Saturday, May 4, 2019

सोमवार को होने वाले पांचवें चरण का चुनाव प्रचार खत्‍म....दिग्गजों का भाग्य होगा EVM में कैद....


2019 लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में उत्तर प्रदेश में चुनावी प्रचार गाड़ी के पहिये आज थम गए। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह BJP के उम्मीदवार के रूप में एक बार फिर लखनऊ लोकसभा सीट से मैदान में हैं। उनका मुकाबला सपा-बसपा गठबंधन की उम्मीदवार पूनम सिन्हा और कांग्रेस उम्मीदवार कलकी पीठ के महंत आचार्य प्रमोद कृष्णम से है। पिछली बार राजनाथ ने यहां से लगभग दो लाख 72 हजार मतों से जीत हासिल की थी। इस बार उनके सामने अपना मार्जिन बरकार रखने की चुनौती है। करीब तीन दशकों से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। 1991 से भाजपा यहां से लगातार जीत रही है। पांचवें चरण के लिए प्रचार शनिवार शाम पांच बजे थम गया। इस चरण में 7 राज्‍यों की 51 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
 इसमें मप्र की 7, राजस्‍थान की 12, यूपी की 14, बंगाल की 7, बिहार की 5, जम्‍मू कश्‍मीर की 2, झारखंड की 4 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इनमें केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शामिल हैं। गांधी परिवार की परंपरागत सीट रायबरेली और अमेठी में परिणाम बदलने के कम ही आसार हैं। रायबरेली से सोनिया गांधी पांचवीं बार चुनाव मैदान में हैं। यहां से भाजपा ने पुराने कांग्रेसी एमएलसी दिनेश सिंह को उनके खिलाफ चुनावी रण में उतारा है।
दूसरी तरफ राहुल की ओर से कांग्रेस की स्टार प्रचारक और उनकी बहन प्रियंका गांधी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी लगातार अमेठी में प्रचार कर रहे हैं। प्रियंका ने अपने रोडशो और नुक्कड़ सभाओं में स्मृति ईरानी को बाहरी बताया है। वैसे यहां पर सपा-बसपा गठबंधन ने कांग्रेस के समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है, जिसे कांग्रेस अपना प्लस पॉइंट मान रही है। इसके अलावा राजनीति से उभरे वीपी सिंह के संसदीय क्षेत्र फतेहपुर में भाजपा के लिए लड़ाई कठिन दिख रही है। 
यहां गठबन्धन से बसपा ने सुखदेव प्रसाद वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। पुराने सपाई राकेश सचान इस बार कांग्रेस से चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा उम्मीदवार साध्वी निरंजन ज्योति के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।

निर्माणाधीन मकानों पर पांच फीसदी की जीएसटी, 18 फीसदी जीएसटी वसूलने वाले बिल्डरो पर लगेगी लगाम...


पश्चिम बंगाल में अथॉरिटी ऑन अडवांस रूलिंग (AAR) ने अपने फैसले में कहा है कि अपार्टमेंट में प्रेफरेंशियल लोकेशन और कार पार्किंग जैसी सुविधाओं को कंपोजिट कंस्ट्रक्शन सर्विस ही माना जाएगा और इनपर भी जीएसटी की वही दर लगेगी, जो मकान पर लागू हो रही है। इस फैसले के बाद अब बिल्डरों को किफायती मकानों से जुड़ी सेवाओं पर पांच फीसदी जीएसटी और अन्य मकानों के लिए आठ फीसदी जीएसटी वसूलना होगा। शीर्ष बिल्डरों सहित कई बिल्डर इन सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी वसूल रहे थे, जबकि केंद्र सरकार निर्माणाधीन मकानों पर लगने वाली जीएसटी दर को कम कर चुकी है। 
कंसल्टिंग फर्म केपीएमजी में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा, प्रेफरेंशियल लोकेशन चार्जेज (PLC), पार्किंग चार्जेज, ट्रांसफर फीस, एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज, इंटरनल डेवलपमेंट चार्जेज (IDC), डॉक्युमेंट चार्जेज जैसे एंसीलरी चार्जेज पहले के सर्विस टैक्स की व्यवस्था में भी विवाद के मुद्दे थे। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि इस तरह की सुविधाओं पर भी कम टैक्स लगेगा और उसकी दर वही होगी, जो मकान पर लागू होती है। उन्होंने कहा, प्रेफरेंशियल चार्जेज, राइट टु यूज कार पार्किंग इत्यादि पर लगने वाले टैक्स पर पहले बहुत गोरखधंधा होता था, लेकिन अब संशय दूर हो गया है। 
निर्माणाधीन मकानों के मामले में ऐसी सुविधाओं पर पांच फीसदी की जीएसटी लगेगी। केंद्र सरकार द्वारा निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की एक दर तय करने के बावजूद बिल्डरों द्वारा विभिन्न सुविधाओं पर अलग-अलग जीसटी दर वसूलने पर GST प्राधिकार ने लगाम कस दिया है।

