Monday, July 22, 2019

तीन दिन में तैयार की इलेक्ट्रिक रॉकेट बाइक 2 घंटे चार्ज पर चलेगी 40 किमी….


विशाखापत्तनम इलेक्ट्रिक गाड़ियों के शुरू हुए दौर में एक युवक ने इलेक्ट्रिक रॉकेट बाइक तैयार की है खास बात यह है कि इसकी कीमत सिर्फ 16 हजार रुपये है। जी गौतम नाम के इस युवक ने पॉप्युलर अमेरिकी ऑटोमोटिव कंपनी से प्रेरणा लेकर यह रॉकेट बाइक बनाई है। गौतम का दावा है कि उन्होंने सिर्फ तीन दिन में यह बाइक तैयार कर ली। जी गौतम ने बताया कि इस इलेक्ट्रिक बाइक में 36-वोल्ट की लिथियम बैटरी और 350-वॉट हब मोटर का इस्तेमाल किया गया है। 2 घंटे चार्ज करने पर यह बाइक 40 किलोमीटर तक चलेगी। इसकी टॉप स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा है। 
[डेटा साइंस में पोस्टग्रैजुएट जी गौतम 
यह इलेक्ट्रिक रॉकेट बाइक आवाज नहीं करती और पलूशन फ्री भी है। बाइक में हैंडब्रेक सिस्टम दिया गया है। डेटा साइंस में पोस्टग्रैजुएट जी गौतम इससे पहले भी अपने खास आविष्कारों के लिए चर्चा में रहे हैं। गौतम इससे पहले स्टीयरिंग लेस कार, हाइब्रिड बाइक और रेनबो स्कूटर बनाने के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्टीयरिंग लेस कार को मात्र 32 हजार रुपये में बनाया था। गौतम का कहना है कि उनकी स्टीयरिंग लेस कार भारत की पहली स्टीयरिंग लेस कार कही जा सकती है। वह अपने इन खास आविष्कारों का पेटेंन भी करा रहे हैं। गौतम ने बताया कि उन्होंने रॉकेट बाइक और स्टीयरिंग लेस कार के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।

Friday, July 19, 2019

महामृत्युंजय मंत्र का जप सावन में देता है सौ गुणा फल...जाने आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व...


 सावन के पवित्र महीने में भोले नाथ अर्थात शिव शंकर को प्रसन्न करना है तो महामृत्युंजय मंत्र का जा बीमारियां और हर तरह की मानसिक एवं शारीरिक परेशानियों को दूर करने के लिए बहुत असरदार माना गया है। ग्रंथों का मानना है कि इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल सकते हैं। स्वर विज्ञान के हिसाब से देखा जाए तो महामृत्युंजय मंत्र के अक्षरों का विशेष स्वर के साथ उच्चारण किया जाए तो उससे उत्पन्न होने वाली ध्वनी से शरीर में जो कंपन होता है। जिससे उच्च स्तरीय विद्युत प्रवाह पैदा होता है और वो हमारे शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करने में मदद करता है।
# पूर्ण महामृत्युंजय मंत्र:- ऊं हौं जूं सः ऊं भूर्भुवः स्वः ऊं त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ऊं स्वः भुवः भूः ऊं सः जूं हौं ऊं महामृत्युंजय मंत्र का आध्यात्मिक महत्व:- इसके पीछे सिर्फ धर्म नहीं है, पूरा स्वर सिद्धांत है। इसे संगीत का विज्ञान भी कहा जाता है। महामृत्युंजय मंत्र की शुरुआत ऊँ से होती है। लंबे स्वर और गहरी सांस के साथ ऊँ का उच्चारण किया जाता है। इससे शरीर में मौजूद सूर्य और चंद्र नाड़ियों में कंपन होता है। हमारे शरीर में मौजूद सप्त चक्रों में ऊर्जा का संचार होता है। जिसका असर मंत्र पढ़ने वाले के साथ मंत्र सुनने वाले के शरीर पर भी होता है। इन चक्रों के कंपन से शरीर में शक्ति आती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस तरह स्वर और सांस के तालमेल के साथ जाप करने पर बीमारियों से जल्दी मुक्ति मिलती है।
# वैज्ञानिक महत्व महामृत्युंजय मंत्र के हर अक्षर का विशेष महत्व और विशेष अर्थ है। प्रत्येक अक्षर के उच्चारण में अलग-अलग प्रकार की ध्वनियां निकलती हैं तथा शरीर के विशेष अंगो और नाड़ियों में खास तरह की कम्पन पैदा करती हैं। इस कंपन के द्वारा शरीर से उच्च स्तरीय विद्युत प्रवाह पैदा होता है। इस विद्युत प्रवाह से निकलने वाली तरंगे वातावरण एवं आकाशीय तरंगो से जुड़कर कर मानसिक और शारीरिक उर्जा देती है।# धार्मिक महत्व:- ये मंत्र ऋग्वेद और यजुर्वेद में भगवान शिव की स्तुति में लिखा है। इनके अलावा पद्मपुराण और शिवपुराण में भी इस महामंत्र का महत्व बताया गया है। 
शिव पुराण के अनुसार इस मंत्र का जाप करने से लंबी उम्र, आरोग्य, संपत्ति, यश और संतान प्राप्ति भी होती है। वहीं इस मंत्र का जप करने से 8 तरह के दोषों का भी नाश होता है। इस महामंत्र से कुंडली के मांगलिक दोष, नाड़ी दोष, कालसर्प दोष, भूत-प्रेत दोष, रोग, दुःस्वप्न, गर्भनाश, संतानबाधा जैसे कई दोषों का नाश होता है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन पर देवाताओं और असुरों की लड़ाई के समय शुक्राचार्य ने अपनी यज्ञशाला मे इसी महामृत्युंजय मंत्र के अनुष्ठान का उपयोग देवताओं द्वारा मारे गए राक्षसों को जीवित करने के लिए किया था। इसलिए इसे मृत संजीवनी के नाम से भी जाना जाता है।

