Wednesday, May 15, 2019

NCP अध्यक्ष शरद पवार ने की मोदी सरकार बनने को लेकर भविष्यवाणी...


राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने बड़ा बयान दिया है। शरद पवार ने 23 मई के बाद नई सरकार बनने को लेकर दावा किया है। शरद पवार ने दावा करते हुए कहा है कि अगर राष्ट्रपति बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाते भी हैं तो वह सदन में अपना बहुमत सिद्ध नहीं कर सकेगी। शरद पवार ने दावा किया कि अगर मोदी सरकार बनाने में कामयाब हो भी जाते हैं तो उसका वही हस्र होगा, जो 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार का हुआ था। शरद पवार ने ये साफ साफ संकेत दिए कि लोकसभा चुनाव नतीजों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरेगी, लेकिन बहुमत से दूर रहेगी। 
त्रिशंकु लोकसभा के बारे में पूछे गए सवाल पर शरद पवार ने कहा कि त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में हॉर्स ट्रेडिंग कोई भी गुंजाइश नहीं होगी क्योंकि सारे पक्ष एक साथ होंगे। शरद पवार ने कहा, 21 मई को गैर बीजेपी सरकार बनने की प्रक्रिया की शुरुआत होगी। सभी पक्ष कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाने के लिए एक साथ आएंगे। सभी विपक्षी दल बैठक कर रहे हैं। उसके बाद हम कोई फैसला करेंगे। इससे पहले भी शरद पवार कह चुके हैं कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत नहीं मिलेगा। वहीं अगर ये सबसे बड़ी पार्टी बनी तो भी उसे गठबंधन की जरूरत पड़ेगी। बीजेपी बड़ी पार्टी बन सकती है पर उसे बहुमत नहीं मिलेगा और गठबंधन की स्थिति में नरेंद्र मोदी स्वीकार नहीं होंगे। इस चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। उन्हें बहुमत के लिए जो आंकड़े चाहिए वो उन्हें नहीं मिलने वाले हैं।

Birth Control Pills [गर्भनिरोधक दवाएं] पर अमेरिका फूड एंड ड्रग एडमिनिट्रेशन सख्त...


अमेरिका में 117 सांसदों ने अमेरिका फूड एंड ड्रग एडमिनिट्रेशन (एफडीए) से अपील की है कि वह रसायनिक गर्भनिरोधक दवाइयां भारत से अमेरिका भेजने वाली यूरोप की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करे। सांसदों ने कार्यवाहक एफडीए आयुक्त नोरमन शार्पलेस को लिखे पत्र में कहा कि एड एक्सेस जैसी यूरोपीय कंपनियां एफडीए की सुरक्षा अनिवार्यताओं की अवहेलना कर रही हैं और महिलाओं एवं उनके बच्चों के जीवन को जोखिम में डाल रही हैं।
कांग्रेस के दोनों दलों के सांसदों द्वारा 10 मई को लिखे गए पत्र में शार्पलेस से अपील की गई है कि वह अमेरिकी उपभोक्ताओं को रासायनिक गर्भनिरोधक दवा माइफप्रेक्स का मेल ऑर्डर के जरिए मुहैया करने वाली दो विदेशी कंपनियों एड एक्सेस और राब्लन के खिलाफ कार्रवाई करें। पत्र में शार्पलेस से अपील की गई है कि वह एड एक्सेस और मेल ऑर्डर के जरिए गर्भनिरोधक दवाएं मुहैया कराने वाली अन्य कंपनियों की अवैध गतिविधियां रोकने के लिए कदम उठाएं।
माइफप्रेक्स के पास एफडीए की मंजूरी है,लेकिन स्वास्थ्य सेवा प्रदाता ही मरीजों को यह दवा दे सकते हैं। यह खुदरा मेडिकल स्टोरों और कानूनी रूप से इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं। 

Tuesday, May 14, 2019

इंसानों को 2024 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजना चाहते हैं.....Amazon