Friday, May 3, 2019

भारत ‘स्नेक’ से आगे बढ़ चुका है और अब ‘माउस’ थामकर आगे बढ़ रहा है.... PM मोदी का प्रियंका गांधी पर तंज


  कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी गुरुवार (2 मई) को अपनी मां सोनिया गांधी के लोकसभा चुनाव क्षेत्र में सपेरों की बस्ती में पहुंची और एक सांप को अपने हाथों से पकड़ लिया था। प्रियंका का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खासा शेयर किया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, वो ये भूल रहे हैं कि भारत स्नेक से आगे बढ़ चुका है और अब माउस थामकर आगे बढ़ रहा है। भारत का नौजवान, अब कंप्यूटर-माउस- इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से पूरी दुनिया को दिशा दिखा रहा है। पीएम मोदी ने कहा, एक दौर था जब कांग्रेस के नामदार विदेशी मेहमानों के सामने सांप-नेवलों को नचाकर खुश हुआ करते थे। पूरी दुनिया ये देखकर कहती थी कि भारत तो सिर्फ सांप-नेवलों का देश है। 
चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, अब आज नामदार परिवार की चौथी पीढ़ी भी यही काम कर रही है। ये चौथी पीड़ी आज भी सांप-सपेरों के खेल दिखा कर वोट मांग रही है। पीएम मोदी ने कहा कि जब मज़बूत सरकार होती है तब भारत का पानी भारत के ही काम आए, ये प्रबंध किया जाता है। वरना कांग्रेस की सरकारों ने दशकों तक शासन चलाया। भारत के हक का पानी पाकिस्तान जाता रहा लेकिन हमारा बीकानेर और राजस्थान बूंद-बूंद के लिए तरसता रहा।  
पीएम मोदी ने कहा, जो पाकिस्तान हमारा खून बहाए, हम अपना पानी बहाकर उसे दे सकते हैं क्या? जो पाकिस्तान भारत को हजारों घाव देने के सपने पाले, उसे हजारों लीटर पानी देने क्या सही था? वो भी तब जब उस पानी से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों की प्यास बुझ सकती है। उन्होंने कहा भारत की गूंज आज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है। आपके इस चौकीदार ने भारत के पानी और आतंकी कारस्तानी दोनों को ही रोकने का काम किया है।

90 दिन के भीतर चुनावी रैलियों के खर्च की जानकारी दे ने MNS प्रमुख राज ठाकरे.... चुनाव आयोग


 महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [एमएनएस] लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रही है। इसके बावजूद राज ठाकरे ने बीते महीने महाराष्ट्र में नौ रैलियां कीं। इनमें उन्होंने केन्द्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा और लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के लिये वोट नहीं देने की अपील  की। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से उसके अध्यक्ष राज ठाकरे की चुनावी रैलियों के खर्च के बारे में 90 दिन के भीतर जानकारी देने के लिए कहा है। 
चुनाव अधिकारी ने कहा कि बीजेपी ने शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की थी कि एमएनएस की रैलियों के खर्च को उन नौ लोकसभा क्षेत्रों के विपक्षी पार्टी के उम्मीदवारों के खातों में दिखाया जाना चाहिए, जहां राज ठाकरे ने रैलियां कीं।  इसके बाद चुनाव आयोग से सलाह मशविरा कर एमएनएस को नोटिस जारी किया गया। अधिकारी ने कहा, हमने शिकायत के संबंध में सलाह मांगी। 
हमें बताया गया कि एमएनएस एक पंजीकृत राजनीतिक दल है और उसे अपनी चुनावी रैलियों पर हुए खर्च की जानकारी देनी चाहिए। जिन इलाकों में रैलियां की गईं, वहां के जिला कलेक्टरों के जरिए राज ठाकरे को नोटिस भेजे जा रहे हैं।  अधिकारी ने कहा कि यह नियमित प्रक्रिया है और सभी राष्ट्रीय, राज्य और पंजीकृत दलों को अपने खातों का विवरण देना होता है।

बाजार में धड़ल्ले से बिक रही दूध की बोतल और सिपर बच्चों के लिए घातक.....?