महिलाओं को पीरियड्स के दौरान क्या करना क्या नही करना चाहिए...? सद्गुरु ने बताया मार्ग...


ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु भारत के मशहूर योगी और सूफी संत और लेखक हैं। उनका पूरा नाम जग्गी वासुदेव हैं। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने महिलाओं के पीरियड्स के दौरान धार्मिक कार्य, रसोई या पूजा स्थलों में प्रवेश करने से रोकने की प्रथा पर बचाव किया है। सद्गुरु ने महिलाओं के पीरियड्स के दौरान मंदिर में प्रवेश और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल नहीं होने का कारण बताया है। उन्होंने कहा कि मैं नहीं जानता कि  आपने ध्यान दिया है या नहीं। एक समय हर शिव मंदिर के आंगन में एक इमली का पेड़ हुआ करता था। इन पेड़ों को मंदिर के बाहर इसलिए लगाया जाता था क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि नेगेटिव एनर्जी देवताओं के आस-पास रहने का अवसर खो दें। इसलिए उन्होंने एक ऐसी जगह बना दी, जहां भूत-प्रेत देवताओं के स्थान यानी मंदिर के आस-पास रह सके।                                              
ऐसे में अगर एक महिला पीरियड्स में है और वह मंदिर या किसी धार्मिक स्थल में प्रवेश करती है तो उसके भूत-प्रेत या नेगेटिव एनर्जी से आकर्षित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है। सद्गुरु ने पीरियड्स के दौरान महिलाओं के बाहर न निकलने का कारण बताया। उन्होंने कहा कि आज जैसी परिस्थितियां है वैसी पहले नहीं थीं। पहले दुनिया जंगली जानवरों से भरी हुई थी। वन्य जीवन के लिए कोई खास क्षेत्र नहीं थे। हर जगह वन्यजीव विचरण करते थे। उस समय आप वन्य जीवन के साथ ही रहते थे। सदगुरु ने बताया कि जब महिलाएं पीरियड्स में होती हैं तो उनके शरीर से खून की गंध आती है। उस समय अगर आप बाहर जाएं, तो आपका जीवन खतरे में हो सकता है। मांसाहारी जानवर खून की गंध से आप पर हमला कर सकते हैं।
सदगुरु ने कहा कि सबसे अच्छा ये है कि महिलाएं पीरियड्स के दौरान बाहर न निकलें और कमरे में ही रहें। अगर वे बाहर आती हैं तो अपना जीवन खतरे में डाल रही हैं। क्योंकि जंगली जानवर 1 मील दूर से ही खून की गंध को पहचान लेता है। इस वजह से पीरियड्स के दौरान महिलाओं को भीतर होना चाहिए, न कि बाहर।

कम पैसे में एसी ट्रेन में सफर [गरीब रथ ट्रेन] का भविष्य संकट में....