 अमेजन के मालिक जेफ बेजोस अब चांद पर सामान पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। वह इंसानों को भी 2024 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजना चाहते हैं। वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि ब्लू ओरिजिन के ब्लू मून यान के जरिए वह चांद पर जाने का सपना साकार करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से वह इस योजना पर काम कर रहे हैं। ऐसे पहुंचा जा सकेगा चांद पर:- बेजोस ने कहा कि चांद पर दक्षिणी ध्रुव 21 किलोमीटर चौड़ा मैदान है जहां प्रचुर मात्रा में वॉटर आइस है और धूप भी आती है। उन्होंने बताया कि पानी से हाइड्रोजन को अलग करके ईंधन भी बनाया जा सकता है। 
उन्होंने बताया कि ब्लू मून हाइड्रोजन से चलेगा इसलिए चांद का आइस वॉटर इसमें काम आ सकता है। हाइड्रोजन फ्यूल वाले सेल चांदनी रात में चार्ज हो जाएंगे। यह यान 15,000 किलो का होगा जो चंद्रमा पर लैंड करते वक्त 3,100 किलो का ही रह जाएगा। इसमें एक बड़ा स्फेरिकल टैंक होगा और इसके लिए चार लैंडिंग पैड तैयार किए जाएंगे। हालांकि बेजोस ने इस प्रॉजेक्ट के पहले लॉन्च की तारीख नहीं बताई है। उन्होंने कहा कि 2024 तक यह संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब फिर से चांद पर जाने का समय है और वहां रुकना भी है। ब्लू मून के पास पहले से छह ग्राहक हैं। 
इसमें कुछ अकादमिक संस्थान भी शामिल हैं। इसके अलावा जेफ बेजोस का ब्लू ओरिजिन दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। पहला न्यू शेफर्ड है जिसमें रॉकेट के जरिए लोगों को अंतरिक्ष की सैर कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि 2021 तक यह प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा। पिछले साल इसने पहली उड़ान भरी थी और अंतरिक्ष में लगभग 106 किलोमीटर तक गया था।

Saturday, May 11, 2019

क्या है नीति आयोग व योजना आयोग कैसे करता है काम……?


सरकार ने 60 साल पुराने योजना आयोग को खत्म कर 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग की स्थापना की थी। मौजूदा समय में अर्थशास्त्री डॉ. राजीव कुमार नीति आयोग के वाइस चेयरमैन है। इससे पहले अरविंद पनगढ़िया वाइस चेयरमैन थे। आइए जानें कि मोदी सरकार में शुरू हुआ नीति आयोग किस तरह से काम करता है और ये योजना आयोग से कितना अलग है। योजना आयोग से नीति आयोग कितना अलग है- कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर सुब्रमण्यम पशुपति के अनुसार योजना आयोग पंचवर्षीय योजना बनाता था। ये मॉडल रूस से लिया गया था। इसके अलावा केंद्र सरकार के मंत्रालयों और राज्यों को वित्तीय आवंटन करने का जिम्मा भी योजना आयोग का होता था, लेकिन नीति आयोग के गठन के बाद पंचवर्षीय योजनाओं को खत्म कर दिया गया है।
साथ ही, नीति आयोग का काम अब सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर सरकार को सलाह देने का काम करता है। # क्या है नीति आयोग- नीति का फुल फॉर्म नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया है। देश का प्रधानमंत्री नीति आयोग का अध्यक्ष होता है। इसकी गवर्निंग काउंसिल में राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल होते हैं। विशिष्ट मुद्दों और ऐसे आकस्मिक मामले, जिनका संबंध एक से अधिक राज्य या क्षेत्र से हो, को देखने के लिए क्षेत्रीय परिषद होती है। ये परिषद विशिष्ट कार्यकाल के लिए बनाई जाती हैं।  भारत के प्रधानमंत्री के निर्देश पर क्षेत्रीय परिषदों की बैठक होती है और इनमें संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। 