देश के अलग-अलग राज्यों में बिक रही बच्चों की दूध की बोतल और सिपर में खतनाक केमिकल होता है। एक रिसर्च से यह बात सामने आई है। भले ही आप बच्चे की सेहत के लिए हर छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रख रही हो,लेकिन आपको बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा सजग रहना जरूरी है। हाल में ही हुई एक रिसर्च ने सभी को सकते में डाल दिया है। रिसर्च से साफ हुआ है कि छोटे बच्चों के दूध की बोतल और सिपर कप में रसायन की मात्रा मिल रही है, जो की जानलेवा है। खास किस्म का रसायन बिस्फेनॉल-ए। बच्चों की दूध की बोतल में शोध के दौरान पाया गया,जो बेहद हानिकारक है और इसके प्रभाव से बच्चों में आगे चलकर अलग-अलग तरह की बीमारियां होने का कारण बनता है। 
देश के अलग-अलग हिस्सों से एकत्र किए गए नमूनों के आधार पर दिल्ली आधारित संस्था टॉक्सिक लिंक ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया है। देश के बाजार में धड़ल्ले से बिक रही दूध की बोतल और सिपर बच्चों के लिए सेफ नहीं हैं। बीते 4 साल में दूसरी बार जारी की गई इस स्टडी में साफ किया गया है कि बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। जिनका सैंपल लिया गया उनमें 14 बोतल और 6 सिपर शामिल थे। यह सैंपल दिल्ली के अलावा गुजरात, राजस्थान, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र,मणिपुर से लिए गए। इनकी टेस्टिंग इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी, गुवाहाटी में करवाई गई। जिनमें यह साफ हुआ की बोतल में मौजूद केमिकल बच्चों के खाने में पहुंच रहा है। 
सस्ती और घटिया कंपनी वाली बोतलों को भी केमिकल की कोटिंग कर के उन्हें मुलायम रखती है। साथ ही बोतल लंबे समय तक खराब नहीं होती है। मैक्स अस्पताल, पटपड़गंज की सीनियर (पीडीअट्रिशन) - डॉक्टर तपीशा गुप्ता ने बताया कि जब बोतल में गर्म दूध या पानी डालकर बच्चे को पिलाया जाता है, तो यह रसायन भी घुलकर बच्चे के शरीर में चला जाता है और शरीर में जाने के बाद इस रसायन से पेट और आंतों के बीच का रास्ता बंद हो जाता है। जिससे कभी-कभी जान का भी खतरा बन जाता है। यही नहीं काफी दिनों तक दूध के सहारे शरीर में रसायन पहुंचने के कारण ह्रदय, गुर्दे, लिवर और फेफड़ों की बीमारी हो सकती है। बोतल से लगातार दूध पिलाने से बच्चे के गले में सूजन आ जाती है। उसे उल्टी दस्त भी हो सकते हैं। 
डायरिया भी हो जाता है,तो हमेशा मेडिकेडेट बोतल का इस्तेमाल करें। गुणवत्ता वाली बोतलें मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध होती हैं। पॉली कार्बोनेट से बनी बेबी बॉटल पर बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) ने 2015 में ही रोक लगा दी थी, लेकिन इसके बावजूद यह अब भी इंडियन मार्केट में उपलब्ध  है और बच्चों की बीमारियों का एक बड़ा कारण बन रही है। इसको लेकर अभी कोई कानून न होने का फायदा बहुत कंपनियां उठा रही है और नन्हे मासूमों को इसका शिकार होना पड़ रहा है।

चील्ड वॉटर आपकी सेहत पर ड़ालता है नकारात्मक असर...