2006 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने गरीब रथ ट्रेन की शुरुआत गरीबों को ध्यान में रख कर की थी। मक़सद गरीबों को कम पैसे में एसी ट्रेन की सुविधा देना था। रेल मंत्रालय जल्द ही गरीब रथ ट्रेन को बंद करने पर गंभीर हो चुका है। इस कड़ी में हफ्तेभर के भीतर दो गरीब रथ ट्रेनों के कम्पोजीशन भी बदले जा चुके हैं। पूरी तरह से थर्ड एसी इस ट्रेन में स्लीपर कोच भी जोड़े गए और भाड़ा भी रेलवे ने बढ़ा दिया। कम पैसे में एसी ट्रेन में सफर करने का सपना साकार करने वाली पटरी पर दौड़ती गरीब रथ ट्रेन को मंत्रालय बेपटरी करने की तैयारी में है।  शुरुआत काठगोदाम से जम्मू और कानपुर सेंट्रल गरीब रथ से हो चुकी है। उसके रेक बदल गए और पूरी तरह से थर्ड एसी ट्रेन में स्लीपर का बॉगी भी जोड़ दिया गया। 
इन दोनों गरीब रथ में महज़ 4 डिब्बे थर्ड एसी के रह गए और 7 डिब्‍बे स्लीपर के इसमें जोड़ दिया गए। जहां काठगोदाम से जम्मू का भाड़ा पहले 755 रुपये था उसको बढ़ाकर 1070 रुपये कर दिया गया। वहीं काठगोदाम से कानपुर सेंट्रल गरीब रथ का भाड़ा जो 475 रुपये होता था उसको बढ़ाकर 675 रुपये कर दिया गया। फिलहाल इन ट्रेनों की तादाद 26 है। रेल राज्यमंत्री सुरेश अगड़ी से गरीब रथ ट्रेन को बंद करने को लेकर सवाल पूछा गया तो जवाब गोल गोल मिला कहा जब जिसको जो सुविधा चाहिए दे रहे हैं। सबको सी चाहिए सबको सी दे रहे हैं। भारत बदल रहा है। भाड़े को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है।


Tuesday, July 16, 2019

एचआईवी से ज़्यादा तेज़ी से फैल रही है सिफिलिस बीमारी क्या...?