इनकी अध्यक्षता नीति आयोग के वाइस चेयरमैन करते हैं। इसमें दो तरह के सदस्य होते हैं- पूर्णकालिक और अंशकालिक:- अंशकालिक सदस्यों में अग्रणी विश्वविद्यालय, शोध संस्थानों और संबंधित संस्थानों से अधिकतम दो पदेन सदस्य होते हैं। केन्द्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्य प्रधानमंत्री द्वारा नोमिनेटित किए जाते हैं। इसके अलावा एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है जो भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी होता है। उसे एक निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं। कौन है नीति आयोग के वाइस चेयरमैन- डॉ. कुमार फेडेरशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी फिक्की के महासचिव रह चुके हैं। वो इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च एंड इंटरनेशनल इकॉनॉमिक रिलेशन के डॉयरेक्टर और चीफ एक्ज़ीक्यूटिव भी रह चुके हैं। 
# योजना आयोग क्या करता था:- आजादी के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने योजना आयोग की स्थापना की थी। योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को हुआ था। योजना आयोग देश के विकास से संबंधित योजनाएं बनाने का काम करता था। योजना आयोग ने 12 पंचवर्षीय योजनाएं बनाईं। योजना आयोग ने 2000 करोड़ रुपए से पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू की थी। योजना आयेग के अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही होते थे, लेकिन कभी भी मुख्यमंत्रियों से सलाह नहीं ली जाती थी।  मुख्यमंत्री अगर कोई सुझाव देना चाहते थे तो वे विकास समिति को देते थे। जो समीक्षा के बाद योजना आयोग को दी जाती थी। निजी क्षेत्र की भागीदारी योजना आयोग में कतई नहीं थी।

कही हमारी भी तो नही बंदरों जैसी मानसिकता.....?


एक बार कुछ वैज्ञानिकों ने एक बड़ा ही मजेदार प्रयोग किया। उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में बंद कर दिया और बीचों -बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे। जैसा की अनुमान थाएक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा पर जैसे ही उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं उस पर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी और उसे उतर कर भागना पड़ा। वैज्ञानिक यहीं नहीं रुके,उन्होंने एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी दे डाली और सभी को ठन्डे पानी से भिगो दिया। बेचारे बन्दर हक्के-बक्के एक कोने में दुबक कर बैठ गए पर वे कब तक बैठे रहते,कुछ समय बाद एक दूसरे बन्दर को केले खाने का मन किया और वो उछलता कूदता सीढ़ी की तरफ दौड़ा अभी उसने चढ़ना शुरू ही किया था कि पानी की तेज धार से उसे नीचे गिरा दिया गया और इस बार भी इस बन्दर के गुस्ताखी की सज़ा बाकी बंदरों को भी दी गयी। 
एक बार फिर बेचारे बन्दर सहमे हुए एक जगह बैठ गए। थोड़ी देर बाद जब तीसरा बन्दर केलों के लिए लपका तो एक अजीब वाक्य हुआ। बाकी के बन्दर उस पर टूट पड़े और उसे केले खाने से रोक दिया,ताकि एक बार फिर उन्हें ठन्डे पानी की सज़ा ना भुगतनी पड़े। अब प्रयोगकारों ने एक और मजेदार चीज़ की अंदर बंद बंदरों में से एक को बाहर निकाल दिया और एक नया बन्दर अंदर डाल दिया। नया बन्दर वहां के नियम क्या जाने। वो तुरंत ही केलों की तरफ लपका पर बाकी बंदरों ने झट से उसकी पिटाई कर दी। उसे समझ नहीं आया कि आख़िर क्यों ये बन्दर ख़ुद भी केले नहीं खा रहे और उसे भी नहीं खाने दे रहे। ख़ैर उसे भी समझ आ गया कि केले सिर्फ देखने के लिए हैं खाने के लिए नहीं। इसके बाद प्रयोगकारों ने एक और पुराने बन्दर को निकाला और नया अंदर कर दिया। 
इस बार भी वही हुआ नया बन्दर केलों की तरफ लपका पर बाकी के बंदरों ने उसकी धुनाई कर दी और मज़ेदार बात ये है कि पिछली बार आया नया बन्दर भी धुनाई करने में शामिल था। जबकि उसके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था। प्रयोग  के अंत में सभी पुराने बन्दर बाहर जा चुके थे और नए बन्दर अंदर थे,जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था। पर उनका स्वभाव भी पुराने बंदरों की तरह ही था। वे भी किसी नए बन्दर को केलों को नहीं छूने देते। हमारे समाज में भी ये स्वभाव देखा जा सकता है। जब भी कोई नया काम शुरू करने की कोशिश करता है,चाहे वो पढ़ाई, खेल, एंटरटेनमेंट, व्यापार, राजनीति, समाजसेवा या किसी और क्षेत्र से सम्बंधित हो, उसके आस पास के लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं।
उसे असफलता का डर दिखाया जाता है और मजेदार बात ये है कि उसे रोकने वाले अधिकतर वो होते हैं जिन्होंने ख़ुद उस क्षेत्र में कभी हाथ भी नहीं आज़माया होता। इसलिए यदि आप भी कुछ नया करने की सोच रहे हैं और आपको भी समाज या आस पास के लोगों के नकारात्मक विचारों को झेलना पड़ रहा है तो कान बंद कर लीजिये और अपनी अंतरात्मा अपनी सामर्थ्य और अपने विश्वास को सुनिए और आगे बढ़ते चलिए बंदर मत बनिए......