हम अक्सर पानी पीने के बाद यह शिकायत करते हैं कि नॉर्मल पानी से प्यास नहीं मिटती, जरा ठंडा पानी पीना होगा और इसी बहाने के साथ हम गर्मियों में दबा कर ठंडा पानी पीते हैं। ठंडे पानी से मन और शरीर को मिलने वाली ठंडक हमें इस बात का अहसास ही नहीं होने देती कि यह हमारी सेहत के लिए कितना खतरनाक है। यह तो हम सभी जानते और सुन चुके हैं कि ज्यादा ठंडा पानी पीने से गला ख़राब हो जाता है अगर आप यह सोचते हैं कि यह महज बड़ों के बहाने हैं, तो आप गलत हैं। ठंडा पानी पीने से श्वसन तंत्र में म्युकोसा नाम की सुरक्षात्मक परत संकुलित हो जाती है, जिससे गला ख़राब हो सकता है। 
ठंडा पानी पीकर भले ही आपके मन को सुकून मिलता हो, लेकिन ये आपके दिल के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं। ठंडा पानी दिल की गति को कम कर देता है। ठंडा पानी वेगस तंत्रिका को प्रभावित करता है, जिससे की दिल की गति कम हो जाती है। आप ठंडा पानी पीते हैं और आपको पेट की समस्याएं रहती हैं, तो इसकी वजह है आपकी ठंडा पानी पीने की आदत। ठंडा पानी पाचन प्रक्रिया में बाधा ड़ालता है। ठंडा पानी पीने से नसें सिकुड़ जाती हैं और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है।
इसी के चलते पेट की समस्याएं पैदा होती हैं तो अगर आपकेा आपको भी पेट से जुड़ी परेशानियां होती हैं, तो आज से ही ठंडा पानी पीना बंद करें। ठंडा पानी पीने वाले लोगों को अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है। जैसा कि हम जानते हैं कि ज्यादा ठंड से चीजें जम जाती हैं, ठीक वैसे ही हमारे शरीर में अधिक ठंडा पानी चीजों को सख्ता बना देता है। इससे कब्ज और बवासीर जैसी परेशानियां जन्म ले सकती हैं। ठंडा पानी आपके खाने के पोषक तत्वों को खत्म कर देता है अगर आप पोषक आहार लेने के बाद ठंडा पानी पी लेते हैं, तो समझ जाईए कि आपने कुछ पोषक आहार नहीं खाया। 
आदमी के शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है और जब हम कोई ठंडी चीज़ पीते हैं, तो उसे शरीर के तापमान के बराबर लाने में शरीर को ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। अगर आप ठंडा पानी नहीं पीते तो यही ऊर्जा भोजन के पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में काम आती है।

