Monday, June 24, 2019

पुराने जमाने की तरफ बड़ते कदम....


मिट्टी के बर्तनों से स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों तक और फिर कैंसर के खौफ से दोबारा मिट्टी के बर्तनों तक आ जाना,अंगूठा छापी से पढ़ लिखकर दस्तखतों (Signatures) पर और फिर आखिरकार अंगूठा छापी (Thumb Scanning) पर आ जाना,फटे हुए सादे कपड़ों से साफ सुथरे और प्रेस किए कपड़ों पर और फिर फैशन के नाम पर अपनी पैंटें फाड़ लेना,ज़्यादा मशक़्क़त वाली ज़िंदगी से घबरा कर पढ़ना लिखना और फिर P H D करके वॉकिंग ट्रेक (Walking Track) पर पसीने बहाना,क़ुदरती गिज़ा से प्रोसेसशुदा खानों (Canned Food) पर और फिर बीमारियों से बचने के लिए दोबारा क़ुदरती खानों (Organic Foods) पर आ जाना,
पुरानी और सादी चीज़ें इस्तेमाल करके ना पायदार ब्रांडेड (Branded) आइटम्ज़ पर और आखिरकार जी भर जाने पर फिर (Antiques) पर उतरना,बच्चों को इंफेक्शन से डराकर मिट्टी में खेलने से रोकना और फिर घर में बंद करके फिसड्डी बनाना और होश आने पर दोबारा Immunity बढ़ाने के नाम पर मिट्टी से खिलाना....इसकी अगर जाँच पड़ताल करें तो ये निष्कर्ष निकलता है कि टेक्नॉलॉजी ने तुम्हे जो दिया उससे बेहतर तो भगवान ने तुम्हे पहले से दे रखा है...मित्र अनुज कुमार जी आर्य

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