यौन संबंधों से फैलने वाली संक्रामक बीमारी सिफिलिस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ये भी खुलासा हुआ है कि एचआईवी से ज़्यादा तेज़ी से ये बीमारी फैल रही है। रोग निवारण एवं नियंत्रण के लिए बने नए यूरोपियन सेंटर के अध्ययन में इस बीमारी को लेकर और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आइसलैंड के आंकड़े तो ये कह रहे हैं कि सिफिलिस के मरीज़ों की संख्या में 850 फीसदी तक वृद्धि हुई है। इसी समय के दौरान केवल दो देश एस्टोनिया और रोमानिया रहे, जहां मरीज़ों की संख्या घटकर आधी या उससे भी कम रह गई है। सिफिलिस को लेकर आई ईसीडीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुष इस बीमारी के ज़्यादा शिकार हैं। आंकड़ों के हिसाब से 2017 में प्रति लाख पुरुषों में से 12.1 सिफिलिस के मरीज़ हैं, वहीं प्रति लाख में से 6.1 महिलाएं, हालांकि इन आंकड़ों में एक राहत की बात है कि 2005 से बच्चों में पैदाइशी तौर पर इस रोग के पाए जाने की संख्या में कमी आई है। यूरोप के अलावा अमेरिका और जापान जैसी जगहों पर महिलाओं को सिफिलिस होने के मामले बढ़ते दिख रहे हैं। क्या है ये बीमारी और क्या है इलाज? सिफिलिस एसटीआई यानी यौन संचरित संक्रमण है, जो ट्रेपानिमा पैलिडम नाम के बैक्टीरिया के कारण फैलता है और इसके लक्षण अलग अलग स्टेजों पर अलग अलग होते हैं।
संक्रमित रोगी अगर शुरूआती स्टेज पर है तो बगैर दर्द वाला अल्सर प्रमुख लक्षण है, जो ज़्यादातर गुप्तांगों या होंठों जैसे दूसरे अंगों पर भी हो सकता है। कुछ मामलों में ऐसे अल्सरों में दर्द की शिकायतें भी देखी जा चुकी हैं। आगे की स्टेज में, पूरे शरीर पर खराशों या लकीरों के निशान दिखते हैं। हथेलियों और तलवों पर ज़ख्म हो जाना आम लक्षण होते हैं। कुछ मरीज़ों में हाथ और पैर में ऐसे ज़ख्म नहीं देखे गए बल्कि खोपड़ी, धड़ और लिम्ब्स पर रैशेज़ पाए गए। अंतिम या खतरनाक स्टेज पर मरीज़ के अंगों पर रोग का हमला होता है। विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि यह संक्रमण इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसके लक्षण कई मामलों में दिखते नहीं हैं,लेकिन असुरक्षित यौन संबंधों से यह बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। इस बीमारी का इलाज आसान भी है और ज़्यादा महंगा भी नहीं है, लेकिन दिक्कत ये है कि कई बार लक्षण न दिखने पर इस बीमारी का पता देर तक चलता ही नहीं है,लेकिन ध्यान न दिए जाने पर ये बीमारी कठिन स्टेज पर पहुंच जाती है और इसके चलते एचआईवी का खतरा भी बढ़ जाता है। दूसरी ओर ये बीमारी गर्भ में पल रहे शिशु को प्रभावित करती है और उसे जन्मजात सिफिलिस हो सकता है। 
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता बढ़ाना ही इस संक्रमण से बचाव का सबसे सही रास्ता है। यौन संबंध, गुप्त रोग, यौन संक्रमण बीमारी, खतरनाक यौन संक्रमण, एड्स का इलाज ईसीडीसी की रिपोर्ट में सिफिलिस का बड़ा कारण समलैंगिक संबंधों को माना गया है। कारण है सोशल मीडिया? असुरक्षित यौन संबंधों के कारण फैलने वाले इस संक्रमण पर ईसीडीसी की रिपोर्ट में बड़ा कारण समलैंगिक संबंधों को माना गया है। इसके अलावा टुडे की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि सोशल मीडिया पर डेटिंग वेबसाइटों के कारण लोग कैज़ुअल सेक्स या कई पार्टनरों के साथ यौन संबंध बनाने की तरफ बढ़े हैं। ये एक बड़ा कारण है, जिससे इस रोग के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है। इनके अलावा और भी कारण हैं जैसे एड्स से बचाव के लिए कुछ दवाएं चलन में आ चुकी हैं। इन दवाओं का सेवन करने के बाद सेक्स करने पर एड्स नहीं होता।  ऐसे दावों के चलते लोग इन दवाओं का सेवन करने के बाद असुरक्षित तरीके से यानी बगैर कंडोम इस्तेमाल किए यौन संबंध बनाने की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसके कारण सिफिलिस जैसे संक्रमण की आशंकाएं बढ़ रही हैं। 
एक समाचार पोर्टल टुडे ऑनलाइन के मुताबिक गए ज़माने की सिफिलिस बीमारी को दुनिया में भुलाया जा चुका था, लेकिन ये फिर दुनिया भर में वापसी कर चुकी है। सिंगापुर के स्वास्थ्य अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि केवल सिंगापुर जैसे छोटे देश में ही पिछले पांच सालों में हर साल डेढ़ हज़ार नए मरीज़ बढ़ रहे हैं। वहीं, यूरोपियन सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार 2010 में ये बीमारी अपने न्यूनतम प्रभाव में थी, जबकि इसके बाद के सालों में ये तेज़ी से बढ़ी है और यूरोप में तो स्थिति भयानक हो रही है। क्या कहते हैं आंकड़े? यूरोपियन सेंटर यानी ईसीडीसी के मुताबिक साल 2017 में ही सिफिलिस के 33 हज़ार से ज़्यादा नए मरीज़ सामने आए। पूरे यूरोप में ये बीमारी तेज़ी से फैली है और अब तक 2 लाख 60 हज़ार से ज़्यादा प्रमाणित केस सामने आ चुके हैं। 2010 में जहां हर एक लाख लोगों में से औसतन 4.2 लोगों को ये बीमारी होना पाया गया था, 2017 में ये औसत 7.1 देखा गया। यूरोप के 15 देशों में 15 फीसदी मरीज़ों की बढ़ोत्तरी हुई।  पांच देशों आइसलैंड, आयरलैंड, यूके, जर्मनी और माल्टा में 100 फीसदी या उससे भी ज़्यादा मरीज़ बढ़े।


Sunday, July 14, 2019

गाय के दूध के मुकाबले बकरी के दूध में विटामिन ए की मात्रा अधिक....