Thursday, May 2, 2019

2050 तक दुनिया में होंगी सबसे ज्यादा मुस्लिमों की आबादी.....रिसर्च


 वर्ल्ड रिलीजन डेटाबेस ने 1910 से 2010 के बीच दुनिया भर के देशों में रह रहे धार्मिक लोगों की आबादी के अध्ययन के आधार पर बताया है कि इन 100 सालों में इस्लाम सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म है जबकि उसके बाद सबसे तेजी से नास्तिक (धर्म न मानने वाले) लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस स्टडी में यह भी सामने आया है कि 2050 तक भारत में भी मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ेगी। यहां हिंदू ही बहुसंख्यक रहेंगे लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में होगी।
फिलहाल इंडोनिशिया के बाद भारत में सबसे अधिक मुस्लिम रहते हैं। आमतौर पर ऐसा कहा जाता है कि धर्मांतरण दुनिया भर में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण है,लेकिन प्यू रिसर्च इससे साफ़-साफ़ इनकार करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में मुसलमानों की जनसंख्या में हुई वृद्धि के पीछे धर्मांतरण का योगदान सिर्फ 0.3% ही है यानी इन पांच सालों के दौरान सिर्फ 500,000 लोगों ने ही किसी और धर्म को छोड़कर इस्लाम अपनाया है। मुस्लिम आबादी बढ़ने के पीछे की सबसे बड़ी वजह बर्थ-डेथ का अनुपात ही है। इसके अलावा मुस्लिमों का फर्टिलिटी रेट दुनिया भर के अन्य धार्मिक समुदायों के मुकाबले सबसे ज्यादा 
है। वर्ल्ड रिलीजन डेटाबेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में साल 1910 में कुल आबादी के 34.8 प्रतिशत लोग ईसाई थे जो कि 2010 में घटकर 32.8 प्रतिशत रह गए हैं। जबकि मुसलमानों की बात करें तो 1910 में इनकी आबादी 12.6% थी जो 2010 में बढ़कर 22.5% हो गई है। हिंदुओं की बात करें तो उनकी आबादी में भी बढ़ोत्तरी ही दर्ज कि गई है, हिंदू आबादी दुनिया भर में 1910 में 12.7% थी जो अब बढ़कर 13.8% हो गई है। नास्तिकों कि बात करें तो इनकी आबादी पहले सिर्फ 0.2% थी जो अप्रत्याशित रूप से बढ़कर 9.8% हो गई है।  चीनी लोक धर्म मानने वाले लोगों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है ये 22.2% से घटकर सिर्फ 6.3% रह गए हैं। प्यू रिसर्च सेंटर ने भी साल 2017 में एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें साल 2015 तक का डेटा शामिल किया गया था।  
इस रिपोर्ट के मुताबिक भी दुनिया भर में ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या सबसे ज्यादा करीब 230 करोड़ बताई गई थी जबकि मुसलमानों की आबादी 180 करोड़ से भी ज्यादा थी। हिंदुओं की आबादी इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 110 करोड़ के आस-पास थी। इस रिपोर्ट में दुनिया भर में ईसाइयों की आबादी 31.2% बताई गई थी जबकि मुस्लिम 24.1% और हिंदुओं की आबादी 15.1% बताई गई थी। नास्तिकों की संख्या दुनिया भर की आबादी का 16% के आस-पास है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में मुसलमान सबसे तेजी से बढ़े हैं लेकिन इसके पीछे कोई विशेष कारण न होकर ये काफी प्राकृतिक कारणों से नज़र आता है। 
रिपोर्ट ने 2010 से 2015 के बीच मुस्लिम समाज में बच्चों के जन्म और मृत्यु के आंकड़ों का अध्ययन कर पाया है कि इस दौरान दुनिया भर में 21.3 करोड़ बच्चे पैदा हुए लेकिन सिर्फ 6.1 करोड़ लोगों की मौत हुई। जबकि क्रिश्चियनिटी की बात करें तो 22.3 करोड़ बच्चे पैदा हुए लेकिन मरने वालों की संख्या भी 10.7 करोड़ से ज्यादा रही। यूरोप में ईसाई समुदाय के लोगों की जनसंख्या में सबसे ज्यादा कमी देखी जा रही है ये इन पांच सालों में करीब 56 लाख से भी ज्यादा घटी है। रिपोर्ट के मुताबिक हर मुस्लिम औरत 3.1 बच्चे पैदा करती है। जब कि ईसाइयों में ये अनुपात 2.7 है। 
दुनिया भर में एवरेज हर औरत 2.5 बच्चे पैदा करती है, सिर्फ ईसाई और मुस्लिम ही औसत से बेहतर हैं। हिंदुओं में ये औसत 2.4 है जबकि बौद्ध में सबसे कम 1.6 ही है। समाज विज्ञानियों का ये भी मानना है कि एक लंबे अरसे तक मुस्लिम देशों में कड़े कानूनों और अन्य दिक्कतों की वजह से जनसंख्या के आंकड़े सामने नहीं आ पाते थे, अचानक से जनसंख्या के बढ़ने के पीछे इन आंकड़ों के सार्वजनिक हो जाना भी एक वजह है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिमों की आबादी में अगर ऐसे ही इजाफा होता रहा तो ये साल 2050 तक जनसंख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय बन जाएगा जबकि क्रिश्चियनिटी मानने वाले दूसरे नंबर पर खिसक जाएंगे। खासकर यूरोप में मुस्लिमों की आबादी बढ़कर 10% से भी ज्यादा हो जाएगी। भारत की बात करें तो हिंदू ही बहुसंख्यक रहेंगे,लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी यहां रह रही होगी और भारत मुस्लिम आबादी के मामले में इंडोनेशिया को पीछे छोड़ देगा।

Wednesday, May 1, 2019

10वी तक पढ़े रोबर्ट वाड्रा कैसे बने 1 लाख रुपए से रातों ही रात बेनामी संपति 11 हजार करोड़ के मालिक....?