दांतों में लगे कीड़े को भगाए मिन्टो में....


दांतों में कीड़ा लगना एक आम समस्या है इसक बारे मे लगभग सभी लोग जानते हैं। रोजना नियम से ब्रश करते हुए भी फिर भी दांतो में कीड़ा लग जाता है। जिसका असानी से पता नहीं चल पता है और रोजना हो रहे दर्द के कारण ज्यादा परेशानी हो जाती है। अगर आपके दांतों ने ठीक से आपका साथ न दिया, तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके कारण न तो आप ठीक से खा सकते है न ही पी सकते है। दांत में कीड़े लग जाने के कारण असहनीय दर्द भी होता है।
जो कि किसी दवा से जल्दी नहीं जाता है। अगर आप इन समस्या से निजात पाने के लिए आप कई तरह की दवाओं का सेवन करते है, लेकिन कीड़ो से निजात नहीं पा पाते है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आप ये घरेलू उपाय अपनाएं। इससे सिर्फ 5 मिनट में दांतों के कीड़ो से निजात पा सकते है। जानिए इऩ घरेलू उपाय के बारें में। # दांतों में कीड़े लगने के कारण:- देखभाल न करने के कारण कीड़े हो जाते है। अधिक मीठा खाने से दांतो में चिपक जाने के कारण। रात को सोने से पहले दांतो की सफाई न करने के कारण। पान, मसाला, तंबाकू का सेवन करने से दांतों में कीड़ें लग जाते है। जब हमारे शरीर में विटामिन सी और विटामिन डी की कमी हो जाती है। जिसके कारण दांत कमजोर हो जाते है।
# दांत के कीड़े भगाने के लिए करें जायफल का इस्तेमाल:- जायफल का इस्तेमाल आमतौर पर मसालों के रुप में किया जाता है,लेकिन यह औषधि भी मानी जाती है। इसका इस्तेमाल कर आसानी से आप कीड़े से निजात पा सकते है। ऐसे करें इस्तेमाल:- जायफल का ऑयल का इस्तेमाल कर सिर्फ 5 मिनट में इस समस्या से निजात पा सकते है। इसके लिए एक कॉटन बॉल में थोड़ा सा जायफल ऑयल डाले और इसे कीड़े वाले दांत या मसूड़ो में रखें। कम से कम 5 मिनट रखा रहने दें। इसमें आपको झनझनाहट होगी। इसे होने दें। 5 मिनट बाद कॉटन को हटा दें। यह कीड़े को जड़ से खत्म करता है। जब आप अपने दांत साफ करेंगे, तो उसके साथ कीड़ा भी निकल जाएगा।

2020 तक ऑनलाइन वीडियो देखने वाले ग्राहकों की संख्या 50 करोड़ पर पहुंच जाएगी.... Google की रिपोर्ट


