त में गांधी परिवार के करीबी कमलनाथ लगातार मेहनत कर रहे थे और पार्टी के साथ खड़े थे। लिहाजा इनाम में इंदिरा गांधी ने उन्हें छिंदवाड़ा से लोकसभा का टिकट दे दिया और इस तरह कमलनाथ का राजनीतिक सफर शुरू हो गया। साल 2018 में जब कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो वह देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री बन गए। 
दिसंबर 2018 को उन्होंने प्रदेश के 31वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली,लेकिन 15 साल बाद जो सत्ता हाथ लगी थी वह महज 15 महीने ही चल पाई और एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान बने। कमलनाथ और उनके परिवार के नाम पर कुल 23 कंपनियां और ट्रस्ट रजिस्टर्ड हैं. उनके पास छिंदवाड़ा जिले में करीब 63 एकड़ जमीन भी है। इसमें 7.09 करोड़ रुपए की चल और 181 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति शामिल है। 

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...