एक अध्ययन में बकरी के दूध को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य पेश किए गए हैं। ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन में छपे RIMT के शोध में कहा गया है कि बकरी का दूध प्रीबायोटिक और एंटी इनफेक्शन गुणों से लैस होता है। यह नवजात शिशुओं में होने वाले गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल इनफेक्शन से रक्षा करता है। रिसर्च में कहा गया है कि बकरी के दूध में oligosaccharides नाम का एक तरह का प्रीबायोटिक होता है, जो आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करता है। इसके साथ ही यह खतरनाक बैक्टीरिया से बचाने में अहम रोल अदा करता है। शोध के मुताबिक बकरी के दूध में प्राकृतिक रूप से 14 प्रीबायोटिक oligosaccharides होते हैं। इनमें से 5 मां के दूध में भी होते हैं। आइए जानते हैं बकरी के दूध के बच्चों के लिए फायदों के बारे में:- बकरी के दूध में एग्लूटिनिन नाम का कंपाउंड नहीं होता है। यह दूध में मौजूद वसा को एकत्र नहीं होने देता है।
गाय के दूध में यह तत्व मौजूद होता है। livestrong.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक बकरी के दूध में छोटे फैट पार्टिकल होते हैं। साथ ही इसमें उपलब्ध प्रोटीन छोटे बच्चों में होने वाली दूध उलटने की समस्या को कम करने में मदद करता है। गाय के दूध के मुकाबले बकरी के दूध में सेलेनियम, नियासिन और विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है। अध्ययनों में यह भी पता चला है कि गाय के दूध की अपेक्षा बकरी के दूध में एलर्जी बढ़ाने वाले तत्व नहीं होते हैं। साथ ही इसमें लैक्टोज की मात्रा भी गाय के दूध के मुकाबले काफी कम होती है। अध्ययनों यह भी दावा किया जाता है कि बकरी के दूध में दिमाग की क्षमता बढ़ाने वाले सन्युग्म लिनोलिक ऐसिड भी होता है। शोध में कहा गया है कि बकरी का दूध आयरन के बेहतर इस्तेमाल में मदद करता है। इससे आयरन और कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स के साथ परस्पर क्रिया की संभावना कम हो जाती है। 
बकरी के दूध पीने वाले व्यक्ति का ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रहता है क्योंकि बकरी के दूध में पोटेशियम का स्तर काफी ज्यादा होता है जो ब्लड प्रेशर को कम या ज्यादा होने से रोकती है। इसके अलावा बकरी के दूध में सेलेनियम नामक एक मिनरल पाया जाता है। जो बॉडी के प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाने में मददगार होता है। कई डॉक्टर बच्चों को इसके सेवन का सुझाव देते है। इसके दूध में भारी मात्रा में कैल्शियम होता है जिससे हड्डियां मजबूत होती है और बच्चा जल्द चलने लगता है। इसके अलावा बकरी के दूध में 35 प्रतिशत तक फैटी एसिड मौजूद होता है जो शरीर के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है। कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। बकरी का दूध पीने से कैल्शियम की कमी पूरी होती है, और इससे हड्डियां मजबूत होती हैं। रिसर्च में पता चला है बकरी का दूध पीने से आंतों की सूजन कम होती है। रोजाना बकरी का एक ग्लास दूध पीना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।


Saturday, July 13, 2019

क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के पिछली तरफ मैग्नेटिक स्ट्रिप के पास छुपा होता राज का नंबर क्या आप जानते है...?


आजकल क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से पेमेंट करते समय ओटीपी के रूप में एक अतिरिक्त सुरक्षा लेयर उपलब्ध है। इसके बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से सीवीसी नंबर बेहद महत्वपूर्ण है। दूसरी बात ये है कि ये नंबर कार्ड के पीछे लिखा होता है,इसलिए ऑनलाइन पेमेंट करते समय इसे देख पाना आसान नहीं। वैसे सलाह ये दी जाती है कि आप अपने सीवीसी नंबर को यादकर उसे कार्ड से मिटा दें। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए कार्ड से पेमेंट करते समय आपसे कार्ड पर लिखा सीवीवी नंबर (CVV number) पूछा जाता है, जो आमतौर पर 3 डिजिट का होता है। इस नंबर के बिना पेमेंट नहीं होती है।
हालांकि, कुछ बैंक इसे सीवीसी कोड भी कहते हैं। यह इतना अधिक महत्वपूर्ण है कि इसे पूरी तरह से गोपनीय रखने की सलाह दी जाती है। सीवीवी नंबर का पूरा नाम है कार्ड वैरिफिकेशन वैल्यू (Card Verification Value) यानी कार्ड वैरिफिकेशन कोड (Card Verification Code) भी कहते हैं। CVC नंबर की खासियत:- यह कोड आपको अपने क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के पिछली तरफ मैग्नेटिक स्ट्रिप के पास देखने को मिलेगा। इस कोड की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये किसी भी सिस्टम पर आसानी से सेव नहीं होता है। कई बार आपने देखा होगा कि ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के समय आपके कार्ड की डिेटेल ऑटो सेव हो जाती है और अगली बार पेमेंट करते समय आपको कार्ड की पूरी डिलेट नहीं भरनी पड़ती है। 
सिर्फ सीवीसी नंबर इंटर करना होता है, क्योंकि सीवीसी नंबर सेव नहीं होता है। डेटा चोरी से आपको सुरक्षित रखता है:- सीवीसी नंबर डेटा चोरी के वक्त आपकी मदद करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बैंकिंग रेग्युलेशन के मुताबिक कोई भी मशीन सीवीसी नंबर को स्टोर नहीं कर सकती है। ऐसे में हो सकता है कि किसी मर्चेंट की वेबसाइट पर आपका कार्ड की डिटेल और व्यक्तिगत सूचना सेव हो, लेकिन आपका सीवीसी नंबर वहां नहीं होगा।