देश में स्मार्टफोन धारकों की संख्या 2017 के 46.80 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2022 तक 85.90 करोड़ डॉलर पर पहुंच जाने का अनुमान है। गूगल की ईयर इन सर्च-इंडिया-इनसाइट्स फॉर ब्रैंड्स की रिपोर्ट में कहा गया कि ऑनलाइन वीडियो के लिए एक-तिहाई सर्च मनोरंजन से संबंधित होती है। इसके अलावा पिछले दो साल के दौरान अन्य श्रेणियों जीवनशैली, शिक्षा और कारोबार में भी डेढ़ से तीन गुना की वृद्धि हुई है। Google की एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में 2020 तक ऑनलाइन वीडियो देखने वाले ग्राहकों की संख्या 50 करोड़ पर पहुंच जाएगी। ऑनलाइन वीडियो आज भारतीय यूजर्स के लिए सूचना जुटाने और खरीद संबंधी निर्णय लेने का एक अहम माध्यम बन चुका है। 
ऑनलाइन वीडियो सामग्रियां प्रसारित करने वाली कंपनियों का घरेलू बाजार वर्ष 2022 तक 5,363 करोड़ रुपये का हो सकता है। एसोचैम और पीडब्ल्यूसी के एक सर्वे में यह कहा गया। इस तरह की नई सेवा को ओवर दी टॉप (ओटीटी) सेवा कहा जाता है। इस क्षेत्र की कंपनियों में नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, यूट्यब आदि प्रमुख हैं। वीडियो ऑन डिमांड-एंटरटेनमेंट रीइमेजिन्ड नाम के अध्ययन में कहा गया कि घरेलू ओटीटी बाजार वर्ष 2022 तक 5,363 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष 10 वैश्विक बाजारों में शामिल हो जाएगा। अध्ययन के अनुसार वर्ष 2017 से 2022 के बीच घरेलू ओटीटी बाजार सालाना 22.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगा जबकि वैश्विक बाजार के लिये यह औसत 10.1 प्रतिशत है।
रिपोर्ट कहती है कि ऑनलाइन वीडियो आज ग्राहकों द्वारा सूचनाएं जुटाने और खरीद संबंधी निर्णय लेने के तरीके को नया आकार दे रहे हैं। कार खरीद संबंधी फैसले लेने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। करीब 80 प्रतिशत कार के खरीदार इसका इस्तेमाल कार खरीदने के लिए शोध पर कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि गूगल प्लेटफार्म पर वॉयस सर्च में सालाना आधार पर 270 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 10 नए इंटरनेट यूजर्स में से 9 भारतीय भाषाओं वाले प्रयोगकर्ता हैं। 
अध्ययन के अनुसार, इस कारोबारी मॉडल को आगे बढ़ाने वाले पांच मुख्य कारकों में निर्बाध कनेक्टिविटी, वीडियो सामग्रियों के उपभोग में मोबाइल डिवाइस की बढ़ती हिस्सेदारी, पारंपरिक राजस्व माध्यमों से इतर पलायन, सामग्री बनाने वालों की जगह प्लेटफॉर्म की तरफ मूल्य का स्थानांतरण और उपभोक्ता केंद्रित सामग्री की उपलब्धता शामिल है।  

Friday, May 10, 2019

क्या भारत अपनी करेंसी की छपाई के लिए विदेशों पर निर्भर है जाने पर्दे के पीछे की हकीकत.....