रोबर्ट वाड्रा का परिवार मूल रूप से पाकिस्तान से जान बचाकर भारत आया था, गरीब था, और मुरादाबाद में शिफ्ट हुआ था। वाड्रा परिवार असल में सियालकोट का है, जो की आज पाकिस्तान में आता है। वाड्रा के पूर्वज सियालकोट से जान बचाकर भारत आये थे और पहले इसके पूर्वज बंगलुरु में शिफ्ट हुए थे,पर वहां काम धंधा नहीं चला तो उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में आ गए और यहाँ रहने लगे, इसके दादा ने पीतल का काम शुरू किया जो मुरादाबाद में बहुत होता है। 
फिर राजेन्द्र वाड्रा ने जो की रोबर्ट के पिता थे, उन्होंने मुरादाबाद में एक छोटी पीतल से बनी बर्तनों, मूर्तियों की दूकान खोली थी। 
दिन भर राजेन्द्र वाड्रा इसी दूकान पर बैठकर अपना काम करते थे। राजेन्द्र वाड्रा की मुलाकात मौरीन नाम की एंग्लो यूरोपियन महिला से हुई थी, जो भारत में ही पीतल का काम करती थी, वो भी कोई बहुत बड़े लेवल पर नहीं बल्कि छोटे ही लेवल पर राजेन्द्र भी पीतल की दूकान चलाते थे तो दोनों की मुलाकात हुई। फिर राजेन्द्र और मौरीन ने शादी कर ली, उनसे रोबर्ट, और 2 अन्य बच्चे भी जन्मे, रोबर्ट का पूरा परिवार काफी गरीब सा था और साधारण सी जिंदगी जीता था,पर रोबर्ट की माँ एंग्लो ब्रिटिश थी इसी का फायदा उठाकर उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला दिल्ली के ब्रिटिश स्कुल में करवा दिया, इस स्कुल में सिर्फ अमीरों के बच्चे ही पढ़ते थे।  
मौरीन के बच्चों को भी दाखिला मिल गया चुकी वो ब्रिटिश थी, रोबर्ट वाड्रा सिर्फ 10वी तक ही पढ़े है, पढने लिखने में बिलकुल बेकार थे, कैसे भी करके 10वी तक पहुँच गए। इसी स्कुल में राजीव गाँधी की बेटी प्रियंका गाँधी भी पढ़ती थी, और साथ पढ़ते-पढ़ते प्रियंका को रोबर्ट पसंद आ गया और आख़िरकार प्रियंका ने जिद करके सोनिया को मना लिया और 1997 में रोबर्ट से शादी हो गयी। रोबर्ट वाड्रा 1980 के दशक में मुरादाबाद में रिक्शे पर अपनी माँ और भाई बहनों के साथ चलते थे। इनके पास एक स्कूटर भी नहीं था। राजेन्द्र कमा कर लाते तो परिवार खाना खा पाता था, मुरादाबाद में ये लोग रिक्शे, पैदल ही अपनी जिंदगी को चलाते थे। 
1990 के दशक में राजेन्द्र का काम कुछ ठीक हुआ तो उन्होंने एक पुरानी जिप्सी खरीदी थी और प्रियंका वाड्रा से शादी से पहले रोबर्ट इसी पुरानी और खटारा हो चुकी जिप्सी में घूमते थे। इनके बैंक में 50 हज़ार रुपए भी नहीं थे। उसके बाद जैसे ही प्रियंका से शादी हो गयी। देखते ही देखते रोबर्ट की जिंदगी ही बदल गयी, रोबर्ट के मजे हो गए और ये विदेशों में घुमने लगे, महँगी गाड़ियाँ इनके पास आ गयी,फिर इन्होने व्यापार के नाम पर 1 लाख रुपए 2007 में लगाये और वो 1 लाख रुपए रातों ही रात 300 करोड़ हो गए, तब सरकार कांग्रेस की थी, 1 लाख से सीधे संपत्ति 300 करोड़, और इस से विदेशी मीडिया भी हैरान रह गयी। अब तो रोबर्ट वाड्रा की संपत्ति बेनामी मिलाकर एक अंदाजे के हिसाब से 11 हज़ार करोड़ रुपए की है।
बेनामी संपत्ति इनके पास खूब है और कुछ सौर्स तो वर्तमान में इनकी संपत्ति को 15 हज़ार करोड़ की बताते है। जो शख्स रिक्शे पर घूमता था, फिर बाप की खरीदी हुई पुरानी जिप्सी पर, उसके पास आज दर्जनों लग्जरी गाड़ी है, विदेशों और भारत में भी संपत्तियां है। 11 हज़ार करोड़ की संपत्ति है, ऐसा फार्मूला कौन सा है जिस से वो रोडपति से खरबपति हो गए।

5 सालो में संसद में सवाल पुछने के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सांसद निधि खर्च करने में मोदी सबसे कंजूस....