यूजर्स निजता के उल्लंघन मामले में फेस बुक को मिला 5 बिलियन डॉलर का सबसे बड़ा जुर्माना....


अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को जानकारी दी,अखबार ने कहा कि संघीय व्यापार आयोग ने 3-2 वोटों के साथ इस जुर्माने को मंजूरी दी है।  उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी के दो डेमोक्रेटिक सदस्यों ने इसके लिए असंतोष जताया था। रिपोर्ट के अनुसार गोपनीयता के उल्लंघन के मामले पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना होगा। हालांकि अंतिम रूप देने से पहले अभी इसके लिए न्याय विभाग से स्वीकृति मिलने की आवश्यकता है। दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक को अमेरिका और दुनिया भर के तमामा देशों में यूजर्स की निजता के उल्लंघन के मामले में पूछताछ और जांच का सामना करना पड़ रहा है। 
फेसबुक से यह भी पूछा गया है कि क्या उसने पहले किए गए समझौते का उल्लंघन करते हुए बिजनेस पार्टनर्स के साथ अनुचित तरीके से यूजर्स का डाटा शेयर तो नहीं किया था। इस साल के शुरूआत में में फेसबुक ने भी उपयोगकर्ता डेटा व्यवहार पर कानूनी निबटारे के लिए 3 बिलियन डॉलर से 5 बिलियन डॉलर का भुगतान करने की उम्मीद जताई थी। एफटीसी ने पिछले साल घोषणा की थी कि उसने कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा करोड़ों यूजर्स का निजी डेटा चुराने का मामला सामने के बाद फेसबुक के साथ 2011 के गोपनीयता समझौते में अपनी जांच को फिर से शुरू कर दिया है। राजनीतिक सलाहकार कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए काम किया था। कुछ फेसबुक आलोचकों का तर्क है कि कंपनी पर डेटा व्यवहार की निगरानी सहित सख्त प्रतिबंध लगाने चाहिए, या फेसबुक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को दंड के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होना चाहिए। 
वहीं उपभोक्ता समूह पब्लिक नॉलेज के शार्लोट श्लेमन ने एक बयान में कहा,मुझे उम्मीद है कि फेसबुक की व्यावसायिक कार्यप्रणालियों पर अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी। इसी महीने की शुरुआत में फेसबुक पर जर्मन की अथॉरटीज ने आरोप लगाया था कि जर्मनी में फेसबुक अपने सोशल मीडिया प्लेटफोर्म पर अवैध सामग्री वाले कन्टैंट को दिखा रही है, जिससे इंटरनैट ट्रांसपेरेंसी कानून का उल्लंघन हुआ है। इसके लिए अथॉरटीज ने फेसबुक पर 2.3 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ 83 लाख रुपए) का जुर्माना लगाया है।

Friday, July 12, 2019

पासपोर्ट ऑफिस चक्‍कर के झंझट से बचे घर बैठे ऐसे रिइश्यू कराएं पासपोर्ट...