कुछ महीने पहले ये चर्चा पूरे देश में बड़े जोरों से फैली कि भारतीय करेंसी का प्रोडक्शन चीन में हो रहा है। सरकार को इसका खंडन देना पड़ा कि भारतीय करेंसी की छपाई चीन में नहीं हो रही है,लेकिन लंबे समय से ये बात चर्चाओं में बराबर रही है कि भारत अपनी करेंसी की छपाई के लिए विदेशों पर निर्भर है।  मौजूदा दौर में तो सारी भारतीय करेंसी देश में ही छापी जा रही है,लेकिन ये सही है कि इंडियन करेंसी को कई सालों तक बाहर छपवाकर मंगाया जाता था। 1997 में भारतीय सरकार ने महसूस किया कि ना केवल आबादी में इजाफा हो रहा है बल्कि आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। इससे निपटने के लिए तुरंत और करेंसी की जरूरत थी। 
भारत के दोनों करेंसी छापाखाने बढ़ती मांग को पूरा करने में नाकाफी थे। 1996 में देश में यूनाइटेड फ्रंट की सरकार बनी थी। एचडी देवेगौडा प्रधानमंत्री बने थे। इसी दौरान इंडियन करेंसी को बाहर छापने का फैसला पहली बार लिया गया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से मंत्रणा करने के बाद केंद्र सरकार ने अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय कंपनियों से भारतीय नोटों को छपवाने का फैसला किया। इसके बाद कई साल तक भारतीय नोटों का एक बड़ा हिस्सा बाहर से छपकर आता रहा। हालांकि ये बहुत मंहगा सौदा था। भारत को इसके एवज में कई हजार करोड़ रुपए खर्च करने पड़े। भारत सरकार ने तब 360 करोड़ करेंसी बाहर छपवाने का फैसला किया था। 
इस पर 9.5 करोड़ डॉलर का खर्च आया था। इसकी बहुत आलोचना भी हुई थी। साथ ही देश की करेंसी की सुरक्षा के जोखिम में पड़ने की भी पूरी आशंका थी। लिहाजा बाहर नोट छपवाने का काम जल्दी ही खत्म कर दिया गया। इसके बाद भारत सरकार ने सीख ली और दो नई करेंसी प्रेस खोलने का फैसला किया। 1999 में मैसूर में करेंसी छापाखाना खोला गया तो वर्ष 2000 में सालबोनी (बंगाल) में। इससे भारत में नोट छापने की क्षमता बढ़ गई। करेंसी के कागजों की मांग पूरी करने के लिए देश में ही 1968 में होशंगाबाद में पेपर सेक्यूरिटी पेपर मिल खोली गई, इसकी क्षमता 2800 मीट्रिक टन है, लेकिन इतनी क्षमता हमारे कुल करेंसी उत्पादन की मांग को पूरा नहीं करती, लिहाजा हमें बाकी कागज ब्रिटेन, जापान और जर्मनी से मंगाना पड़ता था। 
हालांकि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए होशंगाबाद में नई प्रोडक्शन लाइन डाली गई और मैसूर में दूसरे छापेखाने ने काम शुरू कर दिया।  इसके बाद दावा किया जा रहा है कि हम अपने कागज की सारी मांग यहीं से पूरी कर रहे हैं। हमारे हाथों में 500 और 2000 रुपए के जो नए नोट आ रहे हैं, उनका कागज भारत में ही निर्मित हो रहा है। कुछ समय पहले तक भारतीय नोटों में इस्तेमाल होने वाला कागज का बड़ा हिस्सा जर्मनी और ब्रिटेन से आता था। 
हालांकि इसका उत्पादन कहां होता है, इसका खुलासा आरबीआई ने नहीं किया है। नोट में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला खास वाटरमार्क्ड पेपर जर्मनी की ग्रिसेफ डेवरिएंट और ब्रिटेन की डेला रूई कंपनी से आता था, जो अब भारत में ही तैयार हो रहा है। अब स्याही से लेकर कागज तक भारत में बन रहा है।


वे कौनसे पाकिस्तानी सामान,जो भारत में पसंद किये जाते हैं...?