संसद और सांसदों के कामकाज पर केन्द्रित वेबसाइट पार्लियामेंट्री बिजनेस डाट काम' के अध्ययन के मुताबिक तमाम नेता संसद और संसद के बाहर तो खूब सक्रिय दिखे लेकिन सांसद की सबसे प्रमुख जिम्मेदारी सवाल पूछने के मामले में फिसड्डी साबित हुए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी संसद के बाहर भले ही मुखर हों, लेकिन लोकसभा में पांच साल के दौरान उन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा। वहीं सांसद विकास निधि (एमपी लैड) के पैसे खर्च करने में भी वे काफी पीछे हैं। वहीं विकास के नाम पर राजनीति करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सांसद निधि के जरिए विकास करने में कंजूस दिखे हैं।
कुल 31 सांसद ऐसे हैं जिन्होंने एक भी सवाल पूछना गवारा नहीं समझा। वेबसाइट पार्लियामेंट्री बिजनेस डाट काम का लोकार्पण लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने किया था।  वेबसाइट ने लोकसभा के बजट सत्र सहित पूरे पांच साल के सभी सत्रों का गहराई से विश्लेषण कर कई रोचक जानकारियां पेश की हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी,वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी,दिग्गज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणीशत्रुघ्न सिन्हा,सपा के दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं में एक समानता है कि इनमें से किसी भी नेता ने लोकसभा के पांच साल के कार्यकाल में एक भी सवाल नहीं पूछा। 
राहुल गांधी ने एमपी लैड की जहां लगभग 60.56 फीसदी राशि खर्च की है तो नरेंद्र मोदी भी महज 62.96 फीसदी रकम खर्च कर पाए हैं। राहुल के नक़्शे कदम पर चलते हुए कांग्रेस के कुल 45  सांसदों ने भी इस मामले भरपूर कंजूसी दिखाई और सांसद विकास निधि का सर्वाधिक उपयोग करने वाले देश के शीर्ष 50 सांसदों में मात्र दो सांसद कांग्रेस  के हैं जो 45वें एवं 49वें नंबर पर है। सांसद निनोंग एरिंग और डी.के. सुरेश ही इस सूची में स्थान बनाने में कामयाब रहे। वहीं अश्विनी कुमार चौबे,गिरिराज  सिंह,मुरली मनोहर जोशी और अनुराग ठाकुर जैसे कुछ सांसद ऐसे भी हैं  जिन्होंने एमपी लैड का 95 फीसदी से अधिक इस्तेमाल कर दिखाया। 16 वीं लोकसभा में 219 गवर्मेंट बिल रखे गए और इनमें से 93 प्रतिशत पास हो गए  जबकि प्राइवेट मेंबर बिल की अनदेखी का सिलसिला इस लोकसभा में भी चलता रहा और 1117 प्राइवेट मेंबर बिल में से एक भी पास नहीं हो पाया जबकि  इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के सांसदों की भागीदारी थी। 
जहां तक लोकसभा में उपस्थिति की बात है तो इन पांच सालों में औसतन 80 फीसदी  उपस्थिति दर्ज की गयी। इसमें पुरुष सांसदों की मौजूदगी 80.34 प्रतिशत और महिला सांसदों की उपस्थिति 77.98 फीसदी रही। यदि पार्टी वार सांसदों की उपस्थिति की बात करें तो सत्तारूढ़ भाजपा के सांसद उपस्थिति के मामले में  पांचवे तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सांसद संसद में मौजूदगी के मामले में 21 वें स्थान पर रहे। व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर देखे तो भाजपा के भैरो  प्रसाद मिश्र और बीजू जनता दल के डा कुलमणि सामल ने सौ फीसदी उपस्थित रहकर शत प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई। युवा सांसद ने भी उपस्थिति के मामले में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई जबकि पहली बार के सांसद बढ़ चढ़कर संसद पहुंचे। जहां तक सांसद विकास निधि के खर्च की बात है तो अब तक 30 फीसदी से अधिक निधि बिना खर्च हुए सरकारी खजाने की शोभा बढ़ा रही है।  
कहने का तात्पर्य यह है कि सांसदों को हर साल मिलने वाली विकास राशि भी पूरीतरह से खर्च नहीं हो पायी। एमपी लैड पर सरकार की ही वेबसाईट पर उपलब्ध आकंड़ों के अनुसार 10 जनवरी 2019 तक बिना खर्च हुए 4021.13 करोड़ रुपये जमा हैं। सांसद विकास निधि खर्च करने में महिला सांसद बेहतर हैं उन्होंने 72 फीसदी राशि खर्च कर दी जबकि पुरुष सांसद 69.33 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाए। राजस्थान,महाराष्ट्र,दिल्ली और उत्तराखंड के सांसद इस राशि को खर्च करने के मामले में सबसे फिसड्डी हैं।

व्हाट्सएप पर करते है यह काम तो हो जाए सावधान वर्ना जेल में करना पड़ेगा आराम....