सरकारी पोर्टल पासपोर्ट सेवा पासपोर्ट बनवाने के साथ इसे रिइश्यू कराने की सुविधा भी ऑनलाइन देता है। अगर आप पासपोर्ट बनवाने या उसे रिइशू कराने के लिए पासपोर्ट ऑफिस के चक्‍कर लगा कर परेशान हो गए हैं तो अब उसकी जरूरत नहीं है। ये काम अब आप पासपोर्ट ऑफिस बिना जाए भी कर सकते हैं। आइए आपको बताते हैं कि क्‍यों और कब कराना पड़ता है पासपोर्ट रि-इश्‍यू और क्‍या है इसका प्रोसेस-कब कराना पड़ता है पासपोर्ट रि-इश्‍यू पासपोर्ट के पेज खत्‍म हो जाने पर,इसकी वैलिडिटी खत्‍म हो जाने पर या खत्‍म होने वाली हो,पासपोर्ट खो जाने या चोरी हो जाने पर,पासपोर्ट डैमेज हो जाने पर,पर्सनल डिटेल्‍स चेंज करनी हो।
# स्टेप-1 पासपोर्ट सेवा ऑनलाइन पोर्टल https://portal2.passportindia.gov.in पर रजिस्‍ट्रेशन करा लॉग इन करें।अप्‍लाई फॉर फ्रेश पासपोर्ट/रि-इश्‍यू ऑफ पासपोर्टलिंक पर क्लिक करें। यहां दो विकल्प हैं। आप चाहें तो फॉर्म डाउनलोड कर भरकर वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं, या फिर आनलाइन ही भर सकते हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए Click here to fill the application form online ऑप्शन पर क्लिक करें।  यह Alternative 2 पेज के अंदर मौजूद रहता है।# स्‍टेप-2 जरूरी डिटेल्‍स भरकर सबमिट करें। अब वापस लॉग इन के बाद खुले पहले पेज पर जाएं और View Saved/Submitted Applications पर क्लिक करें। यहां आप अपनी एप्लीकेशन देख सकते हैं। अब पेमेंट करने के लिए रेडियो बटन पर क्लिक करें।
इसके बाद Pay and Schedule Appointment पर क्लिक करें। Online Payment को सिलेक्ट करें और Next पर क्लिक करें। पासपोर्ट सेवा केन्‍द्रों या पासपोर्ट ऑफिसेज में अपॉइन्‍टमेंट बुक करने के लिए ऑनलाइन पेमेंट अनिवार्य है। पेमेंट क्रेडिट/डेबिट कार्ड (मास्‍टर कार्ड और वीजा), इंटरनेट बैंकिंग, एसबीआई बैंक चालान के जरिए किया जा सकता है। स्‍टेप-3 अब आपके शहर में मौजूद या नजदीकी पासपोर्ट सेवा केंद्रों की लिस्ट स्क्रीन पर आएगी। इसमें अपनी सुविधा अनुसार अपॉइंटमेंट की तारीख और वक्त चुनें। इमेज में बने कैरेक्टर्स टाइप कर Next पर क्लिक करें। Pay and Book Appointment पर क्लिक करें। यहां से आप पेमेंट कर सकते हैं। पेमेंट पूरा होने के बाद आप एक बार फिर Passport Seva की वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे। 
अब Appointment Confirmation का पेज शो होने लगेगा। यहां अपॉइंटमेंट की पूरी डिटेल होगी।  एप्लीकेशन का प्रिन्ट निकालने के लिए Print Application Receipt पर क्लिक करें। इसमें एप्‍लीकेशन रेफरेंस नंबर (ARN) या अपॉइन्‍टमेंट नंबर मौजूद होगा। इस प्रिन्ट की जरूरत पासपोर्ट सेवा केन्द्र में पड़ेगी।# इन डॉक्युमेंट्स की है जरूरत:- पासपोर्ट रिइश्यू करने के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स रिइश्युएंस के कारण के आधार पर लिए जाते हैं। कारणों के हिसाब से अलगअलग डॉक्युमेंट लगते हैं। इनकी लिस्ट यहां मौजूद है।  https://portal2.passportindia.gov.in/AppOnlineProject/docAdvisor/reissuePassport

ई-मेल, स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर व अन्य डिवाइसेज में सेंधमारी रोकने के लिए कौनसे Password रखे....?