 भारत और पाकिस्तान इन दोनो देशो के बीच बहले ही कितनी भी राजनैतिक दूरिया हो लेकिन फिर भी दोनोदेशो के व्यापरिक संबंध कुछ नर्म गरम होते रहते है,लेकिन कभी बंद नही होते। आइए जानते है वे कौनसी छीजे है जो पाकिस्तान से भारत आती हैं और यहां उनकी खूब डिमांड रहती है। ऐसे सामानों में ताजे फल, सीमेंट और चमड़े के सामान शामिल हैं, जो ना केवल बड़े पैमाने में सीमा पार से यहां आते हैं और पसंद किये जाते हैं। हालांकि पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने जब से 200 फीसदी आयात ड्यूटी लगाई है, तब से इस आयात पर जरूर असर पड़ा है। 
पाकिस्तान से भारत को आयात 2016-17 की तुलना में 2017-18 में बढ़ गया था। अगर पहले पाकिस्तान 455.5 बिलियन डॉलर का आयात भारत करता था तो 2017-18 में ये बढ़कर 488.5 मिलियन डॉलर हो गया। 2017 में पाकिस्तान से बडे़ पैमाने पर फल भारत आए। इसमें ड्राइफ्रूट्स, तरबूजा और अन्य फल थे। पाकिस्तान के इन ताजे फलों का एक बड़ा बाजार भारत में है। यहां तक पाकिस्तान का आम भी भारत में ज्यादा पसंद किया जाता है। आंकड़े बताते हैं कि 2017 में 89.62 मिलियन डॉलर यानि 63 करोड़ के फल भारत ने खरीदे। पाकिस्तान से आने वाले फल आमतौर पर पहले कश्मीर या फिर दिल्ली की फल मंडी में आते हैं। 
सल्फर, पत्थर, चूना और सीमेंट भारत में बिकता है। भारत में लोकप्रिय बिनानी सीमेंट पाकिस्तान में ही बनता है। वहीं व्रत में इस्तेमाल किया जाने वाला सारा सेंधा नमक भी पड़ोसी देश से भेजा जाता है। यहां तक तमाम सौंदर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल होने वाली मुल्तानी मिट्टी पाकिस्तान से ही आती है। आपको हैरानी हो सकती है लेकिन पाकिस्तान हमें पेट्रोलियम उत्पाद और तेल भी भेजता है।  हमारे देश में इस्तेमाल होने वाले चश्मों में भी बड़ी मात्रा में आप्टिकल्स पाकिस्तान से आते हैं। बहुत से मेडिकल उपकरण भी हम वहां से मंगाते हैं। पाकिस्तान बड़े पैमाने पर हमें कॉटन का निर्यात करता है। जिस तांबे का हम इस्तेमाल करते हैं, वो भी खासी मात्रा में पाकिस्तान से ही आता है। गैर कार्बनिक केमिकल्स, मेटल कंपाउंड हम पाकिस्तान से मंगाते हैं। 
चीनी से बनने वाली कंफैक्शनरी संबंधी चीजें हैं। अब हम ये भी जान लेते हैं कि कौन से पाकिस्तानी ब्रांड्स भारत में पसंद किये जाते हैं। ये ब्रांड्स कश्मीर में तो धडल्ले से मिलते ही हैं साथ ही उत्तर भारत में भी ये लोकप्रिय हैं। पाकिस्तान का एंब्राडयरी और कॉटन फैब्रिक ब्रांड बेरीजी के दो स्टोर दिल्ली में हैं। इसके अलावा जुनैद जमशेद भारत में पसंद किया जाता है। यही नहीं लाहौर के कुर्ते, पेशावरी चप्पलें भी दिल्ली में बिकती हैं और इन्हें पसंद करने वाले भी कम नहीं।

Wednesday, May 8, 2019

कैसे बनती है महिलाएं नागा साधू.... कैसे दी जाती है इन्हे दीक्षा...?