जिस तेज गती से तकनीकी का उपयोग किया जा रहा है। कही आपके जी का जंजाल न बन जाए इसलिए समय रहते सावधान होने की जरूरत है। व्हाट्सएप भारत में गलत सूचना, नफरत भरे संदेशों और यहां तक कि संगठित अपराध को फैलाने के लिए एक आकर्षण प्लेटफार्म बन गया है। जबकि व्हाट्सएप ने निश्चित रूप से इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को आसानी से संवाद करने में मदद की है, भारत में, व्हाट्सएप समूहों ने हिंसा भड़काने के इरादे से गलत सूचना फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। व्हाट्सएप पूरी तरह से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड चैटिंग प्लेटफॉर्म होने का दावा करने के साथ, बहुत कम लोग जानते हैं कि व्हाट्सएप हर उपयोगकर्ता के बारे में मेटाडेटा एकत्र करता है,जिसे कंपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा कर सकती है जब मांग की जाती है। 
जबकि संदेशों को एन्क्रिप्ट किया गया है, अगर पुलिस चाहती है तो वे आपका नाम, आईपी पता, मोबाइल नंबर, स्थान, मोबाइल नेटवर्क और अपने मोबाइल हैंडसेट प्रकार प्राप्त कर सकते हैं। पुलिस यह भी जान सकती है कि आप किसके साथ चैट कर रहे हैं,कितने समय के लिए और किस समय। साथ ही, पुलिस आपके संपर्कों को भी एक्सेस कर सकती है। जबकि देश में व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं के लिए कोई अलग कानून नहीं हैं, पुलिस आपको सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत निम्न में से कोई भी कार्य करते हुए व्हाट्सएप के समर्थन से गिरफ्तार कर सकती है। 
व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन को अन्य सदस्यों के किसी भी गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। व्हाट्सएप पर किसी भी तरह के देह व्यापार और वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देना और लेना व्हाट्सएप पर महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों की तस्वीरें साझा कीं व्हाट्सएप पर महिलाओं को परेशान करना। किसी और के नाम का उपयोग करके एक व्हाट्सएप अकाउंट चलाना। अपमान के इरादे से किसी भी धर्म या पूजा स्थल से संबंधित नफरत भरे संदेश भेजना। हिंसा या दंगा भड़काने के लिए संवेदनशील विषयों पर फर्जी समाचार या अफवाहें फैलाना। 
व्हाट्सएप के माध्यम से प्रतिबंधित वस्तुओं और दवाओं को बढ़ावा देना और बेचना व्हाट्सएप या व्हाट्सएप पर अवैध रूप से फिल्माए गए लोगों की वीडियो क्लिप भेजना व्हाट्सएप पर अश्लील सामग्री या अश्लील सामग्री फैलाना ये सभी सामग्री आपको जेल की हवा खिलाने के लिए पर्याप्त है।  

इस उम्र में रहते है आप सबसे ज्यादा खुश....?


 अमेरिकी थिंक टैंक के एक नये अध्ययन के मुताबिक लोग सबसे ज्यादा खुश 16 साल की उम्र में और फिर 70 की उम्र में होते हैं। रेजोल्युशन फाउंडेशन ने सबसे अधिक और सबसे कम सुख का आकलन करने के लिए आधिकारिक डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि सुख का स्तर किसी की उम्र, आय के स्तर, घर होना और जहां वे रहते हैं इस बात पर बहुत अधिक निर्भर करता है और इनके हिसाब से हर किसी में इसका स्तर अलग-अलग होता है। 
थिंक टैंक रिपोर्ट में पाया गया कि सुख-समृद्धि का स्तर आम तौर पर 25-26 साल की उम्र से शुरू होकर 50 साल की उम्र होने से पहले तक गिरने लगता है और फिर 70 साल की उम्र तक यह स्तर एक बार फिर बढ़ना शुरू हो जाता है। सुख-समृद्धि के इस स्तर में खुशी, जीवन संतुष्टि, अपनी अहमियत और चिंतामुक्त जीवन शामिल होता है। केवल उम्र को आधार मान कर देखा जाए तो 16 या 70 की उम्र में इंसान सबसे ज्यादा खुश रहता है। 
 हैप्पी नाऊ? शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में पाया गया कि सुख-संपन्नता के सबसे अहम कारकों में अच्छी सेहत, नौकरी और एक जीवनसाथी का होना है,लेकिन सुख-समृद्धि का यह स्तर उम्र, आय के स्तर, आस-पड़ोस, अपने घर में रहना आदि के हिसाब से हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है।
इस रिपोर्ट के जरिए नीति-निर्माताओं से अपील की गई है कि वे लोगों में सुख-समृद्धि के भाव को बढ़ाने के लिए गहराई से इन कारकों पर गौर करें और फिर प्राथमिकता से इस दिशा में काम करें।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...