साइबर सिक्योरिटी फर्म स्प्लैशडेटा की रिसर्च हैक हुए 50 लाख अकाउंट्स पर आधारित है। फर्म ने 2018 के 25 सबसे खराब पासवर्ड की लिस्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल में दुनिया भर में 10 फीसदी लोगों ने इन 25 सबसे खराब पासवर्ड में से किसी एक का इस्तेमाल किया। स्प्लैशडेटा आसानी से हैक किए जाने वाले पासवर्ड की लिस्ट तैयार करने के लिए लाखों पासवर्ड का आकलन करती है। 2018 में सबसे ज्यादा हैक होने वाले पासवर्ड का खुलासा हुआ है। 
यह खुलासा साइबर सिक्योरिटी फर्म स्प्लैशडेटा ने किया है। हैक किए जाने वाले पासवर्ड की लिस्ट में 123456 सबसे टॉप पर रहा। वहीं, Password दूसरे नंबर पर रहा है। यह लगातार पांचवां साल है, जबकि ये दोनों पासवर्ड टॉप पर हैं। सिक्योरिटी रिसर्चर्स पासवर्ड को लेकर लगातार चेतावनी देते रहे हैं। इसके बावजूद दुनिया भर में लाखों लोग अपने ई-मेल, स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर और दूसरे डिवाइसेज को प्रोटेक्ट करने के लिए कमजोर और आसानी से पता लगाए जा सकने वाले पासवर्ड रख रहे हैं। 
इन पासवर्ड की लिस्ट में 123456 और Password के बाद तीसरे नंबर पर 123456789 है। वहीं, चौथे नंबर पर 12345678, पांचवें नंबर पर 12345, छठवें नंबर पर 111111, सातवें नंबर पर 1234567 हैं। इसके अलावा, सबसे खराब पासवर्ड की इस लिस्ट में sunshine, qwerty, iloveyou, princess, admin, welcome, 666666, abc123, football, 123123, monkey, 654321, !@#$%^&*, charlie, aa123456, donald, password1 और qwerty123 शामिल हैं। 
साइबर सिक्योरिटी फर्म ने सलाह दी है कि यूजर अलग-अलग लॉगिन के लिए अलग पासवर्ड का इस्तेमाल करें। ऐसा करने पर अगर हैकर्स को कोई एक पासवर्ड मिलता है तो वह आपके दूसरे ई-मेल, डिवाइसेज में सेंधमारी नहीं कर पाएगा।

हाथों में मौली- कलावा बांधने के क्या है फायदे....?


सभी धार्मिक कार्यों के पीछे कोई न कोई वैज्ञानकि वजह भी जरूर होती है।  इन्ही में से एक पूजा पाठ के बाद हाथों में मौली बांधना है। विशेष पूजा के बाद हिंदू धर्म में कलाई पर मौली बांधने का रिवाज है। मौली को हिंदुओ में काफी अहम माना जाता है,लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि कलाई पर मौली बांधने के पीछे एक वैज्ञानिक तर्क है जो स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा है। आपको बताते हैं मौली बांधने से जुड़े स्वास्थ्य लाभ। सुरक्षासूत्र के रूप में:- मौली को कई जगह कलावा भी कहा जाता है, यह दिखने में लाल और केसरी रंग का होता है। शास्त्रों के मुताबिक इसे रक्षा सूत्र भी कहा जाता है। 
माना जाता है कि कलाई पर मौली बांधने से जीवन पर आने वाले कई संकंट से रक्षा होती है,लेकिन ये धागा आपको कई रोगों से भी बचाता है। जिस कारण भी इसे रक्षा सूत्र कहा जाता है। भगवान का मिलता है आशीर्वाद:- हिदू शास्त्र में मौलि बांधने का महत्व भी बताया गया है। जिसके मुताबिक मौलि बांधने से त्रिवेदों और तीनों महादेवियों की कृपा होती है। ये महादेवियां हैं- महालक्ष्मी, जिनकी कृपा से धन संपत्ति आती है। दूसरी महादेवी हैं सरस्वती, जिनकी कृपा से विद्या बुद्धि प्राप्त होती है और तीसरी देवी हैं मां काली, इनकी कृपा से मनुष्य बल और शांति प्राप्त करता है। 
पवित्र धागा:- शास्त्रों के मुताबिल मौलि का रंग और उसका एक एक धागा मनुष्य को शक्ति प्रदान करता है न केवल इसे बांदने से बल्कि मौली से बनाई गईं सजावट की वस्तुओं को भी घर में रखने से भी बरक्कत होती है और पोजिटिविटी आती है। आर्थिक समस्याएं होती हैं दूर:- ऐसा माना जाता है कि मौली में देवी-देवता का प्रारूप होता है। मौली का धागा कच्चे सूत से तैयार किया जाता है और यह कई रंगों जैसे पीला, सफेद, लाल और नारंगी का होता है।  इसे कलाई पर बांधने से आर्थिक समस्या भी दूर होती है। बीमारियों को रखता है दूर:- दरअसल, कलाई पर मौलि बांधने से हर वक्त ये नसों को जुड़ा रहता है जो कई बीमारियों को दूर रखने में भी मदद करता है। इससे रक्त का संचार अच्छे से होता है। 
जिसकी वजह से रक्त का संचार बेहतर होता है और रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव होता है। प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाए:- जब आप कलाई पर मौलि बांधते हैं तो एक्यूप्रेशर के अनुसार रक्त में कोई नरमता नहीं होती जो आपकी प्रतिरक्षा को मजबूत और फिट रखती है।


भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो , नमस्कार! देश और विदेश में रहने वाले , हम भारत के लोग , उत्साह के साथ , गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मै...