नागा साधुओं के अखाड़ों में महिला सन्यासियों की एक खास पहचान होती है,ये महिलाएं साधु पुरूष नागाओं की तरह नग्न रहने के बजाए एक गेरूआ वस्त्र लपेटे रहती हैं। महिला नागा सन्यासियों को बिना वस्त्रों के शाही स्नान करना वर्जित रहता है। जूना अखाड़े की महामंत्री शैलजा देवी ने बताया कि किसी भी पुरूष या महिला को नागा संन्यासी बनने से पहले उसे साधु का जीवन व्यतीत करना पड़ता है। 
लंबे समय के बाद कई पड़ाव पार करने के बाद उन्हें नागा सन्यांसी बनने की दीक्षा दी जाती है। इस वर्ष प्रयागराज में दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मेले कुम्भ में श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने  60 महिला नागा सन्यासियों को दीक्षा दी। एक संत ने बताया कि अखाड़े के साधु-महात्मा महिला के घर और उसके पिछले जीवन के बारे में जांच पड़ताल करते हैं और इन सबके बाद गुरू के इस बात से संतुष्ट होने पर कि अमुक महिला ब्रह्मचर्य का पालन कर सकती है तभी उसे दीक्षा दी जाती है। 
उन्होंने बताया कि सन्यास लेने वाली सन्यासिनियों को उनके इच्छा के अनुसार अखाड़ा चुनना होता है और उसी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर उन्हें दीक्षा देते हैं।  उन्होंने बताया, पूर्व में सन्यांस धारण किए महिलाओं सन्यासियों को पूरे विधि-विधान से अखाडो की परंपरा के अनुसार उनका मुंडन कराया गया और फिर उन्हें गोमूत्र, दही, भस्म, गोबर,चंदन और हल्दी दशविधि से स्नान कराया गया। उसके बाद गंगा में स्नान कराया गया। इस स्नान के बाद उनके सारे पाप धुल जाते हैं। 
 ये सभी अब आजीवन एक समय भोजन ग्रहण करेंगी और जमीन पर सोएंगी। उन्होंने बताया कि अब रात में विजया हवन संस्कार होगा। इसके बाद तीन चरण की प्रक्रिया से गुजरने के बाद मौनी अमावस्या को इनका पहला शाही स्नान होगा। 
उल्लेखनीय है कि जूना अखाड़े में 1100 नागा सन्यासियों को दीक्षा दी गयी थी।   

जाने स्वादिष्ठ गुलाब जामुन बनाने की विधि....?


गुलाब जामुन का नाम सुनते ही अक्सर सभी के मुंह में पानी आना लाज़मी है। आज आप और हम मिलकर इसे घर पर कैसे बनाए इस पर विचार करते है। सबसे पहले गुलाब जामुन के लिए सामग्री:- 100 ग्राम मावा (खोया), एक बड़ा चम्मच मैदा, 1/4 चम्मच बेकिंग सोडा,तलने के लिये घी। चाश्नी बनाने के लिए सामग्री:- 2 कप चीनी, 2 बड़े चम्मच दूध थोड़ा पानी मिला हुआ, 4 हरी इलायची पिसी हुई, 2 कप पानी। अब शुरू करते है गुलाब जामुन बनाने की विधि:-एक बर्तन में मावा लें और हाथ से अच्छी तरह मैश करें, अब मावे में बेकिंग सोडा और मैदा मिलाकर गूंदें, ध्यान रहे मावा-मैदा सूखा नहीं रहना चाहिए,
यदि सूखा लग रहा है तो हथेलियों को पानी से गीला करके उसे फिर गूंद लें, इसको बराबर के छोटे बॉल में बांट लें। अब गैस पर एक कड़ाही में घी गर्म करें, आंच धीमी करके घी में गुलाब जामुन बॉल्स डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें, इन्हें सेंक कर एक प्लेट में निकाल कर अलग रखें। # चाश्नी बनाने की विधि:- चाशनी के लिए एक बर्तन में चीनी और पानी डालकर गैस पर धीमी आंच में रख दें और चीनी के घुलने तक पकाये जब चीनी घुल जाए, तो आंच तेज करके चाशनी को उबालें। 
चाशनी को थोड़ा गाढ़ा होने तक पकाएं, एक चम्मच में चाशनी लेकर उसे उंगली से चिपका कर देखें, यदि एक तार बनने लगे तो गैस बंद कर दें और इसमें पिसी हुई इलायची मिलाये और गुलाब जामुन डाल दें और आधा घण्टे तक चाशनी में दुबे रहने दें। आधे घण्टे में गुलाब जामुन चाशनी को अच्छी तरह सोख लेंगे और गिर  तैयार है स्वादिष्ट गुलाब जामुन आप भी खाए अपने रिश्तेदारों और मेहमानो को भी खिलाए।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...